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बिना बिल्डिंग प्लान के बना दिया स्कूल!
अमर उजाला, अंबाला
Updated Fri, 30 May 2014 01:39 AM IST
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अंबाला कैंट। एसडी विद्या स्कूल ने बिना बिल्डिंग प्लान लिए इमारत खड़ी कर दी। इतना ही नहीं स्कूल की ओर से स्वास्थ्य व सफाई के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र पर भी संशय की स्थिति है।
यह खुलासा कैंट के राजा पार्क में रहने वाले चरणदीप सिंह द्वारा आरटीआई एक्ट के तहत मांगी गई सूचना से हुआ है।
आरटीआई एक्ट के तहत नगर निगम अंबाला के सूचना अधिकारी से जानकारी मांगी गई थी कि क्या डीएचएसडी पब्लिक स्कूल (पूर्व का नाम) अथवा एसडी विद्या (वर्तमान नाम) तथा एसडी टोडलर्स ने ने हेल्थ अथवा सेनिटेशन को लेकर अनापत्ति प्रमाणपत्र हासिल किया है या नहीं। यही नहीं इन स्कूलों ने क्या नगर निगम अंबाला से बिल्डिंग प्लान मंजूर कराया है। इसके अलावा अन्य बिंदुओं पर भी जानकारी मांगी गई थी।
आरटीआई एक्ट के तहत मिलने इन सवालों के जवाब में साफ हो गया है कि स्कूलों के निर्माण को लेकर नगर निगम से बिल्डिंग प्लान ही मंजूर नहीं कराया गया है। यानी स्कूल ने बिना बिल्डिंग प्लान को मंजूर कराये इसे बना डाला। इसी तरह स्वास्थ्य व सफाई के मामले में जवाब मिला है कि इन दोनों मामलों में अनापत्ति प्रमाण पत्र, स्कूल का नाम बदलने के बाद, जारी नहीं किया गया है। यह भी कहा है कि पूर्व में अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया गया है या नहीं इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं है, जबकि यह स्कूल करीब ढाई दशक पुराना है। इससे साफ है कि इन मामलों में पूरी तरह से नियम कानून ताक पर रखे गए हैं।
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यह खुलासा कैंट के राजा पार्क में रहने वाले चरणदीप सिंह द्वारा आरटीआई एक्ट के तहत मांगी गई सूचना से हुआ है।
आरटीआई एक्ट के तहत नगर निगम अंबाला के सूचना अधिकारी से जानकारी मांगी गई थी कि क्या डीएचएसडी पब्लिक स्कूल (पूर्व का नाम) अथवा एसडी विद्या (वर्तमान नाम) तथा एसडी टोडलर्स ने ने हेल्थ अथवा सेनिटेशन को लेकर अनापत्ति प्रमाणपत्र हासिल किया है या नहीं। यही नहीं इन स्कूलों ने क्या नगर निगम अंबाला से बिल्डिंग प्लान मंजूर कराया है। इसके अलावा अन्य बिंदुओं पर भी जानकारी मांगी गई थी।
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आरटीआई एक्ट के तहत मिलने इन सवालों के जवाब में साफ हो गया है कि स्कूलों के निर्माण को लेकर नगर निगम से बिल्डिंग प्लान ही मंजूर नहीं कराया गया है। यानी स्कूल ने बिना बिल्डिंग प्लान को मंजूर कराये इसे बना डाला। इसी तरह स्वास्थ्य व सफाई के मामले में जवाब मिला है कि इन दोनों मामलों में अनापत्ति प्रमाण पत्र, स्कूल का नाम बदलने के बाद, जारी नहीं किया गया है। यह भी कहा है कि पूर्व में अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया गया है या नहीं इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं है, जबकि यह स्कूल करीब ढाई दशक पुराना है। इससे साफ है कि इन मामलों में पूरी तरह से नियम कानून ताक पर रखे गए हैं।
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