फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   33 में से 13 एंबुलेंस कंडम, दो और में आई खराबी

33 में से 13 एंबुलेंस कंडम, दो और में आई खराबी

Thu, 26 Jul 2018 01:16 AM IST
Updated Thu, 26 Jul 2018 01:16 AM IST
विज्ञापन
33 में से 13 एंबुलेंस कंडम, दो और में आई खराबी
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

भिवानी। जीतूवाला जोहड़ वासी विष्णु की पत्नी छवि ने सामान्य अस्पताल में लड़के को जन्म दिया। बुधवार दोपहर के समय उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। दोपहर दो बजे एंबुलेंस के लिए कंट्रोल रूम में संपर्क किया मगर साढ़े चार बजे तक एंबुलेंस नहीं मिली। साढ़े चार बजे के बाद एंबुलेंस कंट्रोल रूम में दोबारा गए। वहां झगड़ा किया। उसके बाद भी आधे घंटे बाद एंबुलेंस मिली और वे घर जा सके। यह अकेले विष्णु के परिवार की कहानी नहीं बल्कि हर रोज सामान्य अस्पताल में जच्चा-बच्चा को इसी तरह परेशानी से जूझना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की 33 में से 13 एंबुलेंस कंडम हो चुकी हैं और दो और में खराबी आई हुई है। इसका सीधा असर यह हो रहा है कि अनेक क्षेत्रों में हादसा होने पर एंबुलेंस आधे से पौने घंटे में पहुंचती हैं। इतने समय में तो कोई भी गंभीर मरीज दम तोड़ सकता है।
सड़क हादसों में घायलों की जान बचाने के लिए शुरू की गई एंबुलेंस 108 नंबर सेवा कंडम होती एंबुलेंस के साथ दम तोड़ रही है। भिवानी जिले को 33 एंबुलेंस मिली मगर आज 13 एंबुलेंस कंडम खड़ी हैं। दो और एंबुलेंस धक्का मार हालत में हैं। स्वास्थ्य विभाग 10 से 15 मिनट में किसी भी स्थान पर एंबुलेंस पहुंचाने का दावा करता था मगर अब हालात ये हैं कि आधे से पौना घंटा में भी एंबुलेंस मिल जाए तो बड़ी बात है। सामान्य अस्पताल के जच्चा-बच्चा वार्ड से जच्चा-बच्चा को छुट्टी तो दे दी जाती है, मगर एंबुलेंस के लिए जच्चा-बच्चा को दो से तीन घंटे सीढ़ियों पर बैठकर इंतजार करना पड़ता है। यह हर रोज की कहानी है। मजबूरी में लोग प्राइवेट साधनों की व्यवस्था करने पर मजबूर है। काम कर रही 20 एंबुलेंस में भी अनेक खामियां हैं।
विज्ञापन

एंबुलेंस कंडम होने से बिगड़ी व्यवस्था
पहले करीब दो दर्जन सीएचपी, पीएचसी पर एंबुलेंस खड़ी होती थी ताकि नजदीकी क्षेत्रों में हादसा या जरूरत पड़ने पर तुरंत एंबुलेंस पहुंच सके। मगर 13 एंबुलेंस खराब हो गई हैं। अब धनाना सीएचसी पर कोई एंबुलेंस नहीं है। यहां आसपास हादसा होने पर भिवानी से एंबुलेंस भेजी जाती है। ईश्रवाल में कोई एंबुलेंस नहीं है। यहां आसपास हादसा होने पर तोशाम या बहल से एंबुलेंस भेजी जाती है जोकि 20 से 25 किलोमीटर दूर है। अब ढिगावा में भी एंबुलेंस सेवा नहीं है। यहां जूई या लोहारू से एंबुलेंस भेजी जाती है। यानी दूर-दराज के क्षेत्रों से एंबुलेंस के पहुंचने में आधे से पौना घंटा लगना लगभग तय है।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक-दो घंटे बाद का देते हैं समय और उसके भी एक-दो घंटे बाद मिली है सुविधा
सामान्य अस्पताल में खासकर डिलवरी व बच्चों की जांच के लिए पहुंची महिलाओं को इसकी खास परेशानी का सामना करना पड़ता है। डिलीवरी व बच्चे की जांच के बाद डॉक्टरों के द्वारा पर्ची देकर एंबुलेंस की बुकिंग के लिए भेजा जाता है ऐसे में बुकिंग के समय ही मरीजों के परिजनों को एक से दो घंटे वेट करने के लिए कहा जाता है लेकिन इसके बाद भी दिए गए समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती।

एक एंबुलेंस में बैठाए जाते हैं तीन से चार मरीज
सरकार के द्वारा डिलवरी व अन्य मरीजों को घर से सामान्य अस्पताल व सामान्य अस्पताल से घर पहुंचने के लिए लगाई गई है लेकिन एंबुलेंस की कमी के कारण एक ही बार में तीन से चार मरीजों को गाड़ी में डालकर छोड़ने के लिए भेजा जाता है जिसका नुकसान डिलीवरी होने वाली महिला व बच्चों को होता है।
समस्या लोगों की जुबानी
डिलीवरी के 21 दिन बाद बच्चे को जांच करवाने के लिए सामान्य अस्पताल में पहुंचे हैं। एंबुलेंस बुकिं ग कुछ समय पहले ही करवाई है और उन्होंने एंबुलेंस न होने के कारण घंटे का इंतजार करने के लिए कहा है। सुबह एंबुलेंस के लिए फोन किया तो तीन घंटे बाद एंबुलेंस घर पर पहुंची और अब भी यहां पर घंटा इंतजार करना पड़ेगा।
मंजीत कुमार(छपार जोगियान)
--
बच्चे को जांच के लिए जहां पर जांच के लिए लाए हैं लेकिन बुकिंग के बाद डेढ़ घंटे का समय दिया था है अब बच्चे को लेकर वार्ड में इंतजार कर रहे की कब एंबुलेंस पहुंचेगी और घर पर पहुंच सकेंगे।
नरेश कुमार (विसलवास )
--
सामान्य अस्पताल में जांच के लिए मां के साथ पहुंचे हैं। डॉक्टर के द्वारा पर्ची दी गई और वह 108 में जमा करवा दी है इसके बाद एक घंटे का इंतजार करने के लिए कहा है सुबह छह बजे फोन अस्पताल में फोन किया था कि एंबुलेंस चाहिए लेकिन सुबह भी कभी एक एक घंटा कह कर नौ बजे एंबुलेंस घर पर पहुंची।

स्नेहलता (दादरी)
--
डिलीवरी होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया लेकिन दिए गए समय के तीन घंटे बाद भी एंबुलेंस नहीं मिल पाई जबकि चार एंबुलेंस अस्पताल में खड़ी थी। जब कर्मचारियों से ऐसा कहा तो वह भी ऊंची आवाज में बात करने लग गए। अनेक प्रयासों के बाद बाद दो बजे की बुकिंग की गई एंबुलेंस पांच बजे जाक र कहीं मिल पाई।
विष्णू(जीतूवाला जोहड़ )
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed