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Ambala News: प्राथमिक स्कूलों में समायोजित होंगे शिक्षक, दूसरे स्कूल भी प्रभावित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 08 Dec 2024 11:57 PM IST
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They showered flowers, brought food and then could not shake their intentions
अंबाला सिटी। शिक्षा विभाग ने जिले में खाली हुए 71 राजकीय प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक समायोजित किए थे। यह शिक्षक उन स्कूलों में लगाए गए हैं, जहां तबादला के बाद स्कूल बिल्कुल खाली हो गए थे। यहां एक भी शिक्षक नहीं बचा था। जिन स्कूलों से विभाग ने खाली स्कूलों में यह शिक्षक लगाए हैं। अब वहां भी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसका असर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।
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सबसे ज्यादा समस्या अंबाला खंड वन के ग्रामीण एरिया में है। अंबाला खंड वन से ही ज्यादा शिक्षक तबादले के बाद चले गए, लेकिन उनकी जगह अन्य शिक्षक तबादले के बाद नहीं आए। अब न तो शिक्षा विभाग तबादला प्रक्रिया शुरू कर रहा है। इससे एक शिक्षक के सहारे चल रहे स्कूलों को शिक्षक मिल सकें और न ही सरकार की ओर से भर्ती को लेकर कोई कदम उठाया गया है।
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बालवाटिका की पढ़ाई पर भी असर

दरअसल, राजकीय प्राथमिक पाठशाला में बालवाटिका तीन प्रोजेक्ट के तहत शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह शिक्षक प्रशिक्षण के बाद स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ाई करवाएंगे, मगर दिक्कत यह भी है कि शिक्षकों की कमी से यह पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। बालवाटिका प्रोजेक्ट की तरफ भी शिक्षक ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। इसी तरह राजकीय स्कूलों में कमरों की कमी भी बड़ा मुद्दा है।
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शिक्षकों को दाखिला बढ़ाने का लक्ष्य, कैसे होगा पूरा

एक तरफ विभाग राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए लगातार शिक्षकों को लक्ष्य दे रहा है। दूसरी तरफ राजकीय प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों व संसाधनों की कमी से विद्यार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही है। कई स्कूल ऐसे हैं, जहां यह संख्या कम होकर 17 बच्चों तक भी रह गई है। ऐसे में इन स्कूलों में भविष्य में बंद होने की तलवार लटक सकती है। जेबीटी की नियमित भर्ती भी कई वर्षों से नहीं हुई है।

कोट्स

शिक्षकों की कमी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। खंड वन में शिक्षकों की सबसे ज्यादा कमी है। इस खंड से तबादले के दौरान ज्यादा शिक्षक गए थे, मगर कोई शिक्षक नहीं आया। जिला व निदेशालय में अधिकारियों को संघ की ओर से इस समस्या के बारे में अवगत करवाया गया है।


अमित छाबड़ा, राज्य प्रवक्ता, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ।

वर्जन

बीते महीनों शिक्षकों के तबादले के बाद 71 राजकीय प्राथमिक स्कूल ऐसे थे, जो शून्य शिक्षक हो गए थे। उनमें दूसरे स्कूलों से शिक्षक एडजस्ट किए गए थे, जिससे कि बच्चों की पढ़ाई खराब न हो। अभी इन स्कूलों में एक ही शिक्षक पढ़ाई करवा रहा है।
सुधीर कालड़ा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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