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हजारों एकड़ में फसल को खराब कर गई ओलावृष्टि
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भिवानी। ओलावृष्टि से 10 हजार एकड़ से ज्यादा सरसों और गेहूं की फसल में नुकसान है। किसानों की माने तो 50 से 70 फीसदी तक नुकसान है। वहीं ओलावृष्टि के बाद खिली धूप से बची हुई फसल में बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है।
उल्लेखनीय है कि वीरवार दोपहर बाद जिले के करीब 16 गांवों में ओलावृष्टि हुई थी। जिससे किसानों की गेहूं और सरसों की फसल में नुकसान हुआ। सैय गांव में ओलावृष्टि ज्यादा थी। शुक्रवार को कृषि विभाग के अधिकारियों ने गांवों में जाकर सर्वे किया और पाया कि कुछ गांवों में ज्यादा नुकसान है। वहीं किसानों ने नुकसान ज्यादा बताते हुए जल्द से जल्द गिरदावरी कराकर मुआवजा दिए जाने की मांग की।
पांच हजार एकड़ में फसल हुई बर्बाद
चांग। वीरवार को तेज बरसात के साथ हुई ओलावृष्टि ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया। गांव सैय में हुई ओलावृष्टि से करीब 5000 एकड़ में खड़ी गेहूं व सरसों की फसल बर्बाद हो गई है। किसानों ने बताया कि गेहूं की फसल में हुए नुकसान का सही आकलन अगले दो दिनों में पता लगेगा।
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22 एकड़ की फसल हो गई बर्बाद
गांव सैय निवासी किसान सुखबीर ने बताया कि करीब 22 एकड़ में गेहूं की बिजाई कर रखी है। इस बार गेहूं की फसल अच्छी होने की वजह से खेती में अच्छा फायदा होने की उम्मीद थी, लेकिन तेज बरसात के साथ हुई ओलावृष्टि ने सारी फसल बर्बाद करके रख दी है। प्रति एकड़ के हिसाब से 20 हजार रुपये का नुकसान हुआ है।
गेहूं और सरसों दोनों फसल हो गई बर्बाद
किसान अजीत ने बताया कि चार एकड़ में फसल लगा रखी थी दो एकड़ में गेहूं ओर दो एकड़ में सरसों की फसल लगा रखी थी, सरसों की फसल की जल्द ही कटाई करने वाले थे, लेकिन वीरवार को हुई ओलावृष्टि ने अरमानों पर पानी फेर दिया है।
अच्छी फसल से कर्जा उतरने की उम्मीदों पर पड़ गए ओले
किसान पप्पु ने बताया कि इस बार गेहूं और सरसों की फसल में अच्छी आमदनी होने की आस थी, इस बार सोचा था सभी कर्जे उतार देगी। ओलावृष्टि ने सब कूछ बर्बाद करके रख दिया है। प्रति एकड़ 20 हजार रुपये के नुकसान के हिसाब से लाखों रुपये का नुकसान किसानों को हुआ है। सरकार से मांग करते है कि जल्द से जल्द ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों की गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजा दिया जाए।
ओलावृष्टि से लेघां हेतवान, भानान में ज्यादा नुकसान
कैरू। वीरवार दोपहर के बाद कैरू के आसपास के क्षेत्रों में हल्की बूंदा बादी व ओलावृष्टि से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। बरसात के साथ ओलावृष्टि से किसानों की उम्मीदें ही टूट गई। कैरू क्षेत्र के गांव ढांगर, लेघां भानान, लेघां हेतवान, सुंगरपुर, जीतवानबॉस, बिजलाना बास इन गांव में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। खापड़वास, देवराला, ढांगर आदि गांवों में भी नुकसान हुआ है।
