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कोर्ट के आदेश नहीं मानने पर किया अवमानना का केस, 12 जुलाई को प्रशासन व नप अधिकारियों को देना है जवाब
Updated Mon, 03 Jul 2017 08:43 PM IST
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सड़कों से नहीं हटे लावारिस पशु, प्रशासन के खिलाफ अवमानना का केस
- कोर्ट ने भेजा डीसी और सचिव को नोटिस, 12 जुलाई को देना होगा जवाब
- याची बोले, प्रशासन ने नहीं उठाए ठोस कदम, अब भी सड़कों पर पशुओं का जमावड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी।
कोर्ट ने डेढ़ महीने पहले आदेश दिए थे कि एक महीने के अंदर सड़कों से लावारिस पशु हटाने होंगे। इसके बाद भी सड़कों पर लावारिस पशुओं का जमावड़ा लगा है। इस मामले में अब कोर्ट में अवमानना का केस दायर किया गया है। इस केस पर कोर्ट ने जिला प्रशासन व नगर परिषद अधिकारियों से 12 जुलाई तक जवाब मांगा है।
उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता मंजू शर्मा ने लावारिस पशुओं की समस्या को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। इस पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने 16 मई को आदेश दिए थे कि एक महीने में लावारिस पशु सड़क पर नजर नहीं आने चाहिए। कोर्ट के आदेश के बावजूद एक महीने में प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए और न ही नप अधिकारियों ने। सप्ताह भर पहले लावारिस पशुओं को पकड़ नंदीशाला में छोड़ने का काम शुरू किया गया। अब तक नाममात्र पशुओं को ही नंदीशाला भेजा गया। अब भी गली-कॉलोनी, चौक-चौराहों पर लावारिस पशुओं की भरमार है।
गर्मी की छुट्टियों के बाद सोमवार को कोर्ट खुलते ही अधिवक्ता प्रवीण अत्री ने कोर्ट की अवमानना का केस दायर किया। इस पर कोर्ट ने नगर परिषद के सचिव व उपायुक्त को नोटिस भेजकर 12 जुलाई तक जवाब मांगा है। अधिवक्ता प्रवीण अत्री ने बताया कि जिला प्रशासन व नगर परिषद अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश न मानकर कोर्ट की अवमानना की है। नप ने शहर को लावारिस पशुओं, लावारिस कुत्तों व बंदरों से निजात दिलाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। लावारिस पशु सड़क पर घूम रहे हैं और हर रोज लोगों को चोट मार रहे हैं। लावारिस कुत्ते व बंदर भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हैं, मगर जिला प्रशासनिक अधिकारियों व नप अधिकारियों को कोर्ट के आदेशों की भी चिंता नहीं। इसी कारण कोर्ट की अवमानना का केस दायर किया।
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अधिवक्ता प्रवीण अत्री ने बताया कि कोर्ट के फैसले के अनुसार न सड़कों से लावारिस पशु हटे और न ही कोर्ट के फैसले को सार्वजनिक किया गया। यहां तक कि तीन हजार रुपये जो शिकायतकर्ता को दिए जाने थे, वह तक नहीं दिए गए हैं। कोर्ट की अवमानना पर जुर्माने और सजा दोनों का प्रावधान होता है।
लावारिस पशुओं ने मचाया घमासान
लावारिस पशुओं खासकर सांड़ों से शहर वासियों को निजात दिलाने के लिए प्रशासन की ओर से उठाए जा रहे कदम नाकाफी साबित हो रहे है। भोजावाली माता मंदिर क्षेत्र व पुराना बस स्टैंड पर सांड़ों की लड़ाई से हड़कंप मचा। ट्रैफिक लगभग पूरी तरह थम गया तो लोगों ने इधर-उधर भागकर अपनी जान बचाई। लड़ाई के दौरान तो सांड़ सामान तोड़ते ही है, लड़ाई के बाद तेजी से दौड़ते समय भी काफी नुकसान करते हैं।
फोटो 12
16 मई का आदेश : सड़क पर नजर नहीं आने चाहिए लावारिस पशु
शहर वासियों के लिए हादसों का सबब बन रहे लावारिस पशुओं की समस्या को लेकर अधिवक्ता मंजू शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गत 16 मई को बड़ा निर्णय दिया। फैसले में प्रशासन को एक महीने के भीतर लावारिस पशुुओं से निजात दिलाने को कहा गया था। याची ने कोर्ट में लावारिस पशुओं की समस्या को लेकर अमर उजाला की ओर से प्रकाशित समाचारों का भी जिक्र किया। कोर्ट के फैसले के बाद भी इस समस्या को लेकर अमर उजाला ने शृंखलाबद्ध समाचार छापे।
आफत बने हैं चार हजार लावारिस पशु
शहर में करीब चार हजार लावारिस पशु है। इनमें अधिकतर सांड़ हैं। शहर की सभी सड़कों, चौक-चौराहों व मुख्य सार्वजनिक स्थानों लावारिस पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। हर रोज सांड़ लड़ने के दौरान लोगों को भारी नुकसान पहुंचाते है। सांड़ अब तक आठ लोगों की जान ले चुके हैं तो कई को घायल कर चुके हैं।
