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श्राद्ध का प्रसाद बना जहर, 20 की मौत व 53 बीमार
Updated Fri, 22 Sep 2017 12:34 AM IST
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श्राद्ध का प्रसाद बना जहर, 20 गायों की मौत, 53 बीमार
भिवानी। आस्था एक बार फिर गायों के लिए जानलेवा साबित हुई। श्राद्ध और अमावस्या के प्रसाद के रूप में हलवा-पूरी खिलाने की वजह से 20 से अधिक गायों की मौत हो गई और 53 बीमार हो गई हैं। इनमें से 10 गायों की हालात गंभीर बनी हुई है। हालांकि, पशुपालन विभाग ने मृत गायों की संख्या नौ बताई है। पोस्टमार्टम के दौरान मृत गायों के पेट से पूरी व पॉलीथिन मिली है। इस घटना से नाराज गो सेवकों ने गायों का शव चौक पर रखकर प्रदर्शन किया। इसके बाद कार्रवाई के लिए नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
पिछले साल हुई गायों की मौतों से लोगों ने सबक नहीं लिया और श्राद्ध अमावस्या पर गायों को जमकर हलवा-पूरी खिलाई। नतीजतन, बुधवार रात से लेकर वीरवार सुबह तक शहर के अलग-अलग हिस्सों में 20 से अधिक गायों की मौत हो गई। जबकि पशु पालन विभाग ने नौ गायों की मौत और 53 के बीमार होने की पुष्टि की है। बीमार गायों का इलाज महम गेट स्थित गोशाला में चल रहा है। इलाज के लिए चिकित्सक डॉ. जय सिंह, डॉ. जयपाल, डॉ. विजय सनसनवाल व डा. संदीप सहरावत के अलावा चार वीएलडीए को लगाया गया है।
इतनी बड़ी संख्या में गायों की मौत के बाद गोसेवक आक्रोश में आ गए मृत गायों को वाहनों में भरकर रोहतक गेट चौक पर ले आए और सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया। गोसेवकों ने अंध भक्तों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस दौरान प्रशासनिक सुस्ती के विरोध में नारे लगाए। गोसेवकों का कहना है कि प्रशासन चुस्त होता तो गायों की जान बच सकती थी।
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मामले की गंभीरता को भांपते हुए नायब तहसीलदार नरेश कुमार, सिविल थाना प्रभारी संजय बिश्नोई, सिटी थाना प्रभारी पुलिस बल सहित मौके पर पहुंचे। शुरुआत में पुलिस ने गोसेवकों को जाम लगाने और मामले दर्ज करने की धमकी दी। लेकिन गोसेवक मृत गायों को दबाने तथा उनके पोस्टमार्टम की मांग पर अडे़ रहे।
गोसेवक संजय परमार ने बताया कि लोगों में जागरूकता की कमी की वजह से गायों को हलवा-पूरी और तला हुआ भोजन खिलाया। उन्होंने कहा कि पितरों की खुशी के लिए धर्म के नाम पर हो रही गायों की मौत पर रोक लगनी चाहिए। जो लोग गायों को हलवा-पूरी आदि खिलाते हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके बाद संजय परमार, अमर पाल भाट्टी, रविंद्र, रोहित, गोगी, परमबीर, बंसी, कृष्ण गुर्जर, रमन नायब ने तहसीलदार नरेश कुमार को ज्ञापन सौंपा।
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हलवा-पूरी और पॉलीथिन बनी मौत का कारण
डा. जय सिंह ने बताया कि नौ गायों की मौत हुई है और 53 बीमार हैं। इन में से दस की हालत गंभीर बनी हुई है। मृत गायों के पेट से पूरी और पॉलीथिन के टुकड़े मिले हैं। उन्होंने बताया कि इन हालात में गायों की मौत का मामला केवल भिवानी में ही सामने आता है। यहां आस्था के फेर में लोग यह बात भूल जाते हैं कि तला हुआ भोजन गायों के लिए नुकसानदेह है।
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भिवानी। आस्था एक बार फिर गायों के लिए जानलेवा साबित हुई। श्राद्ध और अमावस्या के प्रसाद के रूप में हलवा-पूरी खिलाने की वजह से 20 से अधिक गायों की मौत हो गई और 53 बीमार हो गई हैं। इनमें से 10 गायों की हालात गंभीर बनी हुई है। हालांकि, पशुपालन विभाग ने मृत गायों की संख्या नौ बताई है। पोस्टमार्टम के दौरान मृत गायों के पेट से पूरी व पॉलीथिन मिली है। इस घटना से नाराज गो सेवकों ने गायों का शव चौक पर रखकर प्रदर्शन किया। इसके बाद कार्रवाई के लिए नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
पिछले साल हुई गायों की मौतों से लोगों ने सबक नहीं लिया और श्राद्ध अमावस्या पर गायों को जमकर हलवा-पूरी खिलाई। नतीजतन, बुधवार रात से लेकर वीरवार सुबह तक शहर के अलग-अलग हिस्सों में 20 से अधिक गायों की मौत हो गई। जबकि पशु पालन विभाग ने नौ गायों की मौत और 53 के बीमार होने की पुष्टि की है। बीमार गायों का इलाज महम गेट स्थित गोशाला में चल रहा है। इलाज के लिए चिकित्सक डॉ. जय सिंह, डॉ. जयपाल, डॉ. विजय सनसनवाल व डा. संदीप सहरावत के अलावा चार वीएलडीए को लगाया गया है।
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इतनी बड़ी संख्या में गायों की मौत के बाद गोसेवक आक्रोश में आ गए मृत गायों को वाहनों में भरकर रोहतक गेट चौक पर ले आए और सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया। गोसेवकों ने अंध भक्तों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस दौरान प्रशासनिक सुस्ती के विरोध में नारे लगाए। गोसेवकों का कहना है कि प्रशासन चुस्त होता तो गायों की जान बच सकती थी।
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मामले की गंभीरता को भांपते हुए नायब तहसीलदार नरेश कुमार, सिविल थाना प्रभारी संजय बिश्नोई, सिटी थाना प्रभारी पुलिस बल सहित मौके पर पहुंचे। शुरुआत में पुलिस ने गोसेवकों को जाम लगाने और मामले दर्ज करने की धमकी दी। लेकिन गोसेवक मृत गायों को दबाने तथा उनके पोस्टमार्टम की मांग पर अडे़ रहे।
गोसेवक संजय परमार ने बताया कि लोगों में जागरूकता की कमी की वजह से गायों को हलवा-पूरी और तला हुआ भोजन खिलाया। उन्होंने कहा कि पितरों की खुशी के लिए धर्म के नाम पर हो रही गायों की मौत पर रोक लगनी चाहिए। जो लोग गायों को हलवा-पूरी आदि खिलाते हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके बाद संजय परमार, अमर पाल भाट्टी, रविंद्र, रोहित, गोगी, परमबीर, बंसी, कृष्ण गुर्जर, रमन नायब ने तहसीलदार नरेश कुमार को ज्ञापन सौंपा।
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हलवा-पूरी और पॉलीथिन बनी मौत का कारण
डा. जय सिंह ने बताया कि नौ गायों की मौत हुई है और 53 बीमार हैं। इन में से दस की हालत गंभीर बनी हुई है। मृत गायों के पेट से पूरी और पॉलीथिन के टुकड़े मिले हैं। उन्होंने बताया कि इन हालात में गायों की मौत का मामला केवल भिवानी में ही सामने आता है। यहां आस्था के फेर में लोग यह बात भूल जाते हैं कि तला हुआ भोजन गायों के लिए नुकसानदेह है।