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40 फुट ऊंचे मिट्टी के तौंदे के नीचे दबीं मनरेगा महिला मजदूर, एक की मौत, दो गंभीर
Updated Thu, 17 May 2018 12:56 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी
गांव रिवासा में मनरेगा योजना के तहत मिट्टी उठान के काम में लगी महिला मजदूरों पर करीब 40 फुट ऊंचा मिट्टी का तौंदा गिर गया। मिट्टी के नीचे 6-7 महिलाएं दब गईं। इनमें से तीन महिलाओं को गंभीर हालत में निकाला गया। एक महिला की अस्पताल पहुंचने से पहले मौत हो गई। दो की हालत गंभीर बनी हुई है। बाद में मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीण जिला अस्पताल में धरने पर बैठ गए। पांच घंटे बाद देर शाम ग्रामीणों व प्रशासन के बीच वार्ता में पांच लाख मुआवजा व डीसी रेट पर नौकरी दिए जाने के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने धरना खत्म किया। परिजन वीरवार को शव लेंगे।
बुधवार को 12 बजे गांव रिवासा में उस समय हड़कंप मच गया, जब मिट्टी का तौंदा मजदूरों पर गिर गया। इसमें तीन महिला मजदूर मिट्टी के नीचे दब गई। घटना की जानकारी मिलते हैं गांव वासियों ने ट्रैक्टरों के सहारे से मिट्टी को हटाना शुरू कर दिया। 40 फुट ऊंचाई से बार-बार मिट्टी खिसकने से तीन महिलाएं आधा घंटे तक मिट्टी में ही दबी रही जबकि अन्य चार-पांच मनरेगा महिला मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया।
घायलों में से रिवासा निवासी मीना की अस्पताल पहुंचने के पहले ही मौत हो गई। जबकि शीला को हिसार रेफर कर दिया गया और प्रीति को जिला अस्पताल में दाखिल कर लिया। हादसे में संतरा, अंजू, रोशनी, सावित्री आदि महिलाएं भी मिट्टी के नीचे दब गई, लेकिन इन्हें ज्यादा गंभीर चोट नहीं आईं।
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मृतक महिला व घायलों के परिजनों ने सामान्य अस्पताल में सरपंच पर आरोप लगाते अस्पताल में हंगामा करना शुरू कर दिया और आरोप लगाया कि सरपंच की लापरवाही के कारण यह पूरी घटना हुई हैं।
मृतका मीना के पति रामकिशन ने बताया कि गांव रिवासा में पिछले काफी दिनों से गांव में 60 मनरेगा रोजगार के तहत काम दिया गया हैं जिसमें गांव में साफ-सफाई और सड़क निर्माण का कार्य चल रहा हैं। सड़क निर्माण के लिए पानी के टैंक से निकाली हुई मिट्टी का उठान कर सड़क पर डाला जा रहा हैं।
बाद में मृतका के परिजन मुआवजे और नौकरी की मांग को लेकर जिला अस्पताल में धरने पर बैठ गए। परिजनों ने मांगे रखी की जब तक मृत के परिजनों को दस लाख रुपये और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और घायलों को ढाई लाख रुपये दिए जाने की मांग उठाई।
छह दिन पहले की घटना से नहीं लिया सबक
छह दिन पहले भी मिट्टी खिसकने से रोहताश नामक मजदूर दब गया था। रोहताश के बेटे राकेश ने बताया कि इस घटना के बाद सरपंच को आगाह कर दिया था कि यहां काम करना खतरे से खाली नहीं है। इसके बावजूद सरपंच न इस विषय पर कोई कदम नहीं किया और मजदूरों को मिट्टी उठाने के लिए लगा दिया। अगर सरपंच द्वारा मिट्टी को समतल करवा दिया जाता तो यह घटना नहीं होती। घटना का पूरा जिम्मेदार सरपंच हैं।
मीना के बेटी की होनी थी शादी
हादसे में जान गंवाने वाली मीना की बेटी पूजा की शादी का कार्यक्रम तय किया गया था। पूजा की सगाई बलियाली गांव मेें की गई हैं और शादी की पूरी तैयार तक की जा चुकी हैं लेकिन घटना के बाद पूरा परिवार सदमे में पहुंच चुका हैं। मीना के पति रामकिशन ने बताया कि उसके तीन बेटे और दो बेटियां हैं, महीनेभर बाद बड़ी बेटी पूजा की शादी का कार्यक्रम करने की सोच रहे थे और अब यह घटना हो गई।
पांच घंटे बाद हुआ समझौता
अस्पताल में धरने पर बैठे परिजनों ने पांच घंटे तक धरना प्रदर्शन जारी रखा। धरना स्थल पर पहुंचे तोशाम बीडीओ, सांसद धर्मबीर व तहसीलदार रामनिवास भांभू ने परिजनों से समझौता कर पांच लाख की राशि देने का निर्णय लिया गया। एक लाख मनरेगा, डेढ़ लाख बीडीओ, व ढाई लाख सरकार की तरफ से दिलवाने के लिए सांसद धर्मबीर ने आश्वासन दिलवाया व साथ परिवार के एक सदस्य को डीसी रेट पर नौकरी दिलवाने पर सहमति बनी। वही परिजनों ने सभी मांगों को पूरा करने के लिए अधिकारी व नेताओं के साइन करवाए । इन सभी मांगों को जल्द पूरा करवाने के लिए कामरेड ओमप्रकाश ने परिजनों को आश्वासन दिलवाया और धरना प्रदर्शन खत्म किया।
