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Ambala News: एडिड कॉलेजों के तीन हजार कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन
Fri, 12 Sep 2025 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 12 Sep 2025 01:05 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। प्रदेश के 96 सरकारी अनुदान प्राप्त (एडिड) कॉलेजों में कार्यरत करीब तीन हजार टीचिंग और नॉन-टीचिंग को पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। इन विकट परिस्थिति ने कर्मचारियों को गंभीर वित्तीय संकट में डाल दिया है, जिससे उनके जीवन के विभिन्न पहलू प्रभावित हुए हैं। इस समय कई कर्मचारी अपने घरेलू वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। घरेलू खर्चा, मकान किराया, बैंक लोन की किस्तें, स्कूल फीस और बीमारी के इलाज करवाने में आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, समय पर बैंक किस्तें देने में असमर्थता ने कर्मचारियों को डिफॉल्टर करने के जोखिम में डाल दिया है।
मांगों का समाधान तो दूर, अब वेतन मिलना हुआ बंद
एडेड कॉलेज नॉन टीचिंग यूनियन के प्रधान बिजेंद्र कुमार ने बताया कि टीचिंग और नॉन टीचिंग यूनियन मांगों को लेकर लगातार सरकार के समक्ष अपनी बात रख रही है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समय पर वेतन, एसीपी का लाभ, संशोधित मकान किराया भत्ता, एक जनवरी 2006 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ, सेवा नियम 2006 व लीव रूल्स 2002 में संशोधन, मेडिकल भत्ता, सीसीएल, आकस्मिक अवकाश के निर्देश, नॉन-टीचिंग कर्मचारियों को लियन का लाभ आदि शामिल है, लेकिन अब स्थिति तो ओर भी बिगड़ गई है। मांगों के समाधान तो दूर अब तो कर्मचारियों को वेतन समय पर मिलना भी बंद हो गया है। पिछले तीन माह का वेतन अभी तक जारी नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि वेतन बजट के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग हर तीन महीने के बाद एफडी से अनुमति लेता है। इस बार बजट अनुमति के लिए एफडी में फाइल भेजी गई थी, लेकिन वह आपत्ति के बाद वापस विभाग के पास पहुंच गई। अभी फाइल विभाग के पास ही है। जिससे कर्मचारियों की दिक्कत बढ़ गई है।
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अंबाला सिटी। प्रदेश के 96 सरकारी अनुदान प्राप्त (एडिड) कॉलेजों में कार्यरत करीब तीन हजार टीचिंग और नॉन-टीचिंग को पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। इन विकट परिस्थिति ने कर्मचारियों को गंभीर वित्तीय संकट में डाल दिया है, जिससे उनके जीवन के विभिन्न पहलू प्रभावित हुए हैं। इस समय कई कर्मचारी अपने घरेलू वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। घरेलू खर्चा, मकान किराया, बैंक लोन की किस्तें, स्कूल फीस और बीमारी के इलाज करवाने में आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त, समय पर बैंक किस्तें देने में असमर्थता ने कर्मचारियों को डिफॉल्टर करने के जोखिम में डाल दिया है।
मांगों का समाधान तो दूर, अब वेतन मिलना हुआ बंद
एडेड कॉलेज नॉन टीचिंग यूनियन के प्रधान बिजेंद्र कुमार ने बताया कि टीचिंग और नॉन टीचिंग यूनियन मांगों को लेकर लगातार सरकार के समक्ष अपनी बात रख रही है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समय पर वेतन, एसीपी का लाभ, संशोधित मकान किराया भत्ता, एक जनवरी 2006 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ, सेवा नियम 2006 व लीव रूल्स 2002 में संशोधन, मेडिकल भत्ता, सीसीएल, आकस्मिक अवकाश के निर्देश, नॉन-टीचिंग कर्मचारियों को लियन का लाभ आदि शामिल है, लेकिन अब स्थिति तो ओर भी बिगड़ गई है। मांगों के समाधान तो दूर अब तो कर्मचारियों को वेतन समय पर मिलना भी बंद हो गया है। पिछले तीन माह का वेतन अभी तक जारी नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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उन्होंने बताया कि वेतन बजट के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग हर तीन महीने के बाद एफडी से अनुमति लेता है। इस बार बजट अनुमति के लिए एफडी में फाइल भेजी गई थी, लेकिन वह आपत्ति के बाद वापस विभाग के पास पहुंच गई। अभी फाइल विभाग के पास ही है। जिससे कर्मचारियों की दिक्कत बढ़ गई है।
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