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किसान सम्मान निधि योजना की सूची से अनेकों किसानों के नाम गायब
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अमर उजाला ब्यूरो
बहल। प्रधानमंत्री किसान समान निधि योजना के तहत जिन किसानों को लाभ देने के लिए जो सूची तैयार की है, उसमें अनेक किसान वंचित रह गए हैं। खासकर, ऐसे गैर मौरूसी (काश्तकार) किसान जिनको जमीन मरूसियत हुई है, उनके नाम लिस्ट में शामिल नहीं किए गए है। अकेले बहल कस्बे से हजारों किसानों के नाम सूची से गायब हैं।
बहल के अलावा अन्य गांवों में भी यहीं समस्या है। अब किसान अपने कागजात लेकर कभी राजस्व तो कभी कृषि अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर है। लेकिन, कृषि विभाग योजना में शामिल करने के लिए केवल उन्हीं किसानों के फार्म भरवा रहा है। जिनके नाम उनको जिला मुख्यालय से भेजी गई सूची में शामिल है। बहल में सात दिन बाद भी सात हजार किसानों में से केवल 350 किसानों ने ही योजना के लिए फार्म भरवाए है।
ये पेच है मामले में
किसान सम्मान निधि योजना में शामिल करने के लिए प्रशासन ने जो सूची तैयार की है, उसमें केवल उन्हीं किसानों के नाम भेजे गए है जो मलकियत के खाने में शामिल हैं। जबकि बहुत से किसान ऐसे थे जो लंबे समय से दूसरे की भूमि को जोतते थे। ऐसे गैर मौरूसी (काश्तकार) किसानों को लंबे समय तक काश्तकार होने के कारण जमीन उनके नाम मौरूस कर उनको मालिकाना हक दे दिया गया था। हालांकि, राजस्व रिकार्ड में वे मालिक तो बन गए थे लेकिन उनका नाम मलकियत के खाने में नहीं आया था। उनका नाम खानाकास्त में दर्शाया गया है। अब जो राजस्व विभाग ने सूची भेजी उसमें केवल मलकियत वाले किसानों को ही शामिल कर दिया गया।
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सबसे ज्यादा प्रभावित हैं 362, 346 व 366 नंबर खेवट में
किसी समय बहल के निवासी और अब दूर दराज के क्षेत्रों में व्यापार करने वाले अनेक ऐसे भूमिहर थे, जिनकी भूमि को दूसरे लोग जोतते थे। ऐसे लोगों को जब मालिकाना हक मिला तो उनके नाम राजस्व रिकार्ड में खानाकास्त में दर्ज हो गया। बहल में 362, 346 तथा 366 नंबर तीन खेवट ऐसी है, जिसमें ऐसे प्रभावित किसानों की संख्या सर्वाधिक है। नंबरदार ईश्वर सिंह ने बताया कि ये दोनों खेवट बड़ी है तथा इसमें अधिकतर लोग गैर मौरूसी थे। जिनको बाद में जमीन मौरूस हुई है। इसके अलावा खेवट में किसानों के साथ यही समस्या बनी है।
कई किसान पहली किस्त से हो सकते हैं वंचित
केंद्र सरकार ने बजट में जो प्रावधान किया है उसके अनुसार जिन किसानों के पास 2 हेक्टेयर यानि की पांच एकड़ से कम भूमि है उनको सरकार साल में दो-दो हजार रुपये की तीन किस्तों में सालाना छह हजार रुपये देगी। संभव है कि पहली किस्त चुनावों से पहले आ जाए लेकिन जो सूची जिला मुख्यालय से आई है उसमें ऐसे किसानों के नाम नहीं है। ऐसे में वे चिंतित है कि अगर सूची में संसोधन नहीं हुआ तो वे इस लाभ से वंचित रह जाएंगे।
ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो उसका पता लगाया जाएगा और इस बात की जांच करवाई जाएगी।
