{"_id":"622662a114b83f42d66f9fb0","slug":"10-days-spent-in-ukraine-will-be-remembered-forever-sneha-bhiwani-news-hsr6260924116","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूक्रेन में बिताए 10 दिन ताउम्र रहेंगे याद : स्नेहा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूक्रेन में बिताए 10 दिन ताउम्र रहेंगे याद : स्नेहा
विज्ञापन
युक्रेन से भिवानी लौटे मनीष रंगा अपने परिवार के साथ। विज्ञप्ति
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। यूक्रेन में बिगड़े हालातों के बीच खुद का बचाव करते हुए स्नेहा और मुस्कान सोमवार दोपहर में अपने घर पहुंच गईं। उनका भाई केशव भी मंगलवार सुबह की फ्लाइट में नई दिल्ली के लिए उड़ान भरेगा। स्नेहा ने बताया कि यूक्रेन में बीते ये 10 दिन ताउम्र याद रहेंगे।
छोटूराम कॉलोनी निवासी राजेंद्र ने बताया कि उनका बेटा केशव फिलहाल पोलैंड बॉर्डर के नजदीक स्थित एक होटल में ठहरा हुआ है। यूक्रेन से निकलने के बाद हालात सामान्य हैं और केशव भी भय मुक्त हो गया है। उन्हीं के परिवार से स्नेहा और मुस्कान सोमवार शाम चार बजे भिवानी स्थित अपने घर पर पहुंच गईं। घर पहुंचने के बाद स्नेहा ने बताया कि वह और मुस्कान यूक्रेन के शहर खारकीव में मेडिकल स्टूडेंट की पढ़ाई कर रही हैं। यूक्रेन में बिगड़े हालातों की वजह से उन्हें एक सप्ताह तक बंकर में ही रहना पड़ा। वे दो मार्च को नौ किलोमीटर पैदल चलकर खारकीव रेलवे स्टेशन पहुंचीं, जहां उनसे कुछ दूरी पर बम धमाका हुआ, जिसकी वजह से वे डर गए। रेलवे स्टेशन पर अचानक हालात बिगड़ गए और यूक्रेन के स्थानीय नागरिकों ने उन्हें ट्रेन में नहीं बैठने दिया। दूतावास का संदेश का आया कि शाम छह बजे तक कर्फ्यू लग जाएगा तो सभी खारकीव से बाहर निकल आएं। ऐसे में उन्हें वहां कोई वाहन नहीं मिला तो वे पैदल ही 12 किलोमीटर की दूरी तय कर पैसों चीनू शहर में पहुंचे, जहां वे एक शेल्टर होम में ठहरे। उसके बाद मैनेजमेंट टीम ने दो बस की व्यवस्था की, जिसमें प्रथम वर्ष के स्टूडेंट को ट्रनोपील के लिए रवाना कर दिया। इसके बाद वे भी 500 डॉलर देकर रोमानिया बॉर्डर पहुंचे, जहां से उन्होंने नई दिल्ली के लिए उड़ान भरी और वे सोमवार दोपहर 12 बजे नई दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे, जिसके बाद वे भिवानी आए। स्नेहा ने बताया कि यूनिवर्सिटी की ओर से 13 मार्च तक छुट्टी की सूचना जारी की हुई है। साथ ही यूनिवर्सिटी का कहना है कि हालात सामान्य होते ही फिर से पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। स्नेहा ने कहा कि अगर हालात सामान्य होते हैं तो वे भी अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए वापस यूक्रेन जाएंगी। साथ ही सरकार से भी उनकी पढ़ाई के लिए उचित व्यवस्था करने की गुजारिश की।
गांव में पहुंचने पर मनीष का फूलमालाओं से स्वागत
गांव लालावास निवासी मेडिकल स्टूडेंट मनीष रंगा यूक्रेन से अपने घर लौट आए हैं। रविवार को वे अपनी बुआ के घर आए, जबकि सोमवार को अपने गांव लालावास आए है। उनके गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने फूलमालाओं के साथ स्वागत किया। वहीं उनके परिजनों ने भगवान का शुक्रिया अदा किया। मनीष ने बताया कि पिछले 11 दिन से यूक्रेन में हालात चिंताजनक है। ऐसे में वे अपने साथियों के साथ हंगरी के सेफ हाउस में पहुंचे, जहां से उन्होंने नई दिल्ली के लिए उड़ान भरी। मनीष रंगा जो पिछले एक साल से युक्रेन में एमबीबीबएस की पढ़ाई कर रहा है। उनके पिता वेदपाल रंगा सीआरपीएफ डिप्टी कमांडेंट की पोस्ट पर अरुणाचल प्रदेश में तैनात हैं। मनीष के गांव पहुंचने पर सरपंच धर्मपाल शर्मा, रमेश लालावास, मास्टर दुर्जन सिंह, रामोतार, शीशराम, उदमीराम, भगत केसरमल, दिनेश कुमार, सब इंस्पेक्टर सुरेश, जोगीराम, विनोद कुमार, सुनील रंगा, निशांत, हरिश, विनय कुमार, सुमित, अन्य परिजनों ने व ग्राम वासियों ने खुशी जाहिर की।
