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भिवानी में सात, मेवात में तीन, कुरुक्षेत्र में 16 सस्पेक्टिड केस
Updated Thu, 12 Jul 2018 01:32 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। घोड़ों में पाई जाने वाली खतरनाक बीमारी ग्लैंडर ने एक बार फिर हरियाणा में दस्तक दी है। सोनीपत की लैब में प्रदेश के तीन जिलों के 26 केसों की सैंपल रिपोर्ट ने अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए हैं। अब इन 26 केसों को आशंकित मानकर दोबारा से सैंपल मंगवाए गए हैं। बीमारी इतनी खतरनाक है कि यदि घोड़े की सैंपल रिपोर्ट पॉजीटिव आती है तो उसे फारसी एक्ट के तहत मारने का ही प्रावधान है।
ग्लैंडर बीमारी अंग्रेजों के समय में काफी खतरनाक साबित हुई थी। उसके बाद वर्षों तक हरियाणा में कोई केस नहीं आया, मगर 2016 में फिर कुछ केस सामने आए। उस वर्ष पांच पॉजीटिव रिपोर्ट वाले घोड़ों को मारा गया था। कुछ महीने पहले हिसार में भी कुछ घोड़ों में यह बीमारी नजर आई थी, जिसके बाद हिसार में करीब तीन-चार घोड़ों को मारा गया। इसी दौरान हरियाणा में रेड अलर्ट जारी किया गया था। सभी जिलों से घोड़ों के सैंपल रिपोर्ट मांगी गई थी। भिवानी से 70, कुरुक्षेत्र से 70, मेवात से 36 सैंपल जांच के लिए पिछले महीने सोनीपत की राज्यस्तरीय लैब में भेजे गए। यहां जांच के दौरान 26 सैंपल ग्लैंडर बीमारी से आशंकित माना है।
सूत्र बताते हैं कि इन सैंपल की रिपोर्ट में काफी कुछ पॉजीटिव आया है। जिस कारण इन्हें आशंकित मानकर दोबारा से सैंपल जांच के लिए मंगवाए गए हैं। यदि सैंपल की रिपोर्ट पॉजीटिव आती है तो सैंपल को जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजा जाएगा। वहां से रिपोर्ट पॉजीटिव आने पर घोड़ों को मारने की अनुशंसा की जाएगी। फारसी एक्ट के अनुसार घोड़ों को मारने का प्रावधान है। इसके अलावा पशु मालिकों को सरकार की ओर से मुआवजा दिया जाता है।
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घोड़ों से मनुष्य और स्तनधारिया में फैलती है बीमारी
ग्लैंडर बीमारी बल्कोलडेरिया बैक्टिरिया से फैलता है। यह बीमारी भारत सरकार की ओर से नोटिफाइवल कैटेगरी में आती है। घोड़ों के अलावा स्तनधारी पशुओं और मनुष्य में भी हो सकती है। यह संक्रमण के तौर पर फैलती है। ऐसे में पशुपालकों को ऐसे आशंकित पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखना चाहिए और उनके संपर्क में आने से बचना चाहिए। क्योंकि पीड़ित पशु के संपर्क में आने से मनुष्य में भी यह बीमारी फैलने की काफी संभावना रहती है।
ये हैं ग्लैंडर बीमारी के लक्षण
- बीमारी से पीड़ित पशु के नाक से पीले रंग का पानी आता है
- चमड़ी में गांठे पड़ने लगती हैं
- पशु के नाक में जख्म हो जाते हैं
- पशु सुस्त रहने लगता है और चारा नहीं खाता
वर्जन :::
घोड़ों में पाई जाने वाली ग्लैंडर बीमारी के प्रति हरियाणा में रेड अलर्ट है। जांच के लिए करीब 70 सैंपल भेजे हुए है। आशंकित आए केसों में दोबारा से सैंपल लेकर जांच के लिए दोबारा भेजा जाएगा। पॉजीटिव केस आने पर फारसी एक्ट के तहत पशु को मारने का ही प्रावधान है। जो भी आशंकित मामले सामने आए हैं उन पशुपालकों को हिदायत दी गई है कि वे उन पशुओं को ना बेेंचे और उन्हें किसी अन्य स्थान पर भी ना लेकर जाएं।