संजय बिश्नोई, जिला राजस्व अधिकारी, भिवानी
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बहल। प्रधानमंत्री किसान समान निधि योजना के तहत जिन किसानों को लाभ देने के लिए जो सूची तैयार की है, उसमें अनेक किसान वंचित रह गए हैं। खासकर, ऐसे गैर मौरूसी (काश्तकार) किसान जिनको जमीन मरूसियत हुई है, उनके नाम लिस्ट में शामिल नहीं किए गए है। अकेले बहल कस्बे से हजारों किसानों के नाम सूची से गायब हैं।
बहल के अलावा अन्य गांवों में भी यहीं समस्या है। अब किसान अपने कागजात लेकर कभी राजस्व तो कभी कृषि अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर है। लेकिन, कृषि विभाग योजना में शामिल करने के लिए केवल उन्हीं किसानों के फार्म भरवा रहा है। जिनके नाम उनको जिला मुख्यालय से भेजी गई सूची में शामिल है। बहल में सात दिन बाद भी सात हजार किसानों में से केवल 350 किसानों ने ही योजना के लिए फार्म भरवाए है।
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ये पेच है मामले में
किसान सम्मान निधि योजना में शामिल करने के लिए प्रशासन ने जो सूची तैयार की है, उसमें केवल उन्हीं किसानों के नाम भेजे गए है जो मलकियत के खाने में शामिल हैं। जबकि बहुत से किसान ऐसे थे जो लंबे समय से दूसरे की भूमि को जोतते थे। ऐसे गैर मौरूसी (काश्तकार) किसानों को लंबे समय तक काश्तकार होने के कारण जमीन उनके नाम मौरूस कर उनको मालिकाना हक दे दिया गया था। हालांकि, राजस्व रिकार्ड में वे मालिक तो बन गए थे लेकिन उनका नाम मलकियत के खाने में नहीं आया था। उनका नाम खानाकास्त में दर्शाया गया है। अब जो राजस्व विभाग ने सूची भेजी उसमें केवल मलकियत वाले किसानों को ही शामिल कर दिया गया।
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सबसे ज्यादा प्रभावित हैं 362, 346 व 366 नंबर खेवट में
किसी समय बहल के निवासी और अब दूर दराज के क्षेत्रों में व्यापार करने वाले अनेक ऐसे भूमिहर थे, जिनकी भूमि को दूसरे लोग जोतते थे। ऐसे लोगों को जब मालिकाना हक मिला तो उनके नाम राजस्व रिकार्ड में खानाकास्त में दर्ज हो गया। बहल में 362, 346 तथा 366 नंबर तीन खेवट ऐसी है, जिसमें ऐसे प्रभावित किसानों की संख्या सर्वाधिक है। नंबरदार ईश्वर सिंह ने बताया कि ये दोनों खेवट बड़ी है तथा इसमें अधिकतर लोग गैर मौरूसी थे। जिनको बाद में जमीन मौरूस हुई है। इसके अलावा खेवट में किसानों के साथ यही समस्या बनी है।
कई किसान पहली किस्त से हो सकते हैं वंचित
केंद्र सरकार ने बजट में जो प्रावधान किया है उसके अनुसार जिन किसानों के पास 2 हेक्टेयर यानि की पांच एकड़ से कम भूमि है उनको सरकार साल में दो-दो हजार रुपये की तीन किस्तों में सालाना छह हजार रुपये देगी। संभव है कि पहली किस्त चुनावों से पहले आ जाए लेकिन जो सूची जिला मुख्यालय से आई है उसमें ऐसे किसानों के नाम नहीं है। ऐसे में वे चिंतित है कि अगर सूची में संसोधन नहीं हुआ तो वे इस लाभ से वंचित रह जाएंगे।
ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो उसका पता लगाया जाएगा और इस बात की जांच करवाई जाएगी।
संजय बिश्नोई, जिला राजस्व अधिकारी, भिवानी