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25 प्रतिशत व्यापारियों ने नहीं भरी जीएसटी रिटर्न
Updated Sat, 30 Sep 2017 12:53 AM IST
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25 प्रतिशत व्यापारियों ने नहीं भरी जीएसटी रिटर्न
भिवानी। बार-बार तारीख बढ़ाए जाने के बावजूद 25 प्रतिशत से अधिक व्यापारी जीएसटी रिटर्न भरने को तैयार नहीं हैं। यानी, पहली (जुलाई माह) रिटर्न भरने में 25 प्रतिशत व्यापारी रिटर्न डिफाल्टर लिस्ट में आ गए। नियमन रिटर्न डिफाल्टर को 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना चुकाना होगा। रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 25 सितंबर थी। भिवानी और चरखी दादरी में 25 प्रतिशत से अधिक व्यापारियों ने जीएसटी रिटर्न (आर 3बी) भरने में रूचि नहीं दिखाई। यह संख्या जीएसटी में पंजीकृत (एनरोल) व्यापारियों में से है।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि वैट से जीएसटी में माइग्रेट हुए व्यापारियों में से 2200 से ज्यादा ने रिटर्न नहीं भरी। जीएसटी में नए एनरोल व्यापारियों में से भी करीब दो सौ ने रिटर्न नहीं भरी। दोनों जिलों से करीब 2400 व्यापारियों के रिटर्न (आर 3बी) न भरने की वजह से रिटर्न डिफाल्टर लिस्ट में इनका नाम दर्ज हो गया। उल्लेखनीय है कि रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख सरकार ने तीन बार बढ़ाई। पहले पांच सितंबर रखी, फिर बढ़ाकर 10 की। इसके बाद 25 सितंबर मुकर्रर की। इसके बावजूद जीएसटी रिटर्न भरने के लिए बड़ी संख्या में व्यापारी तैयार नहीं हुए।
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18 प्रतिशत व्यापारियों ने नहीं कराया पंजीकरण
वैट से जीएसटी में माइग्रेट होने में भी व्यापारी संकोच कर रहे हैं। यानी, वैट में जितने व्यापारी पंजीकृत थे, उनमें से 81-82 प्रतिशत ने जीएसटी में एनरोल लिया है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि 18 सितंबर तक लगभग साढ़े 78 सौ व्यापारियों ने जीएसटी में अपना पंजीकरण कराया। इसमें 20 लाख से ज्यादा आमदनी वाले डीलर भी शामिल हैं।
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टैक्स बेस लगभग यथावत
जीएसटी लागू होने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि टैक्स देने वालों की संख्या बढ़ेगी, लेकिन फिलहाल ऐसा नजर नहीं आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद भिवानी और चरखी दादरी में करीब 6.18 करोड़ रुपये जमा हुए। बताया जाता है कि यह लगभग पिछले साल जितना ही बनता है। हालांकि, आने वाले दिनों में टैक्स बेस बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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सॉफ्टवेयर स्लो, अपलोड में दिक्कत
जीएसटी का सॉफ्टवेयर को लेकर विभाग के साथ-साथ व्यापारियों को भी दिक्कत पेश आ रही हैं। कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सिस्टम स्लो तो रहता ही है। कई बार बंद भी हो जाता है। अपलोड करते वक्त बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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जीएसटी में पंजीकरण के लिए व्यापारियों को जागरूक किया जा रहा है। सरकार की ओर से कई जागरूक कार्यक्रम कराए हैं। 80 प्रतिशत से ज्यादा पंजीकृत हो चुके हैं। रिटर्न डिफाल्टर के लिए सौ रुपये प्रतिदिन जुर्माने का प्रावधान है। ऐसे व्यापारियों से बात की जाएगी और उन्हें मोटीवेट किया जाएगा।
मेजर जगजीत सिंह
डिप्टी एक्साइज एंड सेल्स टैक्स कमिश्नर (सेल्स टैक्स)
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भिवानी। बार-बार तारीख बढ़ाए जाने के बावजूद 25 प्रतिशत से अधिक व्यापारी जीएसटी रिटर्न भरने को तैयार नहीं हैं। यानी, पहली (जुलाई माह) रिटर्न भरने में 25 प्रतिशत व्यापारी रिटर्न डिफाल्टर लिस्ट में आ गए। नियमन रिटर्न डिफाल्टर को 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना चुकाना होगा। रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 25 सितंबर थी। भिवानी और चरखी दादरी में 25 प्रतिशत से अधिक व्यापारियों ने जीएसटी रिटर्न (आर 3बी) भरने में रूचि नहीं दिखाई। यह संख्या जीएसटी में पंजीकृत (एनरोल) व्यापारियों में से है।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि वैट से जीएसटी में माइग्रेट हुए व्यापारियों में से 2200 से ज्यादा ने रिटर्न नहीं भरी। जीएसटी में नए एनरोल व्यापारियों में से भी करीब दो सौ ने रिटर्न नहीं भरी। दोनों जिलों से करीब 2400 व्यापारियों के रिटर्न (आर 3बी) न भरने की वजह से रिटर्न डिफाल्टर लिस्ट में इनका नाम दर्ज हो गया। उल्लेखनीय है कि रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख सरकार ने तीन बार बढ़ाई। पहले पांच सितंबर रखी, फिर बढ़ाकर 10 की। इसके बाद 25 सितंबर मुकर्रर की। इसके बावजूद जीएसटी रिटर्न भरने के लिए बड़ी संख्या में व्यापारी तैयार नहीं हुए।
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18 प्रतिशत व्यापारियों ने नहीं कराया पंजीकरण
वैट से जीएसटी में माइग्रेट होने में भी व्यापारी संकोच कर रहे हैं। यानी, वैट में जितने व्यापारी पंजीकृत थे, उनमें से 81-82 प्रतिशत ने जीएसटी में एनरोल लिया है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि 18 सितंबर तक लगभग साढ़े 78 सौ व्यापारियों ने जीएसटी में अपना पंजीकरण कराया। इसमें 20 लाख से ज्यादा आमदनी वाले डीलर भी शामिल हैं।
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टैक्स बेस लगभग यथावत
जीएसटी लागू होने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि टैक्स देने वालों की संख्या बढ़ेगी, लेकिन फिलहाल ऐसा नजर नहीं आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद भिवानी और चरखी दादरी में करीब 6.18 करोड़ रुपये जमा हुए। बताया जाता है कि यह लगभग पिछले साल जितना ही बनता है। हालांकि, आने वाले दिनों में टैक्स बेस बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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सॉफ्टवेयर स्लो, अपलोड में दिक्कत
जीएसटी का सॉफ्टवेयर को लेकर विभाग के साथ-साथ व्यापारियों को भी दिक्कत पेश आ रही हैं। कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सिस्टम स्लो तो रहता ही है। कई बार बंद भी हो जाता है। अपलोड करते वक्त बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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जीएसटी में पंजीकरण के लिए व्यापारियों को जागरूक किया जा रहा है। सरकार की ओर से कई जागरूक कार्यक्रम कराए हैं। 80 प्रतिशत से ज्यादा पंजीकृत हो चुके हैं। रिटर्न डिफाल्टर के लिए सौ रुपये प्रतिदिन जुर्माने का प्रावधान है। ऐसे व्यापारियों से बात की जाएगी और उन्हें मोटीवेट किया जाएगा।
मेजर जगजीत सिंह
डिप्टी एक्साइज एंड सेल्स टैक्स कमिश्नर (सेल्स टैक्स)
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