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समझोते की नोटिफिकेशन जारी करने के लिए दूसरे दिन भी सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
Updated Sat, 09 Jun 2018 01:24 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। हरियाणा प्रदेश की आशाओं का 17 जनवरी से एक फरवरी तक राज्यव्यापी आंदोलन का आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन वापस लेने के बाद मांगों का नोटिफिकेशन न मिलने से आशा वर्कर का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा।
शुक्रवार को लघु सचिवालय के समक्ष धरने को संबोधित करते हुए जिला प्रधान कमलेश ने कहा कि बिना शर्त के नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं हुआ। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा सरकार से मांग करता है कि आशाओं के साथ हुए समझौते को लागू नहीं तो आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। 12 जून को सर्व कर्मचारी संघ समझौतों को लागू करवाने के लिए जिला मुख्यालयों पर सत्यागृह आंदोलन करेंगे। आशाओं के काम के बदौलत ही हरियाणा में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। पूर्ण टीकाकरण का ड्रॉप आउट कम हुआ है और संस्थापक डिलीवरी में बढ़ोतरी हुई है। आशा स्वास्थ्य विभाग के 40 से अधिक काम करती हैं। जब आशा अपने गुस्से का इजहार कर रही हैं और एक फरवरी को हुए समझौते का नोटिफकेशन जारी करने की मांग कर रही हैं तो सरकार एवं अधिकारी डराने, धमकाने, काम से हटा देने की धमकियां दे रहे हैं। सरकार द्वारा स्वयं समझौता करके उसका नोटिफिकेशन जारी नहीं करना अनैतिक है। इस अवसर पर जिला प्रधान कमलेश, दर्शना, राजवंती, अंगुरी, अंतू, दयावंती, सुनीता, सुशीला, सुमन, किरण, पुष्पा, बिमला, भतेरी, नीलम, रीना, संतोष, शकुं तला, गीता, सुमन व अन्य आशा वर्कर्स शामिल रही।
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भिवानी। हरियाणा प्रदेश की आशाओं का 17 जनवरी से एक फरवरी तक राज्यव्यापी आंदोलन का आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन वापस लेने के बाद मांगों का नोटिफिकेशन न मिलने से आशा वर्कर का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा।
शुक्रवार को लघु सचिवालय के समक्ष धरने को संबोधित करते हुए जिला प्रधान कमलेश ने कहा कि बिना शर्त के नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं हुआ। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा सरकार से मांग करता है कि आशाओं के साथ हुए समझौते को लागू नहीं तो आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। 12 जून को सर्व कर्मचारी संघ समझौतों को लागू करवाने के लिए जिला मुख्यालयों पर सत्यागृह आंदोलन करेंगे। आशाओं के काम के बदौलत ही हरियाणा में मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी आई है। पूर्ण टीकाकरण का ड्रॉप आउट कम हुआ है और संस्थापक डिलीवरी में बढ़ोतरी हुई है। आशा स्वास्थ्य विभाग के 40 से अधिक काम करती हैं। जब आशा अपने गुस्से का इजहार कर रही हैं और एक फरवरी को हुए समझौते का नोटिफकेशन जारी करने की मांग कर रही हैं तो सरकार एवं अधिकारी डराने, धमकाने, काम से हटा देने की धमकियां दे रहे हैं। सरकार द्वारा स्वयं समझौता करके उसका नोटिफिकेशन जारी नहीं करना अनैतिक है। इस अवसर पर जिला प्रधान कमलेश, दर्शना, राजवंती, अंगुरी, अंतू, दयावंती, सुनीता, सुशीला, सुमन, किरण, पुष्पा, बिमला, भतेरी, नीलम, रीना, संतोष, शकुं तला, गीता, सुमन व अन्य आशा वर्कर्स शामिल रही।
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