सेंट्रल जेल में दो कैदियों एचआईवी पॉजीटिव, अफसर चिंतित
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिछले कुछ समय से जेल में आने वाले नशे की लत से ग्रस्त कैदियों व बंदियों को एचआईवी होने की प्रबल आशंका सामने आ रही थी। अंबाला जेल प्रशासन इस बात को लेकर खासा चिंता में था। इसलिए पिछले तीन महीनों में चार बार जेल में एचआईवी जागरूकता शिविर लगाए गए।
इसके जरिए विशेषज्ञों ने कैदियों व बंदियों को लेक्चर के माध्यम से बताया कि किस तरह से एचआईवी से लोग ग्रस्त होते हैं और किस तरह इसके लक्ष्ण पहचान कर प्रारंभिक चरण में ही इसका इलाज शुरू किया जाता है? मगर कैदियों की इस काउंसलिंग के बाद वीरवार को सेंट्रल जेल में एचआईवी स्क्रीनिंग कैंप का आयोजन किया गया।
ये स्क्रीनिंग अभियान सेंट्रल जेल में करीबन दस साल बाद किया गया। इस दौरान जेल प्रशासन और विशेषज्ञों की टीम उस वक्त हैरान हो गई, जब जेल में दो कैदियों को एचआईवी पॉजीटिव आ गया। स्क्रीनिंग टेस्ट में दो केस पॉजीटिव आने के बाद विशेषज्ञों ने फिर से तसल्ली की, मगर बाद में दोनों एचआईवी केसों के पॉजीटिव होने की पुष्टि कर दी।
स्क्रीनिंग के लिए कैदियों को मुश्किल से किया तैयार ये कैंप सीएमओ डाक्टर विनोद गुप्ता की निगरानी व स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस दौरान विशेषज्ञ डाक्टरों की टीम डाक्टर मनमीत, डाक्टर साहिल कंसल व डाक्टर दीपक समेत जेल अधीक्षक एचआर बिश्नोई, डिप्टी सुपरीटेंडेंट भूपेंद्र सिंह, डिप्टी सुपरीटेंडेंट राय साहब व डिप्टी सुपरीटेंडेंट विशाल छिब्बर का खासा सहयोग रहा। दरअसल, इस स्क्रीनिंग अभियान में अपना एचआईवी टेस्ट करवाने के लिए कई कैदी व बंदी हिचकिचा रहे थे। इस पर जेल के डिप्टी सुपरीटेंडेंट भूपिंद्र कुमार ने सबसे पहले पहल करते अपना एचआईवी टेस्टक करवाकर कैदियों को प्रेरितक करने की कोशिश की कि ये स्क्रीनिंग टेस्ट उनकी भलाई के लिए है। इसमें हिचकिचाहट आगे जाकर घातक साबित हो सकती है। उसके बाद सभी जेल अफसरों व डाक्टरों ने भी कैदियों को स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए प्रेरित किया। उसके बाद कैदियों व बंदियों ने स्क्रीनिंग टेस्ट शुरू करवाया और उस वक्त विशेषज्ञों व जेल अफसरों की आशंका पुख्ता हो गई जब दो कैदियों को एचआईवी पाजीटीव आ गया। उाक्टर मनमीत सिंह ने इसकी पुष्टि कर दी है। उनका कहना है कि टीम व अफसरों को पहले ही शक था कि कैदियों में एचआईवी हो सकता है। उनके अनुसार नशे की लत से ग्रस्त कैदी व बंदी नशा करने के लिए एक ही सूई का इस्तेमाल कर लेते हैं और यही वजह एचआईवी का सबसे बड़ा कारण बन जाती है। उनके अनुसार दोनों बंदियों को स्पेशल केयर में रखा जाएगा और उन्हे फिलहाल स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के हवाले किया जाएगा, ताकि उनके जरूरी टेस्ट होने के बाद उनका इलाज शुरू करवाया जा सके।