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महाराज! ऐसा न करो कि जग धिक्कारे, लंकापति की करतूतों को’
Updated Fri, 29 Sep 2017 12:41 AM IST
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महाराज! ऐसा न करो कि जग धिक्कारे, लंकापति की करतूतों को’
बहल। ‘महाराज, कुछ सोचो समझो, सब जगह क्षमा है दूतों को, ऐसा न करों कि जग धिक्कारें, लंकापति की करतूतों को’। मेघनाद की इन नीतिगत बातों ने लंकापति रावण के रामदूत हनुमान को मृत्युदंड दिए जाने के फैसले को बदलने पर मजबूर कर दिया। राजकुमार अक्षय कुमार के वध तथा अशोक वाटिका को उजाड़ने पर क्रोधित लंकापति रावण ने जब रामदूत हनुमान को मृृत्युदंड देने के आदेश दिए थे। और, सभा में बजी जोरदार तालियां भी विभीषण की बात का पक्ष लेती नजर आई।
कृष्ण वाटिका में चल रही रामलीला के आठवें दिन की शुरुआत में सुग्रीव के आदेश पर हनुमान, अंगद, जामवंत , नल, नील दक्षिण दिशा में सीता की खोज के लिए जाते हैं तो उनकी मुलाकात जटायु के भाई संपाति नामक गिद्ध से होती है और वो अपनी गिद्ध दृष्टि से देखकर उनको सीता का पता देता है। लेकिन, अब सौ योजन के समुद्र को लांघने में जब असमर्थता जाहिर करते हैं तो सभी हनुमान को सभी उसका असीम बल याद कराते हैं। हनुमान बलशाली बनकर समुद्र को लांघ लंका पहुंचते हैं और सबसे पहले उनकी मुलाकात विभीषण से होती है। विभिषण हनुमान को अशोक वाटिका के बारे में बताते हैं जहां व्याकुल सीता भगवान श्रीराम के इंतजार में बैठी है।
हनुमान सीता को राम की दी हुई अंगूठी देकर अपनी राम के दूत के रूप में पहचान बताते हैं। सीता से मिलने के बाद अपनी ताकत दिखाने के लिए राम अशोक वाटिका को उजाड़ते हैं तथा बाद में रावण द्वारा भेजे गए अक्षय कुमार का वध करते हैं। बाद में ब्रह्मास्त्र चलाकर मेघनाद हनुमान को रावण के दरबार में लेकर जाते हैं तो विभीषण के कहने पर रावण हनुमान को मृत्युदंड की जगह उसकी पूंछ में आग लगाने का आदेश देते हैं। पर, जब हनुमान जलती पूंछ से पूरी लंका को ही जला डालते हैं तो दर्शकों में खूब तालियां बजती हैं। बाद में माता सीता से चूड़ामणी लेकर हनुमान वापस श्रीराम के पास लौट जाते हैं। कथावाचक दीपचंद चौधरी ने जहां कथा के हर एक श्लोक का सार समझाया वहीं डॉ. दयानंद जावला, महावीर शर्मा, अशोक साबू, घनश्याम भाया, आदित्य शर्मा, विकास चोटिया, पप्पू सहित अन्य कलाकारों ने अपना किरदार निभाया। अशोक साबू, सुशील शर्मा डिशवाला, रवि जावला, जगदीश मेचू, विनोद चैहडिय़ा, संजय केडिया सहित अन्य लोगों ने संचालन में सहयोग दिया।
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बहल। ‘महाराज, कुछ सोचो समझो, सब जगह क्षमा है दूतों को, ऐसा न करों कि जग धिक्कारें, लंकापति की करतूतों को’। मेघनाद की इन नीतिगत बातों ने लंकापति रावण के रामदूत हनुमान को मृत्युदंड दिए जाने के फैसले को बदलने पर मजबूर कर दिया। राजकुमार अक्षय कुमार के वध तथा अशोक वाटिका को उजाड़ने पर क्रोधित लंकापति रावण ने जब रामदूत हनुमान को मृृत्युदंड देने के आदेश दिए थे। और, सभा में बजी जोरदार तालियां भी विभीषण की बात का पक्ष लेती नजर आई।
कृष्ण वाटिका में चल रही रामलीला के आठवें दिन की शुरुआत में सुग्रीव के आदेश पर हनुमान, अंगद, जामवंत , नल, नील दक्षिण दिशा में सीता की खोज के लिए जाते हैं तो उनकी मुलाकात जटायु के भाई संपाति नामक गिद्ध से होती है और वो अपनी गिद्ध दृष्टि से देखकर उनको सीता का पता देता है। लेकिन, अब सौ योजन के समुद्र को लांघने में जब असमर्थता जाहिर करते हैं तो सभी हनुमान को सभी उसका असीम बल याद कराते हैं। हनुमान बलशाली बनकर समुद्र को लांघ लंका पहुंचते हैं और सबसे पहले उनकी मुलाकात विभीषण से होती है। विभिषण हनुमान को अशोक वाटिका के बारे में बताते हैं जहां व्याकुल सीता भगवान श्रीराम के इंतजार में बैठी है।
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हनुमान सीता को राम की दी हुई अंगूठी देकर अपनी राम के दूत के रूप में पहचान बताते हैं। सीता से मिलने के बाद अपनी ताकत दिखाने के लिए राम अशोक वाटिका को उजाड़ते हैं तथा बाद में रावण द्वारा भेजे गए अक्षय कुमार का वध करते हैं। बाद में ब्रह्मास्त्र चलाकर मेघनाद हनुमान को रावण के दरबार में लेकर जाते हैं तो विभीषण के कहने पर रावण हनुमान को मृत्युदंड की जगह उसकी पूंछ में आग लगाने का आदेश देते हैं। पर, जब हनुमान जलती पूंछ से पूरी लंका को ही जला डालते हैं तो दर्शकों में खूब तालियां बजती हैं। बाद में माता सीता से चूड़ामणी लेकर हनुमान वापस श्रीराम के पास लौट जाते हैं। कथावाचक दीपचंद चौधरी ने जहां कथा के हर एक श्लोक का सार समझाया वहीं डॉ. दयानंद जावला, महावीर शर्मा, अशोक साबू, घनश्याम भाया, आदित्य शर्मा, विकास चोटिया, पप्पू सहित अन्य कलाकारों ने अपना किरदार निभाया। अशोक साबू, सुशील शर्मा डिशवाला, रवि जावला, जगदीश मेचू, विनोद चैहडिय़ा, संजय केडिया सहित अन्य लोगों ने संचालन में सहयोग दिया।
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