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किसानों के बच्चों ने किसानों का दिया समर्थन, अनशन पर बैठे पांच बच्चे
Updated Mon, 04 Jun 2018 12:48 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी।
एक से 10 जून तक गांव बंद आंदोलन में अब किसानों के साथ उनके बच्चे भी उतर आए हैं। लघु सचिवालय के बाहर किसानों के साथ बच्चों ने भी धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। उधर बहल में गांव बंद आदोलन के तहत किसानों ने दूध की सप्लाई करने की बजाय झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों में करीब 40 लीटर दूध वितरित किया। किसान भले ही आंदोलन पर हो मगर शहर में इसका असर दिखाई नहीं दिया। सब्जी मंडियों में सब्जियां खूब आ रही हैं तो लोगों को दूध भी आसानी से मिल रहा है।
लघु सचिवालय के बाहर गांव बन्द आंदोलन में किसानों को समर्थन देने के लिए किसानों के पांच बच्चों धरने पर बैठ गए और प्रशासन के लिखाफ जमकर नारेबाजी की। तीसरे दिन धरने की अध्यक्षता भाकियू युवा के जिला अध्यक्ष राकेश आर्य नीमड़ीवाली ने की। अनशन पर खुशवंत सिंहमार, आदित्य, अंशुल, अमित व हैप्पी बैठे। भाकियू युवा के जिला अध्यक्ष राकेश आर्य ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह व मुख्यमंत्री मनोहर लाल किसानों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं हैं। भाजपा ने अपने घोषणापत्र में सत्ता में आने पर किसानों के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की बात कही थी। लेकिन आज चार साल बीत चुके हैं लेकिन उनकी मांग को पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि भाकियू ने सामाजिक संगठनों व खाप प्रतिनिधियों से भी आह्वान किया हैं कि वे सोमवार 4 जून को उनके धरनास्थल पर पहुंचे और उनकी मांगों का समर्थन करें। सांकेतिक धरने में काला गोयत, वेदपाल घणघस, समुंद्र सिंहमार, दिलबाग मलिक, चांद सिवाच, दलिप सांगवान, बलबीर सिंह, सोमबीर स्टार, मामन श्योराण, रामनिवास यादव, विष्णु आदि मौजूद रहे।
फोटो: 05
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जुलूस निकाल, फ्री में 40 लीटर दूध बांट जताया रोष
बहल।
एक से दस जून तक चल रहे किसानों के गांव बंद आंदोलन के तीसरे दिन किसानों ने प्रदर्शन करते हुए जुलूस निकाला। किसानों ने सरकार के विरोध में तथा अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की। किसानों ने कहा कि सरकार उनकी मांगों को अनसुना कर रही है। किसानों ने झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर करीब 40 लीटर दूध का वितरण किया।
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रविवार को भारतीय किसान यूनियन तथा अलख मिल्क यूनियन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हुए। किसान नेता रवि आजाद ने कहा कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने, कर्जा मुक्ति एवं किसान की आय सुनिश्चित करने के लिए गांव बंद अभियान को समाज के हर वर्ग का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि गांव व शहर के लोग दूध, सब्जियों की किल्लत झेल कर भी किसानों के आंदोलन में उनके साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के नाम पर कुछ राजनीतिक पार्टियों के लोग दूध, सब्जी को सड़कों पर फैंक रहे हैं, वो उनके आंदोलन का हिस्सा नहीं है। इससे पहले किसानों ने पंचायत का आयोजन किया जिसमें वक्ताओं ने किसानों की समस्याएं रखी। बाद में किसानों ने बाजारों में प्रदर्शन किया औरदूध का निशुल्क वितरण किया। इस अवसर पर किसान नेता नरेन्द्र पूनिया, विजेन्द्र, दिनेश बीरान, संजय जाखड़, नंदू बीरान, सज्जन शर्मा, अनिल सोरड़ा, देबू बीरान, नरसिंह दास, सुखबीर पातवान, सुशील बालान, कृष्ण सिरसी, शमशेर सांगवान, विनोद बहल, रमेश बीरान, कुलदीप सांगवान, राजबीर भाकरां, राजेश नेता ढ़ाणी, सुरेन्द्र बीरान, नवीन जाखड़, सतीश सोरड़ा, संदीप रामपुरा, गोबिंद बहल, जग्गू सुरपुरा सहित अनेक लोग मौजूद रहे। पंचायत का संचालन प्रधान सोमवीर महला ने किया।
