फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   सरसों बेचने के लिए फर्द बनी किसानों के लिए टेंशन

सरसों बेचने के लिए फर्द बनी किसानों के लिए टेंशन

Sun, 08 Apr 2018 01:04 AM IST
Updated Sun, 08 Apr 2018 01:04 AM IST
विज्ञापन
सरसों बेचने के लिए फर्द बनी किसानों के लिए टेंशन
सरसों बेचने के लिए फर्द बनी किसानों के लिए टेंशन
विज्ञापन

भिवानी। साहब कल सरसों बेचने के लिए हमारे गांव की बारी है, लेकिन अभी तक फर्द नहीं मिल पाई। पिछले तीन दिन से सरसों के कागजातों को पूरा करने में लगे हुए हैं। सुबह नौ बजे से फर्द के लिए यहां लाइन में लगे हैं। अगर गांव की बारी निकल गई तो पता नहीं कितने दिन और इंतजार करना पड़ेगा। यहां के कर्मचारी भी कोई कागज लाने के लिए बोल रहे तो कभी समय पूरा होने की बात कह कल आने के लिए कह रहे हैं। सरकार किसानों को परेशान करने में लगी हुई न तो कोई कर्मचारी सहीं तरह से काम कर रहा है और न ही कोई सही व्यवस्था है। यह कहना है लघु सचिवालय में फर्द लेने के लिए लाइन में लगे किसानों का।
शनिवार को लघु सचिवालय में फर्द लेने के लिए पहुंचे किसानों की शाम तक लंबी कतार लगी रहीं। कई किसान तो पिछले पांच दिनों से फर्द लेने के लिए रजिस्ट्री आफिस मेें पहुंच रहे हैं, लेकिन बारी न आने पर शाम को खाली हाथ वापिस लौटना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि सरसों पिछले दस दिन से काट रखी है लेकिन सरकारी रेट के लिए फर्द व अन्य कागज मांग रखे हैं जो मिल नहीं रही है।
विज्ञापन


पिछले चार दिन से यहां के चक्कर काट रहे हैं। कर्मचारी कभी किसी कागज के लिए वापस भेज देते हैं तो कभी समय पूरा होने की बात कह देते हैं। पिछले चार दिन से सरसों के रजिस्ट्रेशन के लिए कागजों को पूरा करने में लगा हूं, लेकिन बात नहीं बन रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

राजपाल,गोलागढ़

सुबह नौ बजे से लाइन में लगा हूं, लेकिन बारी नहीं आई। सरकार हर बार कोई न कोई नई परेशानी किसानों के लिए खड़ी कर रही हैं। इन्हीं कारणों से आज किसान खेती करने के लिए कतरा रहा है । सरकार न तो किसानों की तरफ देख रही है और न कोई व्यवस्था कर रही है।
रामदयाल, गोलागढ़

कल सरसों बेचने के लिए गांव की बारी है और आज यहां पर लाइन में लगे हुए हैं। अगर आज भी फर्द न मिली तो पता नहीं कब अगली बारी आएगी। पिछले पांच दिनों से यहां के चक्कर काट रहा हूं।

- रामबिलास ,धारेड़ू

सरकारी रेट किसानों के लिए बहुत महंगा साबित हो रहा है। पहले तो छह महीने फसल को पालना पड़ता है, और जब फसल पककर तैयार होती है तो सरकारी खरीद पर कई तरह की शर्तें लगा दी जाती हैं। किसानों के साथ बहुत ही नाइंसाफी हो रही हैं। पिछले दस दिन से सरसों काट कर घर में रखी हुई हैं लेकिन बेच नहीं पर रहे।
-ओमप्रकाश, भानगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed