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डाक्टर को नहीं भा रही सरकारी नौकरी, चाहिए मोटा पैकेज
Updated Fri, 08 Dec 2017 12:35 AM IST
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डॉक्टरों को नहीं भा रही सरकारी नौकरी, 52 में से 24 ने किया ज्वाइन
भिवानी। सरकार ने नई भर्ती में 52 चिकित्सकों को जिला भिवानी सेंटर अलॉट किया था। ज्वाइनिंग का महीनेभर का समय दिया था। लेकिन ज्वाइन करने की अंतिम तारीख चार दिसंबर तक केवल 24 ने ही ज्वाइन किया। इतनी बड़ी संख्या में चिकित्सकों के ज्वाइन न करने पीछे बड़ा कारण प्राइवेट सेक्टर में मोटा पैकेज बताया जा रहा है। ट्रांसफर मामले में ज्वाइन न करना तो आम है, लेकिन सरकारी नौकरी लगने के बाद अपनी पहली ज्वाइनिंग के लिए इतनी बड़ी संख्या में न पहुंचना खास बात है। सरकार अपने डाक्टरों को 60 हजार से लेकर 70 हजार रुपये सैलरी देती है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में दो से लेकर तीन लाख रुपये वेतन मिल जाता है। स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी ने बताया कि अभी एक चिकित्सक ने इसलिए सरकारी नौकरी ज्वाइन नहीं की कि उसे राजस्थान में एक प्राइवेट अस्पताल ने तीन लाख रुपये मासिक वेतन पर नियुक्त कर लिया है।
आईएमए के राज्य सह सचिव व प्राइवेट नर्सिंग होम संचालक डा. करण पूनिया का मानना है कि सैलरी तो एक कारण है ही। लेकिन, और भी कई कारण प्रमुख हैं। पहला, काम की अधिकता। डाक्टर से डाक्टरी कम और काम ज्यादा लिये जाते हैं। पोस्टमार्टम, कोर्ट-कचहरी के चक्कर, नेशनल प्रोग्राम आदि कामों में डाक्टर व्यस्त रहते हैं। जबकि, प्राइवेट अस्पतालों में दोगुनी सैलरी मिलती है और डाक्टर को केवल डाक्टरी ही करनी होती है। इसलिए, डाक्टर सरकारी नौकरी में कम जाना चाहते हैं।
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फिक्स सैलरी में 10 डाक्टरों की नियुक्ति को मिली मंजूरी
स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए एनआरएचएम की ओर से फिक्स सैलरी पर दस डाक्टर रखने की मंजूरी विभाग को मिल गई है। सीएमओ डा. रणदीप पूनिया ने बताया कि सर्जन, फिजीशियन, गायनोकालॉजिस्ट, एनसथिसिया, पीडियाट्रिक के दो-दो स्पेशलिस्ट डाक्टरों की नियुक्ति को हरी झंडी मिल गई है। इन डाक्टरों की एक साल के लिए फिक्स सैलरी पर नियुक्ति की जाएगी। सैलरी 85 हजार रुपये से लेकर सवा लाख रुपये तय की गई है। इन दस डाक्टरों की नियुक्ति से जिले की लोगों को और बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलेगी।
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भिवानी। सरकार ने नई भर्ती में 52 चिकित्सकों को जिला भिवानी सेंटर अलॉट किया था। ज्वाइनिंग का महीनेभर का समय दिया था। लेकिन ज्वाइन करने की अंतिम तारीख चार दिसंबर तक केवल 24 ने ही ज्वाइन किया। इतनी बड़ी संख्या में चिकित्सकों के ज्वाइन न करने पीछे बड़ा कारण प्राइवेट सेक्टर में मोटा पैकेज बताया जा रहा है। ट्रांसफर मामले में ज्वाइन न करना तो आम है, लेकिन सरकारी नौकरी लगने के बाद अपनी पहली ज्वाइनिंग के लिए इतनी बड़ी संख्या में न पहुंचना खास बात है। सरकार अपने डाक्टरों को 60 हजार से लेकर 70 हजार रुपये सैलरी देती है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों में दो से लेकर तीन लाख रुपये वेतन मिल जाता है। स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी ने बताया कि अभी एक चिकित्सक ने इसलिए सरकारी नौकरी ज्वाइन नहीं की कि उसे राजस्थान में एक प्राइवेट अस्पताल ने तीन लाख रुपये मासिक वेतन पर नियुक्त कर लिया है।
आईएमए के राज्य सह सचिव व प्राइवेट नर्सिंग होम संचालक डा. करण पूनिया का मानना है कि सैलरी तो एक कारण है ही। लेकिन, और भी कई कारण प्रमुख हैं। पहला, काम की अधिकता। डाक्टर से डाक्टरी कम और काम ज्यादा लिये जाते हैं। पोस्टमार्टम, कोर्ट-कचहरी के चक्कर, नेशनल प्रोग्राम आदि कामों में डाक्टर व्यस्त रहते हैं। जबकि, प्राइवेट अस्पतालों में दोगुनी सैलरी मिलती है और डाक्टर को केवल डाक्टरी ही करनी होती है। इसलिए, डाक्टर सरकारी नौकरी में कम जाना चाहते हैं।
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फिक्स सैलरी में 10 डाक्टरों की नियुक्ति को मिली मंजूरी
स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए एनआरएचएम की ओर से फिक्स सैलरी पर दस डाक्टर रखने की मंजूरी विभाग को मिल गई है। सीएमओ डा. रणदीप पूनिया ने बताया कि सर्जन, फिजीशियन, गायनोकालॉजिस्ट, एनसथिसिया, पीडियाट्रिक के दो-दो स्पेशलिस्ट डाक्टरों की नियुक्ति को हरी झंडी मिल गई है। इन डाक्टरों की एक साल के लिए फिक्स सैलरी पर नियुक्ति की जाएगी। सैलरी 85 हजार रुपये से लेकर सवा लाख रुपये तय की गई है। इन दस डाक्टरों की नियुक्ति से जिले की लोगों को और बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलेगी।
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