फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   5 years imprisonmentIt is important for citizens to be educated: Swami Ramdev

Bhiwani News: 72 लाख डकारने वाले पूर्व सरपंच व ग्राम सचिव को पांच साल की कैद, दस-दस लाख जुर्माना की सजा

Tue, 03 Sep 2024 10:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Tue, 03 Sep 2024 10:19 PM IST
विज्ञापन
5 years imprisonmentIt is important for citizens to be educated: Swami Ramdev
भिवानी। गांव कालुवास में विकास कार्यों की 72 लाख रुपये की सरकारी राशि गबन मामले में पूर्व सरपंच रमेश कुमार और ग्राम सचिव जितेंद्र को न्यायालय ने पांच-पांच साल की कैद और दस-दस लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जबकि चार अन्य दोषियों को तीन-तीन साल की कैद और पांच-पांच लाख रुपये जुर्माना की सजा दी है। जुर्माना राशि न भरने पर अतिरिक्त सजा का भी प्रावधान किया है।
विज्ञापन

कालुवास अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज विजेंद्र सिंह पैतृक गांव है। विजेंद्र सिंह के बड़े भाई मनोज बैनीवाल ने गांव कालुवास में विकास कार्यों के लिए सरकार से मिली 72 लाख रुपये की सरकारी ग्रांट के गबन मामले की शिकायत की थी। इस मामले की जांच विजिलेंस की टीम ने की थी, जिसमें पूर्व सरपंच और ग्राम सचिव ने मिलीभगत कर फर्जी हस्ताक्षरों और फर्जी फर्माें के सहारे 72 लाख रुपये को डकार लिया था। विजिलेंस की टीम ने इस संबंध में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम सहित धोखाधड़ी की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी की गई।
विज्ञापन

एडिशनल सेशन जज संजीव आर्य की अदालत ने मंगलवार को इस मामले में दोषी करार दिए गए छह आरोपियों में कालुवास के पूर्व सरपंच रमेश कुमार और ग्राम सचिव जितेन्द्र को पांच-पांच साल की कैद और दस-दस लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसी तरह इस मामले में दोषी करार दिए गए आयरन स्टोर संचालक राजेश सिंगला, मार्बल स्टोर संचालक दिनेश, अर्थ मूवर हनुमान और जितेंद्र उर्फ जीतू को तीन-तीन साल की कैद और पांच-पांच लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने जुर्माना राशि न भरने पर अतिरिक्त सजा का भी प्रावधान किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन



ऐसे किया था 72 लाख रुपये की राशि का गबन
अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज विजेंद्र सिंह ने कॉमनवेल्थ या राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य और एशियाड खेलों में स्वर्ण पदक जीता था। तत्कालीन भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार ने एशियाड खेलों में पदक जीतने पर 51 और कॉमनवेल्थ खेलों में कांस्य पदक जीतने पर विजेंद्र के गांव में विकास कार्यों के लिए 21 लाख रुपये दिए थे। दोनों खेलों की विजेता राशि मिलाकर 72 लाख का बजट सरकार ने ग्राम पंचायत के खाता में भेजा था। ये पैसा विजेंद्र सिंह व उसके परिजनों की सहमति के अनुसार ही गांव में खेल स्टेडियम बनाने या फिर विकास कार्यों में लगाने का प्रावधान किया था। लेकिन मिलीभगत कर पूर्व सरपंच और ग्राम सचिव ने फर्जी हस्ताक्षर और फर्जी फर्माें के सहारे ये पैसा बंटरबांट कर डकार लिया। इस मामले की भनक विजेंद्र सिंह के बड़े भाई मनोज बैनीवाल को लगी तो उसने इसकी शिकायत सरकार के समक्ष की। सरकार ने इसकी जांच हिसार विजिलेंस को सौंपी। हिसार विजिलेंस ने जांच में 72 लाख रुपये गबन मामले में 13 लोगों के खिलाफ सरकारी राशि गबन व धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था। इसमें न्यायालय में पेश किए चालान के बाद चार आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया, जबकि 30 अगस्त को सुनवाई में न्यायालय ने पूर्व सरपंच, ग्राम सचिव सहित छह को दोषी करार दिया था।



विजेंद्र सिंह के गांव में हर हाल में बनाया जाए स्टेडियम
मनोज बैनीवाल ने कहा कि विजेंद्र सिंह ने विश्वभर में मुक्केबाजी में भिवानी को मिनी क्यूबा की पहचान दिलाई। ऐसे खिलाड़ी के पैतृक गांव में आज खेल मैदान तक नहीं है। गांव में युवा व खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए कालुवास में खेल स्टेडियम का निर्माण बेहद जरूरी है। इस खेल स्टेडियम का नाम भी अंतर राष्ट्रीय मुक्केबाज विजेंद्र सिंह के नाम पर होना चाहिए, ताकि युवा उनसे प्रेरणा लेकर खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें। मनोज बैनीवाल ने कहा कि भ्रष्टाचार करने वालों को इस सजा से सबक लेना चाहिए कि सरकारी राशि का गबन करना उनके लिए कितना हानिकारक हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed