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इराक में जिंदगी के लिए लड़ रहे दो दोस्त
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला
Updated Sun, 22 Jun 2014 01:14 AM IST
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अंबाला सिटी। इराक के नजब शहर में नौकरी करने गए अंबाला के गांव रायवाली के दो दोस्त गुरप्रीत और जगमोहन इन दिनों जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
गांव में परिवार के सदस्य बेहाल हैं और दोनों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। इराक में दोनों के हालात बदतर हैं और परिवार के सदस्य कहते हैं कि किसी तरह से एक बार उनके बेटे घर वापस लौट आएं। जगमोहन के परिवार में पिता बहन और बीवी व 6 महीने का बच्चा अनिकेत है और वह दोस्त गुरप्रीत सिंह (24) के साथ आरसीसी का काम करने वहां गया है। गुरप्रीत भी 4 बहनों का अकेला भाई है और उस पर परिवार की जिम्मेदारी है।
वापसी के लिए पैसा खत्म, कंपनी ने नहीं दिया वेतन
इराक में फंसे युवाओं में अंबाला जिला से भी कई युवक वापसी के इंतजार में है, लेकिन पैसे न होने से उनको भारत वापस आने में मुश्किल आ रही है। मात्र 30 हजार रुपये की नौकरी के लिए भारत से इराक में काम करने गए कई भारतीय इराक में मुसीबतों का सामना कर रहे हैं और अब घर लौटने की कोशिशों में लगे हैं।
मां की अर्थी को कंधा भी नहीं दे पाया जगमोहन
इराक में घर वापसी की कोशिशों में जुटे जगमोहन को मलाल है कि वह अपनी मां की अर्थी को कंधा भी नहीं दे पाया। जगमोहन के पिता ने बताया कि जब उनका बेटा इराक गया था, तो उसके कुछ दिनों के बाद ही जगमोहन की मां का देहांत हो गया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, जबकि जगमोहन अपनी मां के अंतिम दर्शन करने तक नहीं पहुंच पाया। अभी छह दिन पहले जगमोहन से बातचीत हुई है, जिसने बताया कि वह नजब शहर में किस तरह से जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। घर वापसी के लिए पैसे भी खत्म हो चुके हैं और बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा है।
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बंकर में छिप कर रहे हैं
गुरप्रीत के पिता बलवीर सिंह ने बताया कि कुछ दिनों पहले गुरप्रीत से संपर्क हुआ था। गुरप्रीत ने फोन पर बताया कि दिन में कंपनी में कमरे के अंदर रखा जाता है और रात को बंकर में छुप कर रहना पड़ता है। उसके परिजनों को उम्मीद है कि शायद भारत सरकार के प्रयास से उनका बेटा वापस आ जाए।
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गांव में परिवार के सदस्य बेहाल हैं और दोनों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। इराक में दोनों के हालात बदतर हैं और परिवार के सदस्य कहते हैं कि किसी तरह से एक बार उनके बेटे घर वापस लौट आएं। जगमोहन के परिवार में पिता बहन और बीवी व 6 महीने का बच्चा अनिकेत है और वह दोस्त गुरप्रीत सिंह (24) के साथ आरसीसी का काम करने वहां गया है। गुरप्रीत भी 4 बहनों का अकेला भाई है और उस पर परिवार की जिम्मेदारी है।
वापसी के लिए पैसा खत्म, कंपनी ने नहीं दिया वेतन
इराक में फंसे युवाओं में अंबाला जिला से भी कई युवक वापसी के इंतजार में है, लेकिन पैसे न होने से उनको भारत वापस आने में मुश्किल आ रही है। मात्र 30 हजार रुपये की नौकरी के लिए भारत से इराक में काम करने गए कई भारतीय इराक में मुसीबतों का सामना कर रहे हैं और अब घर लौटने की कोशिशों में लगे हैं।
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मां की अर्थी को कंधा भी नहीं दे पाया जगमोहन
इराक में घर वापसी की कोशिशों में जुटे जगमोहन को मलाल है कि वह अपनी मां की अर्थी को कंधा भी नहीं दे पाया। जगमोहन के पिता ने बताया कि जब उनका बेटा इराक गया था, तो उसके कुछ दिनों के बाद ही जगमोहन की मां का देहांत हो गया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, जबकि जगमोहन अपनी मां के अंतिम दर्शन करने तक नहीं पहुंच पाया। अभी छह दिन पहले जगमोहन से बातचीत हुई है, जिसने बताया कि वह नजब शहर में किस तरह से जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। घर वापसी के लिए पैसे भी खत्म हो चुके हैं और बाहर निकलना भी मुश्किल हो रहा है।
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बंकर में छिप कर रहे हैं
गुरप्रीत के पिता बलवीर सिंह ने बताया कि कुछ दिनों पहले गुरप्रीत से संपर्क हुआ था। गुरप्रीत ने फोन पर बताया कि दिन में कंपनी में कमरे के अंदर रखा जाता है और रात को बंकर में छुप कर रहना पड़ता है। उसके परिजनों को उम्मीद है कि शायद भारत सरकार के प्रयास से उनका बेटा वापस आ जाए।