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धान की पराली को जलाने से रोकें: ढ़ेसी
Updated Thu, 21 Sep 2017 12:59 AM IST
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जागरूकता अभियान चलाकर पराली को जलाने से रोकें : ढेंसी
भिवानी। राज्य के मुख्य सचिव डीएस ढ़ेसी ने पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए धान की पराली नहीं जलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए जागरूकता अभियान चलाकर किसानों में जागरूकता लाई जाए। इसके साथ ही उन्होंने सभी उपायुक्तों व कृषि विभाग को संबंधित गांवों के सरपंचों की भी जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जिलाधिकारियों को बताया कि यदि किसी गांव में बार-बार पराली जलाई जाती है या आगजनी की घटना होती है तो उस गांव की विकास राशि पर भी प्रतिबंध लग सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले साल पराली जलाने की वजह से दिल्ली सहित पूरे एनसीआर क्षेत्र में अत्यधिक प्रदूषण हो गया था। इस बार देश जूनियर फुटबाल विश्वकप की मेजबानी कर रहा है और कुछ मैच दिल्ली में अक्टूबर और नवंबर माह में खेले जाएंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण को लेकर न केवल भारत सरकार बल्कि प्रदेश सरकार भी गंभीर है। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि पराली जलाने की सूचना देने के लिए ग्राम सचिव व पटवारी की जिम्मेदारी तय करें।
उन्होंने निर्देश कि कृषि विकास अधिकारी गांवों में पराली नहीं जलाने के लिए किसानों में जागरूकता लाएंगे। उन्होंने कहा कि जिले में ऐसे गांवों की सूची तैयार की जाए जहां पर वर्ष 2014 से अब तक सबसे अधिक पराली जलाई जाती है। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण विभाग को निर्देश दिए कि पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए। इस मौके पर उपायुक्त अंशज सिंह, नगराधीश महेश कुमार, एसडीएम अजय चौपड़ा और पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. प्रताप सिंह संभ्रवाल, पोलूशन कंट्रोल बोर्ड से डॉ. आरके भौसले मौजूद थे।
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भिवानी। राज्य के मुख्य सचिव डीएस ढ़ेसी ने पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए धान की पराली नहीं जलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए जागरूकता अभियान चलाकर किसानों में जागरूकता लाई जाए। इसके साथ ही उन्होंने सभी उपायुक्तों व कृषि विभाग को संबंधित गांवों के सरपंचों की भी जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जिलाधिकारियों को बताया कि यदि किसी गांव में बार-बार पराली जलाई जाती है या आगजनी की घटना होती है तो उस गांव की विकास राशि पर भी प्रतिबंध लग सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले साल पराली जलाने की वजह से दिल्ली सहित पूरे एनसीआर क्षेत्र में अत्यधिक प्रदूषण हो गया था। इस बार देश जूनियर फुटबाल विश्वकप की मेजबानी कर रहा है और कुछ मैच दिल्ली में अक्टूबर और नवंबर माह में खेले जाएंगे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण को लेकर न केवल भारत सरकार बल्कि प्रदेश सरकार भी गंभीर है। उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि पराली जलाने की सूचना देने के लिए ग्राम सचिव व पटवारी की जिम्मेदारी तय करें।
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उन्होंने निर्देश कि कृषि विकास अधिकारी गांवों में पराली नहीं जलाने के लिए किसानों में जागरूकता लाएंगे। उन्होंने कहा कि जिले में ऐसे गांवों की सूची तैयार की जाए जहां पर वर्ष 2014 से अब तक सबसे अधिक पराली जलाई जाती है। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण विभाग को निर्देश दिए कि पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए। इस मौके पर उपायुक्त अंशज सिंह, नगराधीश महेश कुमार, एसडीएम अजय चौपड़ा और पशुपालन विभाग के उप निदेशक डॉ. प्रताप सिंह संभ्रवाल, पोलूशन कंट्रोल बोर्ड से डॉ. आरके भौसले मौजूद थे।
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