विज्ञापन
विज्ञापन
छोटूराम कॉलोनी निवासी राजेंद्र ने बताया कि उनका बेटा केशव फिलहाल पोलैंड बॉर्डर के नजदीक स्थित एक होटल में ठहरा हुआ है। यूक्रेन से निकलने के बाद हालात सामान्य हैं और केशव भी भय मुक्त हो गया है। उन्हीं के परिवार से स्नेहा और मुस्कान सोमवार शाम चार बजे भिवानी स्थित अपने घर पर पहुंच गईं। घर पहुंचने के बाद स्नेहा ने बताया कि वह और मुस्कान यूक्रेन के शहर खारकीव में मेडिकल स्टूडेंट की पढ़ाई कर रही हैं। यूक्रेन में बिगड़े हालातों की वजह से उन्हें एक सप्ताह तक बंकर में ही रहना पड़ा। वे दो मार्च को नौ किलोमीटर पैदल चलकर खारकीव रेलवे स्टेशन पहुंचीं, जहां उनसे कुछ दूरी पर बम धमाका हुआ, जिसकी वजह से वे डर गए। रेलवे स्टेशन पर अचानक हालात बिगड़ गए और यूक्रेन के स्थानीय नागरिकों ने उन्हें ट्रेन में नहीं बैठने दिया। दूतावास का संदेश का आया कि शाम छह बजे तक कर्फ्यू लग जाएगा तो सभी खारकीव से बाहर निकल आएं। ऐसे में उन्हें वहां कोई वाहन नहीं मिला तो वे पैदल ही 12 किलोमीटर की दूरी तय कर पैसों चीनू शहर में पहुंचे, जहां वे एक शेल्टर होम में ठहरे। उसके बाद मैनेजमेंट टीम ने दो बस की व्यवस्था की, जिसमें प्रथम वर्ष के स्टूडेंट को ट्रनोपील के लिए रवाना कर दिया। इसके बाद वे भी 500 डॉलर देकर रोमानिया बॉर्डर पहुंचे, जहां से उन्होंने नई दिल्ली के लिए उड़ान भरी और वे सोमवार दोपहर 12 बजे नई दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे, जिसके बाद वे भिवानी आए। स्नेहा ने बताया कि यूनिवर्सिटी की ओर से 13 मार्च तक छुट्टी की सूचना जारी की हुई है। साथ ही यूनिवर्सिटी का कहना है कि हालात सामान्य होते ही फिर से पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। स्नेहा ने कहा कि अगर हालात सामान्य होते हैं तो वे भी अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए वापस यूक्रेन जाएंगी। साथ ही सरकार से भी उनकी पढ़ाई के लिए उचित व्यवस्था करने की गुजारिश की।
विज्ञापन
गांव में पहुंचने पर मनीष का फूलमालाओं से स्वागत
गांव लालावास निवासी मेडिकल स्टूडेंट मनीष रंगा यूक्रेन से अपने घर लौट आए हैं। रविवार को वे अपनी बुआ के घर आए, जबकि सोमवार को अपने गांव लालावास आए है। उनके गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने फूलमालाओं के साथ स्वागत किया। वहीं उनके परिजनों ने भगवान का शुक्रिया अदा किया। मनीष ने बताया कि पिछले 11 दिन से यूक्रेन में हालात चिंताजनक है। ऐसे में वे अपने साथियों के साथ हंगरी के सेफ हाउस में पहुंचे, जहां से उन्होंने नई दिल्ली के लिए उड़ान भरी। मनीष रंगा जो पिछले एक साल से युक्रेन में एमबीबीबएस की पढ़ाई कर रहा है। उनके पिता वेदपाल रंगा सीआरपीएफ डिप्टी कमांडेंट की पोस्ट पर अरुणाचल प्रदेश में तैनात हैं। मनीष के गांव पहुंचने पर सरपंच धर्मपाल शर्मा, रमेश लालावास, मास्टर दुर्जन सिंह, रामोतार, शीशराम, उदमीराम, भगत केसरमल, दिनेश कुमार, सब इंस्पेक्टर सुरेश, जोगीराम, विनोद कुमार, सुनील रंगा, निशांत, हरिश, विनय कुमार, सुमित, अन्य परिजनों ने व ग्राम वासियों ने खुशी जाहिर की।

अपने परिवार के साथ यूक्रेन से लौटी मेडिकल स्टूडेंट स्नेहा। फोटो : परिजनों के सौजन्य से- फोटो : Bhiwani
विज्ञापन