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Bhiwani News: शहर में 25 हजार अवैध नल उगल रहे दूषित जल

Thu, 21 Mar 2024 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Thu, 21 Mar 2024 11:51 PM IST
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25 thousand illegal taps are spewing contaminated water in the city
पेयजल स्पलाई में आ रहा गंदा पानी।
भिवानी। भिवानी शहर में करीब 25 हजार अवैध नल दूषित जल उगल रहे हैं, इसकी वजह इन नलों की न तो विभाग के पास कोई प्रमाणिकता है न ही इन्हें नियम से लिया गया है। इन नलों के जरिए सीवर युक्त गंदा पानी भी घरों तक पहुंच रहा है। सबसे अहम बात तो जिले के अधिकांश गांवों में भूमिगत ट्यूबवेल जल की ईसी (विद्युत चालकता) भी आठ से दस हजार के पार पहुंच गई है, जिसकी वजह से लोगों की सेहत भी बिगड़ रही है। ये पानी फसलों के लिए तो हानिकारक है ही लोगों द्वारा इसका सेवन किए जाने से गंभीर बीमारियां भी जन्म ले रही हैं।
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भिवानी शहर में करीब 75 हजार पेयजल कनेक्शन जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज हैं, इनमें करीब 35 हजार से अधिक कनेक्शन तो अवैध श्रेणी में आते हैं। इसमें अगर 25 हजार पेयजल कनेक्शनों की बात करें तो ये गंदा पानी ही उगल रहे हैं, क्योंकि इन कनेक्शनों को सीवर लाइन के बेहद नजदीक या फिर सीवर मैनहोल एवं हौद क्रॉस कर लिया गया है। इनके पुराने होने के साथ ही इनमें लीकेज की समस्या बनी है। भिवानी शहर के अंदर करीब 42 साल पुरानी पेयजल लाइन है, जिसमें अधिकांश लोहे व प्लास्टिक पाइप से लाइन डली है। जबकि विभाग अब जीआई पाइप डाल रहा है।
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लैब में भूमिगत पानी के सैंपल भी हो रहे फेल
भिवानी जिले के जूई, लोहारू, ढिगावा मंडी, बहल और सिवानी क्षेत्र के अधिकांश गांवों के अंदर लगे ट्यूबवेल और बोरवेल भी साढ़े तीन सौ से पांच सौ फुट गहराई तक पहुंच गए हैं। इन इलाकों के ट्यूबवेल पानी की सरकारी लैब में सेंपल जांच में विद्युत चालकता आठ से दस हजार आंकी जा रही है। लोहारू इलाके के 80 गांव और बहल क्षेत्र के 15 और सिवानी क्षेत्र के 12 गांवों का भूमिगत जल स्तर डेंजर जोन के दायरे में है। ये पानी पीने लायक तो कतई सही नहीं है। बल्कि फसल में इस्तेमाल करने पर पौधे पनपने के बजाय झुलस रहे हैं। इस पानी का स्वाद भी बेहद नमकीन और कड़वा हो चुका है। हालांकि इन गांवों में भूमिगत जल सुधार की दिशा में सरकार ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएं भी चलाई हैं, जिनमें मेरा पानी मेरी विरासत व खेत का पानी खेत में शामिल हैं। इसी तरह पौंड योजना भी अब शुरू हुई है। लेकिन इनसे भी अभी सकारात्मक रुझान नहीं मिले हैं, क्योंकि यहां हर साल औसतन बारिश भी बहुत कम दर्ज की जा रही है। जबकि भूमिगत जलस्तर का लगातार दोहन किया जा रहा है। यही वजह है कि हर साल यहां का पानी तीन से पांच फुट गहराई में ही खिसक रहा है।
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अधिकांश सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का भी नहीं हो रहा सदुपयोग
लघु सचिवालय के पुराने खंड में वाटर हार्वेस्टिंग का सिस्टम ही नहीं है, जबकि तृतीय खंड के भवन निर्माण का काम अभी चल रहा है। अधिकांश सरकारी विभागों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तो बने, मगर उचित रखरखाव के बगैर ये बीमार हो गए हैं, जिनका न तो कोई सदुपयोग होता है न प्रबंधन। ऐसे में सरकारी भवनों पर बारिश के पानी को संचय करने वाले ये कुंड लाखों का बजट खर्च के बाद भी अनुपयोगी बने हैं। हालांकि भूमिगत जल स्तर में भी इसका इसलिए फायदा नहीं है क्योंकि ये ज्यादातर पक्के टैंक हैं।
लैब में अधिकांश ट्यूबवेल यानी भूमिगत पानी के सैंपल ही आते हैं, जिनकी जांच के दौरान ईसी आठ से दस हजार तक भी आ रही है। ये पानी मिट्टी की सेहत को भी बिगाड़ रहा है, क्योंकि पानी के साथ काफी नीचे से अनेक घातक रासायनिक तत्व भी बाहर आ रहे हैं, जो उपजाऊ भूमि को भी बंजर बना सकते हैं।

-राजू मेहरा, वरिष्ठ विज्ञान सहायक, मिट्टी एवं जल परीक्षण लैब कृषि विभाग, भिवानी।
शहर में अधिकांश पेयजल कनेक्शन अवैध हैं, प्लास्टिक लाइनों में लिए गए कुछ अवैध कनेक्शन तो लोगों ने ऐसे ही छोड़कर दूसरे कनेक्शन ले रखे हैं, जिसकी वजह से अधिकांश शहरी दायरे में गंदे पानी की दिक्कतें हो रही हैं। पानी के लैब में सैंपल भी फेल आ रहे हैं।
- सतीशचंद्र, एसडीओ, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, शहरी पेयजल शाखा भिवानी।
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