70 फीसदी तक हुआ नुकसान
सुंगरपुर निवासी किसान कृष्ण वर्मा, रणवीर, रोशन, जापान आदि का कहना कि ओलावृष्टि से गांव में 17 एकड़ खेतों में लगभग पांच लाख रुपये का नुकसान हुआ। किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि से फसल में 70 फीसदी तक नुकसान है। सरपंच श्यामसुंदर, अशोक, सुमेर, सतवीर, महावीर, बलबीर, दिलबाग, राजबीर आदि किसानों का कहना है कि ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है।
इस बारे में कैरू खंड किसान सभा सचिव रमेश जांगड़ा का कहना है कि किसानों की फसल में नुकसान हुआ है। जिसका बीमा है, उसको कंपनी मुआवजा देंगी और जिसका बीमा नहीं बना हुआ है उसके लिए प्रदेश सरकार से किसान सभा एकत्रित होकर मुआवजे की मांग करेगी।
कहीं 25 तो कही 50 फीसदी तक नुकसान
तोशाम। क्षेत्र के गांव थिलोड़, आलमपुर, पटौदी, संड़वा आदि गांवों ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हो गया है। ओलावृष्टि से सरसों की फसल में चालीस प्रतिशत के आसपास नुकसान है वहीं गेहूं के फसल में नाम मात्र का नुकसान हुआ है।
किसान सज्जन, भूपेंद्र, सत्यवान, सुखबीर, रमेश आदि का कहना है कि वीरवार को ओलावृष्टि हुई थी। उससे फसल में नुकसान हो गया है। किसान चिंतित है। किसानों का मानना है कि सरसों का फसल में नुकसान ओलावृष्टि से काफी ज्यादा है। गेहूं में सरसों के मुकाबले कम नुकसान है। सरसों की फसल पकाई के नजदीक है। सरसों की फसल में फलियां लगी हुई हैं। जिसमें दाना बना हुआ है जिस फली पर ओले की मार पड़ी है वह खत्म हो गई है। इस बारे में खंड़ कृषि अधिकारी संजय मक्कड़ ने बताया कि हर गांव में हर जगह अलग-अलग नुकसान है किसी एरिया में 25 प्रतिशत तो कही 40 प्रतिशत कही 50 प्रतिशत है।
उल्लेखनीय है कि वीरवार दोपहर बाद जिले के करीब 16 गांवों में ओलावृष्टि हुई थी। जिससे किसानों की गेहूं और सरसों की फसल में नुकसान हुआ। सैय गांव में ओलावृष्टि ज्यादा थी। शुक्रवार को कृषि विभाग के अधिकारियों ने गांवों में जाकर सर्वे किया और पाया कि कुछ गांवों में ज्यादा नुकसान है। वहीं किसानों ने नुकसान ज्यादा बताते हुए जल्द से जल्द गिरदावरी कराकर मुआवजा दिए जाने की मांग की।
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पांच हजार एकड़ में फसल हुई बर्बाद
चांग। वीरवार को तेज बरसात के साथ हुई ओलावृष्टि ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया। गांव सैय में हुई ओलावृष्टि से करीब 5000 एकड़ में खड़ी गेहूं व सरसों की फसल बर्बाद हो गई है। किसानों ने बताया कि गेहूं की फसल में हुए नुकसान का सही आकलन अगले दो दिनों में पता लगेगा।
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22 एकड़ की फसल हो गई बर्बाद
गांव सैय निवासी किसान सुखबीर ने बताया कि करीब 22 एकड़ में गेहूं की बिजाई कर रखी है। इस बार गेहूं की फसल अच्छी होने की वजह से खेती में अच्छा फायदा होने की उम्मीद थी, लेकिन तेज बरसात के साथ हुई ओलावृष्टि ने सारी फसल बर्बाद करके रख दी है। प्रति एकड़ के हिसाब से 20 हजार रुपये का नुकसान हुआ है।
