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वैराग्य भाव उत्पन्न करने के उपाय बताए
Updated Sat, 09 Sep 2017 01:59 AM IST
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वैराग्य भाव उत्पन्न करने के उपाय बताए
भिवानी
जन्म-मृत्यु, जरा व्याधि के दु:खों का बार-बार भाव उत्पन्न करो तो वैराग्य भाव उत्पन्न हो जाता है। ये विचार गुरुदेव अनुपम मुनि ने शुक्रवार को स्थानीय एसएस जैन सभा पुराना हाउसिंग बोर्ड के प्रवचन हॉल में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
जैन मुनि ने कहा कि सोचे-समझे बिना विवेक व वैराग्य उत्पन्न नहीं हो सकता। वैराग्य को उत्पन्न करने के लिए जन्म मृत्यु का कारण, जरा भी दु:ख का कारण है। भगवान कृष्ण कहते हैं अंत काल में मेरा स्मरण करता हुआ जो भक्त अपने शरीर को त्याग देता है। वह मुझे प्राप्त करता है। इसलिए प्रत्येक क्षण अंतकाल का अंत करके परमात्मा का मनन करना चाहिए। जैन मुनि ने कहा कि सदैव उस प्रभु का चिंतन, रमण, मन होने पर अंत समय मति का सुधार होता है और जीवन और आत्मा का भी सुधार किया जा सकता है।
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जन्म-मृत्यु, जरा व्याधि के दु:खों का बार-बार भाव उत्पन्न करो तो वैराग्य भाव उत्पन्न हो जाता है। ये विचार गुरुदेव अनुपम मुनि ने शुक्रवार को स्थानीय एसएस जैन सभा पुराना हाउसिंग बोर्ड के प्रवचन हॉल में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
जैन मुनि ने कहा कि सोचे-समझे बिना विवेक व वैराग्य उत्पन्न नहीं हो सकता। वैराग्य को उत्पन्न करने के लिए जन्म मृत्यु का कारण, जरा भी दु:ख का कारण है। भगवान कृष्ण कहते हैं अंत काल में मेरा स्मरण करता हुआ जो भक्त अपने शरीर को त्याग देता है। वह मुझे प्राप्त करता है। इसलिए प्रत्येक क्षण अंतकाल का अंत करके परमात्मा का मनन करना चाहिए। जैन मुनि ने कहा कि सदैव उस प्रभु का चिंतन, रमण, मन होने पर अंत समय मति का सुधार होता है और जीवन और आत्मा का भी सुधार किया जा सकता है।
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