{"_id":"59612c3b4f1c1b377f8b45ce","slug":"171499540539-bhiwani-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोक अदालत में 910 मामलों का हुआ निपटारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोक अदालत में 910 मामलों का हुआ निपटारा
Updated Sun, 09 Jul 2017 12:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोक अदालत में 910 मामलों का हुआ निपटारा
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश और जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के चेयरमैन एएस नारंग के मार्गदर्शन में शनिवार को जिलेभर में राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की र्गइं। लोक अदालत में कुल 2521 मामले पहुंचे। इनमें से 910 का आपसी सहमति से निपटारा कर दिया गया। निपटारे के दौरान पीड़ित पक्षों को 91 लाख 42 हजार 822 रुपये की राशि देने के आदेश दिए गए। मामलों के निपटारों के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री नारंग ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालतें लोगों के लंबित मामलों का निपटारा करने में एक मील का पत्थर साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि लोक अदालतों से लोगों को सस्ता, सुगम, सरल एवं समय पर न्याय मिलता है। इससे लोगों के समय और धन की बचत होती है। आपसी सहमति से निपटाए जाने वाले मामलों की किसी भी न्यायालय में अपील नहीं हो सकती है। लोक अदालत में मोटर वाहन दुर्घटना, बैंक ऋण, बीमा, पानी बिल, आपराधिक, वैवाहिक, राजस्व, सिविल केस सहित विभिन्न मामलों का निपटारा किया गया।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश और जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के चेयरमैन एएस नारंग के मार्गदर्शन में शनिवार को जिलेभर में राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की र्गइं। लोक अदालत में कुल 2521 मामले पहुंचे। इनमें से 910 का आपसी सहमति से निपटारा कर दिया गया। निपटारे के दौरान पीड़ित पक्षों को 91 लाख 42 हजार 822 रुपये की राशि देने के आदेश दिए गए। मामलों के निपटारों के दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री नारंग ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालतें लोगों के लंबित मामलों का निपटारा करने में एक मील का पत्थर साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि लोक अदालतों से लोगों को सस्ता, सुगम, सरल एवं समय पर न्याय मिलता है। इससे लोगों के समय और धन की बचत होती है। आपसी सहमति से निपटाए जाने वाले मामलों की किसी भी न्यायालय में अपील नहीं हो सकती है। लोक अदालत में मोटर वाहन दुर्घटना, बैंक ऋण, बीमा, पानी बिल, आपराधिक, वैवाहिक, राजस्व, सिविल केस सहित विभिन्न मामलों का निपटारा किया गया।