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भिवानी।
एक से 10 जून तक गांव बंद आंदोलन में अब किसानों के साथ उनके बच्चे भी उतर आए हैं। लघु सचिवालय के बाहर किसानों के साथ बच्चों ने भी धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। उधर बहल में गांव बंद आदोलन के तहत किसानों ने दूध की सप्लाई करने की बजाय झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों में करीब 40 लीटर दूध वितरित किया। किसान भले ही आंदोलन पर हो मगर शहर में इसका असर दिखाई नहीं दिया। सब्जी मंडियों में सब्जियां खूब आ रही हैं तो लोगों को दूध भी आसानी से मिल रहा है।
लघु सचिवालय के बाहर गांव बन्द आंदोलन में किसानों को समर्थन देने के लिए किसानों के पांच बच्चों धरने पर बैठ गए और प्रशासन के लिखाफ जमकर नारेबाजी की। तीसरे दिन धरने की अध्यक्षता भाकियू युवा के जिला अध्यक्ष राकेश आर्य नीमड़ीवाली ने की। अनशन पर खुशवंत सिंहमार, आदित्य, अंशुल, अमित व हैप्पी बैठे। भाकियू युवा के जिला अध्यक्ष राकेश आर्य ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह व मुख्यमंत्री मनोहर लाल किसानों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं हैं। भाजपा ने अपने घोषणापत्र में सत्ता में आने पर किसानों के लिए स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की बात कही थी। लेकिन आज चार साल बीत चुके हैं लेकिन उनकी मांग को पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि भाकियू ने सामाजिक संगठनों व खाप प्रतिनिधियों से भी आह्वान किया हैं कि वे सोमवार 4 जून को उनके धरनास्थल पर पहुंचे और उनकी मांगों का समर्थन करें। सांकेतिक धरने में काला गोयत, वेदपाल घणघस, समुंद्र सिंहमार, दिलबाग मलिक, चांद सिवाच, दलिप सांगवान, बलबीर सिंह, सोमबीर स्टार, मामन श्योराण, रामनिवास यादव, विष्णु आदि मौजूद रहे।
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जुलूस निकाल, फ्री में 40 लीटर दूध बांट जताया रोष
बहल।
एक से दस जून तक चल रहे किसानों के गांव बंद आंदोलन के तीसरे दिन किसानों ने प्रदर्शन करते हुए जुलूस निकाला। किसानों ने सरकार के विरोध में तथा अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की। किसानों ने कहा कि सरकार उनकी मांगों को अनसुना कर रही है। किसानों ने झुग्गी-झोपड़ियों में जाकर करीब 40 लीटर दूध का वितरण किया।
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रविवार को भारतीय किसान यूनियन तथा अलख मिल्क यूनियन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान एकत्रित हुए। किसान नेता रवि आजाद ने कहा कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने, कर्जा मुक्ति एवं किसान की आय सुनिश्चित करने के लिए गांव बंद अभियान को समाज के हर वर्ग का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि गांव व शहर के लोग दूध, सब्जियों की किल्लत झेल कर भी किसानों के आंदोलन में उनके साथ खड़े हैं।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के नाम पर कुछ राजनीतिक पार्टियों के लोग दूध, सब्जी को सड़कों पर फैंक रहे हैं, वो उनके आंदोलन का हिस्सा नहीं है। इससे पहले किसानों ने पंचायत का आयोजन किया जिसमें वक्ताओं ने किसानों की समस्याएं रखी। बाद में किसानों ने बाजारों में प्रदर्शन किया औरदूध का निशुल्क वितरण किया। इस अवसर पर किसान नेता नरेन्द्र पूनिया, विजेन्द्र, दिनेश बीरान, संजय जाखड़, नंदू बीरान, सज्जन शर्मा, अनिल सोरड़ा, देबू बीरान, नरसिंह दास, सुखबीर पातवान, सुशील बालान, कृष्ण सिरसी, शमशेर सांगवान, विनोद बहल, रमेश बीरान, कुलदीप सांगवान, राजबीर भाकरां, राजेश नेता ढ़ाणी, सुरेन्द्र बीरान, नवीन जाखड़, सतीश सोरड़ा, संदीप रामपुरा, गोबिंद बहल, जग्गू सुरपुरा सहित अनेक लोग मौजूद रहे। पंचायत का संचालन प्रधान सोमवीर महला ने किया।