-डॉ. जय सिंह, उप निदेशक पशु पालन विभाग
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भिवानी। घोड़ों में पाई जाने वाली खतरनाक बीमारी ग्लैंडर ने एक बार फिर हरियाणा में दस्तक दी है। सोनीपत की लैब में प्रदेश के तीन जिलों के 26 केसों की सैंपल रिपोर्ट ने अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए हैं। अब इन 26 केसों को आशंकित मानकर दोबारा से सैंपल मंगवाए गए हैं। बीमारी इतनी खतरनाक है कि यदि घोड़े की सैंपल रिपोर्ट पॉजीटिव आती है तो उसे फारसी एक्ट के तहत मारने का ही प्रावधान है।
ग्लैंडर बीमारी अंग्रेजों के समय में काफी खतरनाक साबित हुई थी। उसके बाद वर्षों तक हरियाणा में कोई केस नहीं आया, मगर 2016 में फिर कुछ केस सामने आए। उस वर्ष पांच पॉजीटिव रिपोर्ट वाले घोड़ों को मारा गया था। कुछ महीने पहले हिसार में भी कुछ घोड़ों में यह बीमारी नजर आई थी, जिसके बाद हिसार में करीब तीन-चार घोड़ों को मारा गया। इसी दौरान हरियाणा में रेड अलर्ट जारी किया गया था। सभी जिलों से घोड़ों के सैंपल रिपोर्ट मांगी गई थी। भिवानी से 70, कुरुक्षेत्र से 70, मेवात से 36 सैंपल जांच के लिए पिछले महीने सोनीपत की राज्यस्तरीय लैब में भेजे गए। यहां जांच के दौरान 26 सैंपल ग्लैंडर बीमारी से आशंकित माना है।
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सूत्र बताते हैं कि इन सैंपल की रिपोर्ट में काफी कुछ पॉजीटिव आया है। जिस कारण इन्हें आशंकित मानकर दोबारा से सैंपल जांच के लिए मंगवाए गए हैं। यदि सैंपल की रिपोर्ट पॉजीटिव आती है तो सैंपल को जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजा जाएगा। वहां से रिपोर्ट पॉजीटिव आने पर घोड़ों को मारने की अनुशंसा की जाएगी। फारसी एक्ट के अनुसार घोड़ों को मारने का प्रावधान है। इसके अलावा पशु मालिकों को सरकार की ओर से मुआवजा दिया जाता है।
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घोड़ों से मनुष्य और स्तनधारिया में फैलती है बीमारी
ग्लैंडर बीमारी बल्कोलडेरिया बैक्टिरिया से फैलता है। यह बीमारी भारत सरकार की ओर से नोटिफाइवल कैटेगरी में आती है। घोड़ों के अलावा स्तनधारी पशुओं और मनुष्य में भी हो सकती है। यह संक्रमण के तौर पर फैलती है। ऐसे में पशुपालकों को ऐसे आशंकित पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखना चाहिए और उनके संपर्क में आने से बचना चाहिए। क्योंकि पीड़ित पशु के संपर्क में आने से मनुष्य में भी यह बीमारी फैलने की काफी संभावना रहती है।
ये हैं ग्लैंडर बीमारी के लक्षण
- बीमारी से पीड़ित पशु के नाक से पीले रंग का पानी आता है
- चमड़ी में गांठे पड़ने लगती हैं
- पशु के नाक में जख्म हो जाते हैं
- पशु सुस्त रहने लगता है और चारा नहीं खाता
वर्जन :::
घोड़ों में पाई जाने वाली ग्लैंडर बीमारी के प्रति हरियाणा में रेड अलर्ट है। जांच के लिए करीब 70 सैंपल भेजे हुए है। आशंकित आए केसों में दोबारा से सैंपल लेकर जांच के लिए दोबारा भेजा जाएगा। पॉजीटिव केस आने पर फारसी एक्ट के तहत पशु को मारने का ही प्रावधान है। जो भी आशंकित मामले सामने आए हैं उन पशुपालकों को हिदायत दी गई है कि वे उन पशुओं को ना बेेंचे और उन्हें किसी अन्य स्थान पर भी ना लेकर जाएं।
-डॉ. जय सिंह, उप निदेशक पशु पालन विभाग