फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   Waiting ticket passengers occupy the coach, confirmed tickets are at the door

Ambala News: कोच पर वेटिंग टिकट यात्रियों का कब्जा, कंफर्म दरवाजे पर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jul 2024 06:24 AM IST
विज्ञापन
Waiting ticket passengers occupy the coach, confirmed tickets are at the door
अंबाला। आरक्षित कोच में सफर करने वाले ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा को देखते हुए रेलवे ने बेशक वेटिंग टिकट के लिए फरमान जारी कर दिए हैं, लेकिन इन फरमानों का अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर असर नजर नहीं आ रहा।
विज्ञापन

आज भी कंफर्म टिकट यात्री ट्रेन में चढ़ने की जद्दोजहद कर रहे हैं और जनरल टिकट यात्री आरक्षित कोच में बिना किसी डर और जुर्माने के सीट पर बैठकर आनंद ले रहे हैं। ऐसा नजारा अमृतसर से कटिहार के बीच चलने वाली आम्रपाली एक्सप्रेस में नजर आए।
विज्ञापन

जब कंफर्म टिकट यात्री ट्रेन में सवार होने के लिए चीखते-चिल्लाते रह गए, लेकिन उनकी आवाज सुनने वाले टीटीई और आरपीएफ कर्मी नदारद थे। लगभग 10 मिनट की जद्दोजहद के बाद भी वो परिवार सहित कोच में सवार नहीं हो पाए और ट्रेन चल पड़ी। वो बुझे मन से अपने को और रेलवे को कोसते नजर आए कि तीन माह पहले आरक्षण करवाने के बाद भी वो ट्रेन में सवार नहीं हो पाए। जबकि कुछ ही दिन पहले रेलवे ने फरमान जारी किया था कि जनरल और वेटिंग टिकट पर आरक्षित कोच में चढ़ने वाले यात्रियों पर कार्यवाही की जाएगी, लेकिन ट्रेन के अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म 3 पर पहुंचने के दौरान ऐसा कुछ भी नजर नहीं आया।
विज्ञापन
विज्ञापन

अंबाला से जाना था गोरखपुर
ट्रेन में परिवार सहित चढ़ने के लिए वेद प्रकाश ने कई बार कोशिश की, लेकिन वो दरवाजे तक पहुंचने के बाद भी कोच के अंदर दाखिल नहीं हो पाया। लगभग 10 मिनट तक कशमकश करने के बाद उसका हौसला पस्त हो गया और वो ट्रेन के चलते ही दूर जाकर खड़ा हो गया। उसकी आंखों से आंसू भी निकल गए। वेद प्रकाश ने बताया कि तीन माह पहले उसने अंबाला से गोरखपुर जाने के लिए ट्रेन नंबर 15708 आम्रपाली एक्सप्रेस में टिकट बुक करवाई थी। उसकी सीट कोच नंबर एस-1 में 49, 50,52 व 53 थी। लेकिन वो ट्रेन में सवार नहीं हो पाया क्योंकि उसका कोच पहले ही अनधिकृत यात्रियों से भरा पड़ा था। ऐसे ही अन्य कई परिवार थे जो रेलवे की कार्यप्रणाली को कोसते हुए नजर आए। लेकिन उनकी मदद करने वाले रेल कर्मचारी कहीं नहीं थे। अब उन्हें यह चिंता सता रही थी कि हजारों रुपये टिकट पर खर्च करने के बाद भी वो सफर नहीं कर पाए और अब फिर उन्हें नए सिरे से दूसरी ट्रेन का टिकट लेना पड़ेगा।
कागजों तक सीमित नियम
रेलवे ने एक जुलाई से नए नियम बनाए थे कि जनरल और वेटिंग टिकट वाले यात्री अब आरक्षित कोच में नहीं चढ़ पाएंगे, अगर चढ़ेंगे तो उन पर जुर्माना लगाया जाएगा और कोच से भी नीचे उतारा जाएगा। बावजद इसके यह योजना धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रही।इस योजना की जिम्मेदारी निभाने वाले विभागीय अधिकारी व कर्मचारी भी मौन हैं, हालांकि रेलवे के फरमान का यह असर जरूर देखने को मिला है कि जो टीटीई पहले प्लेटफार्मों, यूटीएस और रेलवे परिसर में यात्रियों की वेटिंग टिकट बनाते हुए नजर आते थे, अब वो गायब हो चुके हैं और उनकी ड्यूटी ट्रेनों में लगा दी गई हैं।

पहले थे चार जनरल और छह स्लीपर कोच
आम्रपाली एक्सप्रेस में पहले चार जनरल और छह स्लीपर कोच होते थे। इनकी संख्या अब घटा दी गई है। अब टेन में दो जनरल और चार स्लीपर को च रहे गए हैं। इनकी जगह ट्रेन में एसी कोच लगा दिए गए हैं। हैरानी की बात है कि एक तरफ रेलवे रोजाना घोषणा कर रही है कि ट्रेनों में जनरल के कोच बढ़ाए जाएंगे, लेकिन दूसरी तरफ राजस्व प्राप्ति के तहत जनरल व स्लीपर कोच हटाकर एसी कोच लगाए जा रहे हैं जबकि इसका किराया आमजन के लिए काफी अधिक है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि रेलवे व्यवस्थाएं सुधारने को लेकर गुणगान कर रही है, जबकि धरातल पर आज भी हालात काफी खराब हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed