{"_id":"658c7533417c8f92c3068af7","slug":"three-farmer-organizations-staged-a-protest-said-no-assurance-on-dues-ambala-news-c-36-1-amb1002-15963-2023-12-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambala News: तीन किसान संगठनों ने दिया धरना, बोले- बकाया पर नहीं मिला आश्वासन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambala News: तीन किसान संगठनों ने दिया धरना, बोले- बकाया पर नहीं मिला आश्वासन
विज्ञापन
नारायणगढ़। नारायणगढ़ स्थित बनौंदी शुगर मिल को संबद्ध करने के मामले को लेकर नई ही राजनीति शुरू हो गई है। बुधवार को उपमंडल अधिकारी नारायणगढ़ कार्यालय के सामने तीन किसान संगठनों ने उन्हीं मांगों को लेकर धरना दिया, जिन पर एक दिन पहले किसान नेताओं के साथ मिल प्रशासन बात कर चुका था।
किसानों का आरोप था कि उन्हें बकाया भुगतान को लेकर मिल प्रशासन ने कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। इधर मिल प्रबंधन का कहना है कि वह किसानों की पूरी बात सरकार तक अनौपचारिक रूप से पहुंचा चुके हैं। उपमंडल कार्यालय पर भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह, गन्ना किसान कमेटी और संयुक्त किसान मजदूर इंकलाब यूनियन संगठन के नेता शामिल रहे। इस दौरान जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। वहीं वीरवार को भी धरना देने का निर्णय लिया गया है।
दरअसल, किसानाें को पांच जनवरी तक भुगतान करने के लिए जब वचनबद्ध होने की बात आई तो मिल प्रशासन सहमति नहीं जता पाया। ऐसे में इन धरना देने वाले किसान संगठनों को लगा कि जिस प्रकार से प्रशासन पहले मुकर चुका है इस बार भी न मुकर जाए। दूसरी ओर भारतीय किसान यूनियन चढूनी से जुड़े किसान नेताओं का कहना है कि बैठक में मिल प्रशासन की बात से सभी राजी थे। धरना पांच जनवरी को भुगतान न होने के बाद देना उचित रहता।
विज्ञापन
भाकियू शहीद भगत सिंह के उपाध्यक्ष विक्रम राणा ने बताया कि मिल कुर्क होती है तो किसान गन्ना कहां बेचेगा। किसानों का जो बकाया है, उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। उपमंडल अधिकारी मिल को सरकारी नियंत्रण में लेकर चला रही हैं लेकिन किसानों के पैसे की जिम्मेदारी नहीं लेतीं।
किसान मजदूर इंकलाब यूनियन के अध्यक्ष धर्मवीर ढींडसा ने कहा कि धरना प्रदर्शन करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। सरकार जिम्मेदारी लेते हुए सरकारी खजाने से किसानों का पैसा दे। यदि शीघ्र ऐसा नहीं किया गया तो किसान अनिश्चित काल के लिए धरना प्रदर्शन करने पर विवश होंगे।
गन्ना किसान कमेटी के प्रधान गुरविन्द्र सिंह जटवाड़ का कहना है कि सरकार को चाहिए कि वे गन्ना किसानों के हितों को देखते हुए शीघ्र अति शीघ्र गन्ना किसानों की बकाया राशि का भुगतान करे और इस मिल को संबद्ध करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर तुरंत कानूनी समाधान निकाले।
किसान नेता मदनपाल राणा ने बताया कि मिल क्षेत्र के किसानों की जीवन रेखा है। क्षेत्र में पानी का स्तर कम होने के चलते गन्ने की फसल और क्षेत्रों से बेहतर होती है। ज्यादातर किसान इसपर ही निर्भर हैं। सरकार को चाहिए कि वह मिल को सहकारी क्षेत्र में लेकर किसानों के हितों का ध्यान रखे।
विज्ञापन
किसानों का आरोप था कि उन्हें बकाया भुगतान को लेकर मिल प्रशासन ने कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। इधर मिल प्रबंधन का कहना है कि वह किसानों की पूरी बात सरकार तक अनौपचारिक रूप से पहुंचा चुके हैं। उपमंडल कार्यालय पर भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह, गन्ना किसान कमेटी और संयुक्त किसान मजदूर इंकलाब यूनियन संगठन के नेता शामिल रहे। इस दौरान जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। वहीं वीरवार को भी धरना देने का निर्णय लिया गया है।
विज्ञापन
दरअसल, किसानाें को पांच जनवरी तक भुगतान करने के लिए जब वचनबद्ध होने की बात आई तो मिल प्रशासन सहमति नहीं जता पाया। ऐसे में इन धरना देने वाले किसान संगठनों को लगा कि जिस प्रकार से प्रशासन पहले मुकर चुका है इस बार भी न मुकर जाए। दूसरी ओर भारतीय किसान यूनियन चढूनी से जुड़े किसान नेताओं का कहना है कि बैठक में मिल प्रशासन की बात से सभी राजी थे। धरना पांच जनवरी को भुगतान न होने के बाद देना उचित रहता।
विज्ञापन
भाकियू शहीद भगत सिंह के उपाध्यक्ष विक्रम राणा ने बताया कि मिल कुर्क होती है तो किसान गन्ना कहां बेचेगा। किसानों का जो बकाया है, उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। उपमंडल अधिकारी मिल को सरकारी नियंत्रण में लेकर चला रही हैं लेकिन किसानों के पैसे की जिम्मेदारी नहीं लेतीं।
किसान मजदूर इंकलाब यूनियन के अध्यक्ष धर्मवीर ढींडसा ने कहा कि धरना प्रदर्शन करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। सरकार जिम्मेदारी लेते हुए सरकारी खजाने से किसानों का पैसा दे। यदि शीघ्र ऐसा नहीं किया गया तो किसान अनिश्चित काल के लिए धरना प्रदर्शन करने पर विवश होंगे।
गन्ना किसान कमेटी के प्रधान गुरविन्द्र सिंह जटवाड़ का कहना है कि सरकार को चाहिए कि वे गन्ना किसानों के हितों को देखते हुए शीघ्र अति शीघ्र गन्ना किसानों की बकाया राशि का भुगतान करे और इस मिल को संबद्ध करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर तुरंत कानूनी समाधान निकाले।
किसान नेता मदनपाल राणा ने बताया कि मिल क्षेत्र के किसानों की जीवन रेखा है। क्षेत्र में पानी का स्तर कम होने के चलते गन्ने की फसल और क्षेत्रों से बेहतर होती है। ज्यादातर किसान इसपर ही निर्भर हैं। सरकार को चाहिए कि वह मिल को सहकारी क्षेत्र में लेकर किसानों के हितों का ध्यान रखे।