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- कोर्ट ने भेजा डीसी और सचिव को नोटिस, 12 जुलाई को देना होगा जवाब
- याची बोले, प्रशासन ने नहीं उठाए ठोस कदम, अब भी सड़कों पर पशुओं का जमावड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी।
कोर्ट ने डेढ़ महीने पहले आदेश दिए थे कि एक महीने के अंदर सड़कों से लावारिस पशु हटाने होंगे। इसके बाद भी सड़कों पर लावारिस पशुओं का जमावड़ा लगा है। इस मामले में अब कोर्ट में अवमानना का केस दायर किया गया है। इस केस पर कोर्ट ने जिला प्रशासन व नगर परिषद अधिकारियों से 12 जुलाई तक जवाब मांगा है।
उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता मंजू शर्मा ने लावारिस पशुओं की समस्या को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। इस पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने 16 मई को आदेश दिए थे कि एक महीने में लावारिस पशु सड़क पर नजर नहीं आने चाहिए। कोर्ट के आदेश के बावजूद एक महीने में प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए और न ही नप अधिकारियों ने। सप्ताह भर पहले लावारिस पशुओं को पकड़ नंदीशाला में छोड़ने का काम शुरू किया गया। अब तक नाममात्र पशुओं को ही नंदीशाला भेजा गया। अब भी गली-कॉलोनी, चौक-चौराहों पर लावारिस पशुओं की भरमार है।
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गर्मी की छुट्टियों के बाद सोमवार को कोर्ट खुलते ही अधिवक्ता प्रवीण अत्री ने कोर्ट की अवमानना का केस दायर किया। इस पर कोर्ट ने नगर परिषद के सचिव व उपायुक्त को नोटिस भेजकर 12 जुलाई तक जवाब मांगा है। अधिवक्ता प्रवीण अत्री ने बताया कि जिला प्रशासन व नगर परिषद अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश न मानकर कोर्ट की अवमानना की है। नप ने शहर को लावारिस पशुओं, लावारिस कुत्तों व बंदरों से निजात दिलाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। लावारिस पशु सड़क पर घूम रहे हैं और हर रोज लोगों को चोट मार रहे हैं। लावारिस कुत्ते व बंदर भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हैं, मगर जिला प्रशासनिक अधिकारियों व नप अधिकारियों को कोर्ट के आदेशों की भी चिंता नहीं। इसी कारण कोर्ट की अवमानना का केस दायर किया।
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अधिवक्ता प्रवीण अत्री ने बताया कि कोर्ट के फैसले के अनुसार न सड़कों से लावारिस पशु हटे और न ही कोर्ट के फैसले को सार्वजनिक किया गया। यहां तक कि तीन हजार रुपये जो शिकायतकर्ता को दिए जाने थे, वह तक नहीं दिए गए हैं। कोर्ट की अवमानना पर जुर्माने और सजा दोनों का प्रावधान होता है।
लावारिस पशुओं ने मचाया घमासान
लावारिस पशुओं खासकर सांड़ों से शहर वासियों को निजात दिलाने के लिए प्रशासन की ओर से उठाए जा रहे कदम नाकाफी साबित हो रहे है। भोजावाली माता मंदिर क्षेत्र व पुराना बस स्टैंड पर सांड़ों की लड़ाई से हड़कंप मचा। ट्रैफिक लगभग पूरी तरह थम गया तो लोगों ने इधर-उधर भागकर अपनी जान बचाई। लड़ाई के दौरान तो सांड़ सामान तोड़ते ही है, लड़ाई के बाद तेजी से दौड़ते समय भी काफी नुकसान करते हैं।
फोटो 12
16 मई का आदेश : सड़क पर नजर नहीं आने चाहिए लावारिस पशु
शहर वासियों के लिए हादसों का सबब बन रहे लावारिस पशुओं की समस्या को लेकर अधिवक्ता मंजू शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गत 16 मई को बड़ा निर्णय दिया। फैसले में प्रशासन को एक महीने के भीतर लावारिस पशुुओं से निजात दिलाने को कहा गया था। याची ने कोर्ट में लावारिस पशुओं की समस्या को लेकर अमर उजाला की ओर से प्रकाशित समाचारों का भी जिक्र किया। कोर्ट के फैसले के बाद भी इस समस्या को लेकर अमर उजाला ने शृंखलाबद्ध समाचार छापे।
आफत बने हैं चार हजार लावारिस पशु
शहर में करीब चार हजार लावारिस पशु है। इनमें अधिकतर सांड़ हैं। शहर की सभी सड़कों, चौक-चौराहों व मुख्य सार्वजनिक स्थानों लावारिस पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। हर रोज सांड़ लड़ने के दौरान लोगों को भारी नुकसान पहुंचाते है। सांड़ अब तक आठ लोगों की जान ले चुके हैं तो कई को घायल कर चुके हैं।