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भिवानी
गांव रिवासा में मनरेगा योजना के तहत मिट्टी उठान के काम में लगी महिला मजदूरों पर करीब 40 फुट ऊंचा मिट्टी का तौंदा गिर गया। मिट्टी के नीचे 6-7 महिलाएं दब गईं। इनमें से तीन महिलाओं को गंभीर हालत में निकाला गया। एक महिला की अस्पताल पहुंचने से पहले मौत हो गई। दो की हालत गंभीर बनी हुई है। बाद में मुआवजे की मांग को लेकर ग्रामीण जिला अस्पताल में धरने पर बैठ गए। पांच घंटे बाद देर शाम ग्रामीणों व प्रशासन के बीच वार्ता में पांच लाख मुआवजा व डीसी रेट पर नौकरी दिए जाने के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने धरना खत्म किया। परिजन वीरवार को शव लेंगे।
बुधवार को 12 बजे गांव रिवासा में उस समय हड़कंप मच गया, जब मिट्टी का तौंदा मजदूरों पर गिर गया। इसमें तीन महिला मजदूर मिट्टी के नीचे दब गई। घटना की जानकारी मिलते हैं गांव वासियों ने ट्रैक्टरों के सहारे से मिट्टी को हटाना शुरू कर दिया। 40 फुट ऊंचाई से बार-बार मिट्टी खिसकने से तीन महिलाएं आधा घंटे तक मिट्टी में ही दबी रही जबकि अन्य चार-पांच मनरेगा महिला मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया।
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घायलों में से रिवासा निवासी मीना की अस्पताल पहुंचने के पहले ही मौत हो गई। जबकि शीला को हिसार रेफर कर दिया गया और प्रीति को जिला अस्पताल में दाखिल कर लिया। हादसे में संतरा, अंजू, रोशनी, सावित्री आदि महिलाएं भी मिट्टी के नीचे दब गई, लेकिन इन्हें ज्यादा गंभीर चोट नहीं आईं।
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मृतक महिला व घायलों के परिजनों ने सामान्य अस्पताल में सरपंच पर आरोप लगाते अस्पताल में हंगामा करना शुरू कर दिया और आरोप लगाया कि सरपंच की लापरवाही के कारण यह पूरी घटना हुई हैं।
मृतका मीना के पति रामकिशन ने बताया कि गांव रिवासा में पिछले काफी दिनों से गांव में 60 मनरेगा रोजगार के तहत काम दिया गया हैं जिसमें गांव में साफ-सफाई और सड़क निर्माण का कार्य चल रहा हैं। सड़क निर्माण के लिए पानी के टैंक से निकाली हुई मिट्टी का उठान कर सड़क पर डाला जा रहा हैं।
बाद में मृतका के परिजन मुआवजे और नौकरी की मांग को लेकर जिला अस्पताल में धरने पर बैठ गए। परिजनों ने मांगे रखी की जब तक मृत के परिजनों को दस लाख रुपये और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और घायलों को ढाई लाख रुपये दिए जाने की मांग उठाई।
छह दिन पहले की घटना से नहीं लिया सबक
छह दिन पहले भी मिट्टी खिसकने से रोहताश नामक मजदूर दब गया था। रोहताश के बेटे राकेश ने बताया कि इस घटना के बाद सरपंच को आगाह कर दिया था कि यहां काम करना खतरे से खाली नहीं है। इसके बावजूद सरपंच न इस विषय पर कोई कदम नहीं किया और मजदूरों को मिट्टी उठाने के लिए लगा दिया। अगर सरपंच द्वारा मिट्टी को समतल करवा दिया जाता तो यह घटना नहीं होती। घटना का पूरा जिम्मेदार सरपंच हैं।
मीना के बेटी की होनी थी शादी
हादसे में जान गंवाने वाली मीना की बेटी पूजा की शादी का कार्यक्रम तय किया गया था। पूजा की सगाई बलियाली गांव मेें की गई हैं और शादी की पूरी तैयार तक की जा चुकी हैं लेकिन घटना के बाद पूरा परिवार सदमे में पहुंच चुका हैं। मीना के पति रामकिशन ने बताया कि उसके तीन बेटे और दो बेटियां हैं, महीनेभर बाद बड़ी बेटी पूजा की शादी का कार्यक्रम करने की सोच रहे थे और अब यह घटना हो गई।
पांच घंटे बाद हुआ समझौता
अस्पताल में धरने पर बैठे परिजनों ने पांच घंटे तक धरना प्रदर्शन जारी रखा। धरना स्थल पर पहुंचे तोशाम बीडीओ, सांसद धर्मबीर व तहसीलदार रामनिवास भांभू ने परिजनों से समझौता कर पांच लाख की राशि देने का निर्णय लिया गया। एक लाख मनरेगा, डेढ़ लाख बीडीओ, व ढाई लाख सरकार की तरफ से दिलवाने के लिए सांसद धर्मबीर ने आश्वासन दिलवाया व साथ परिवार के एक सदस्य को डीसी रेट पर नौकरी दिलवाने पर सहमति बनी। वही परिजनों ने सभी मांगों को पूरा करने के लिए अधिकारी व नेताओं के साइन करवाए । इन सभी मांगों को जल्द पूरा करवाने के लिए कामरेड ओमप्रकाश ने परिजनों को आश्वासन दिलवाया और धरना प्रदर्शन खत्म किया।