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एक साल पहले लापता बच्चे के चेहरे पर आई परिजनों को देखने के बाद मुस्कान
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। ऑपरेशन मुस्कान के तहत स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम ने लावारिस हालत में बरामद किए बच्चे को आखिरकार एक साल बाद उसके परिजनों से मिलाकर उसके चेहरे पर मुस्कान ला दी है।
पिछले एक साल से भिवानी बाल सेवा आश्रम में रह रहा 16 वर्षीय किशोर बबलू अप्रैल 2018 में लावारिस हालत में भिवानी में बरामद हुआ था। इस लड़के की मानसिक हालत कमजोर है, जिससे अपना पता सही नहीं बताया और पिछले एक साल तक स्टेट क्राइम ब्रांच और सीडब्ल्ल्यूसी भी इस बच्चे को उसके परिजनों से मिलाने के लिए काफी प्रयास करती रही, मगर सफलता नहीं मिली।
बबलू ने अपने पिता का नाम विजय चौधरी बताया था और बरामद होने के बाद अपना पता गांव शाह भतौरी जिला समस्तीपुर बिहार बताया था। इस पते पर बच्चे की तलाश करते हुए टीम पहुंची और समस्तीपुर की सीडब्ल्यूसी चेयरपर्सन गायत्री से संपर्क साधा। इस बच्चे की पड़ताल की तो उसके पिता का नाम तो मैच हुआ मगर उनके बच्चे लापता नहीं मिले, ऐसे में पुलिस काफी दिनों तक इस मामले को सुलझाने में लगी रही। स्टेट क्राइम ब्रांच का मुख्य सिपाही धर्मेंद्र सिंह बबलू को लेकर गत 25 फरवरी को लेकर शाहपुर भतौरी पहुंचा, जहां बच्चे की फिजिकल वेरिफिकेशन कराई गई। इसमें भी पुलिस को कामयाबी नहीं मिली। बाद में पुलिस को पता लगा कि बबलू मूल रूप से गांव बखरी जिला वैशाली बिहार का रहने वाला है। वहां बबलू के परिजन वहां मिले। बबलू एक साल बाद अपनी मां को देखकर मुस्कुरा उठा और झट से गले लग गया। जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. रितु गिल ने समस्तीपुर की सीडब्ल्यूसी की गायत्री से बात की और फिर बच्चे को उसके परिजनों के हवाले कर दिया। जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ रितु गिल ने बताया कि बच्चा स्टेट क्राइम ब्रांच टीम की मदद से ढूंढा गया था। इस बच्चे को बाल सेवा आश्रम में रखा गया था।
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भिवानी। ऑपरेशन मुस्कान के तहत स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम ने लावारिस हालत में बरामद किए बच्चे को आखिरकार एक साल बाद उसके परिजनों से मिलाकर उसके चेहरे पर मुस्कान ला दी है।
पिछले एक साल से भिवानी बाल सेवा आश्रम में रह रहा 16 वर्षीय किशोर बबलू अप्रैल 2018 में लावारिस हालत में भिवानी में बरामद हुआ था। इस लड़के की मानसिक हालत कमजोर है, जिससे अपना पता सही नहीं बताया और पिछले एक साल तक स्टेट क्राइम ब्रांच और सीडब्ल्ल्यूसी भी इस बच्चे को उसके परिजनों से मिलाने के लिए काफी प्रयास करती रही, मगर सफलता नहीं मिली।
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बबलू ने अपने पिता का नाम विजय चौधरी बताया था और बरामद होने के बाद अपना पता गांव शाह भतौरी जिला समस्तीपुर बिहार बताया था। इस पते पर बच्चे की तलाश करते हुए टीम पहुंची और समस्तीपुर की सीडब्ल्यूसी चेयरपर्सन गायत्री से संपर्क साधा। इस बच्चे की पड़ताल की तो उसके पिता का नाम तो मैच हुआ मगर उनके बच्चे लापता नहीं मिले, ऐसे में पुलिस काफी दिनों तक इस मामले को सुलझाने में लगी रही। स्टेट क्राइम ब्रांच का मुख्य सिपाही धर्मेंद्र सिंह बबलू को लेकर गत 25 फरवरी को लेकर शाहपुर भतौरी पहुंचा, जहां बच्चे की फिजिकल वेरिफिकेशन कराई गई। इसमें भी पुलिस को कामयाबी नहीं मिली। बाद में पुलिस को पता लगा कि बबलू मूल रूप से गांव बखरी जिला वैशाली बिहार का रहने वाला है। वहां बबलू के परिजन वहां मिले। बबलू एक साल बाद अपनी मां को देखकर मुस्कुरा उठा और झट से गले लग गया। जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. रितु गिल ने समस्तीपुर की सीडब्ल्यूसी की गायत्री से बात की और फिर बच्चे को उसके परिजनों के हवाले कर दिया। जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ रितु गिल ने बताया कि बच्चा स्टेट क्राइम ब्रांच टीम की मदद से ढूंढा गया था। इस बच्चे को बाल सेवा आश्रम में रखा गया था।
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