गेहूं और सरसों दोनों फसल हो गई बर्बाद
किसान अजीत ने बताया कि चार एकड़ में फसल लगा रखी थी दो एकड़ में गेहूं ओर दो एकड़ में सरसों की फसल लगा रखी थी, सरसों की फसल की जल्द ही कटाई करने वाले थे, लेकिन वीरवार को हुई ओलावृष्टि ने अरमानों पर पानी फेर दिया है।
अच्छी फसल से कर्जा उतरने की उम्मीदों पर पड़ गए ओले
किसान पप्पु ने बताया कि इस बार गेहूं और सरसों की फसल में अच्छी आमदनी होने की आस थी, इस बार सोचा था सभी कर्जे उतार देगी। ओलावृष्टि ने सब कूछ बर्बाद करके रख दिया है। प्रति एकड़ 20 हजार रुपये के नुकसान के हिसाब से लाखों रुपये का नुकसान किसानों को हुआ है। सरकार से मांग करते है कि जल्द से जल्द ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों की गिरदावरी करवाकर उचित मुआवजा दिया जाए।
ओलावृष्टि से लेघां हेतवान, भानान में ज्यादा नुकसान
कैरू। वीरवार दोपहर के बाद कैरू के आसपास के क्षेत्रों में हल्की बूंदा बादी व ओलावृष्टि से किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। बरसात के साथ ओलावृष्टि से किसानों की उम्मीदें ही टूट गई। कैरू क्षेत्र के गांव ढांगर, लेघां भानान, लेघां हेतवान, सुंगरपुर, जीतवानबॉस, बिजलाना बास इन गांव में सबसे अधिक नुकसान हुआ है। खापड़वास, देवराला, ढांगर आदि गांवों में भी नुकसान हुआ है।
70 फीसदी तक हुआ नुकसान
सुंगरपुर निवासी किसान कृष्ण वर्मा, रणवीर, रोशन, जापान आदि का कहना कि ओलावृष्टि से गांव में 17 एकड़ खेतों में लगभग पांच लाख रुपये का नुकसान हुआ। किसानों ने बताया कि ओलावृष्टि से फसल में 70 फीसदी तक नुकसान है। सरपंच श्यामसुंदर, अशोक, सुमेर, सतवीर, महावीर, बलबीर, दिलबाग, राजबीर आदि किसानों का कहना है कि ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है।
इस बारे में कैरू खंड किसान सभा सचिव रमेश जांगड़ा का कहना है कि किसानों की फसल में नुकसान हुआ है। जिसका बीमा है, उसको कंपनी मुआवजा देंगी और जिसका बीमा नहीं बना हुआ है उसके लिए प्रदेश सरकार से किसान सभा एकत्रित होकर मुआवजे की मांग करेगी।
कहीं 25 तो कही 50 फीसदी तक नुकसान
तोशाम। क्षेत्र के गांव थिलोड़, आलमपुर, पटौदी, संड़वा आदि गांवों ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हो गया है। ओलावृष्टि से सरसों की फसल में चालीस प्रतिशत के आसपास नुकसान है वहीं गेहूं के फसल में नाम मात्र का नुकसान हुआ है।
किसान सज्जन, भूपेंद्र, सत्यवान, सुखबीर, रमेश आदि का कहना है कि वीरवार को ओलावृष्टि हुई थी। उससे फसल में नुकसान हो गया है। किसान चिंतित है। किसानों का मानना है कि सरसों का फसल में नुकसान ओलावृष्टि से काफी ज्यादा है। गेहूं में सरसों के मुकाबले कम नुकसान है। सरसों की फसल पकाई के नजदीक है। सरसों की फसल में फलियां लगी हुई हैं। जिसमें दाना बना हुआ है जिस फली पर ओले की मार पड़ी है वह खत्म हो गई है। इस बारे में खंड़ कृषि अधिकारी संजय मक्कड़ ने बताया कि हर गांव में हर जगह अलग-अलग नुकसान है किसी एरिया में 25 प्रतिशत तो कही 40 प्रतिशत कही 50 प्रतिशत है।