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Ambala News: आधुनिक डिवाइस भी लोको पायलट ने कर दिया फेल, नींद में दबाता रहा बटन
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हादसे के बाद पलटी मालगाड़ी व इंजन। रेलवे
हरिंदर पाल सिंह
अंबाला। ट्रेन हादसे को रोकने के लिए लगाया डिवाइस भी मानव कार्यशैली के चलते फेल हो गया। लोको पायलट नींद में होने के बावजूद पैर से इंजन में लगे डिवाइस को दबाता रहा, जिससे उसकी नींद खराब न हो।
यह तथ्य अंबाला-लुधियाना रेल सेक्शन पर साधुगढ़ और सरहिंद रेलवे स्टेशन के बीच डीएफसीसीआईएल कॉरिडोर पर हुए हादसे के बाद सामने आए। इसमें मानवीय भूल का खामियाजा रेलवे और यात्रियों को भुगतना पड़ा। ऐसे हादसे न हों और लोको पायलट निष्ठापूर्वक से काम करें। इसके लिए अंबाला मंडल ने काम करना शुरू कर दिया है। अंबाला रेल मंडल के प्रबंधक मंदीप सिंह भाटिया खुद लोको लाॅबी में जाकर लोको पायलट और सह लोको पायलट से मंत्रणा कर रहे हैं।
विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस पर ग्रहण
रेलवे ने हादसों को रोकने के लिए सभी इंजनों में विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस लगाया है। इसको लगाने का मकसद है कि हादसा न हो। अगर लोको पायलट सो गया तो हूटर बजेगा और लाइट फ्लेश होगी। अगर एक मिनट में लाइट बंद नहीं की तो स्वचलित ब्रेक सिस्टम एक्टिव हो जाएगा और इमरजेंसी ब्रेक लग जाएंगे।
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सोते हुए पैर से दबाता रहा बटन
हादसे से पहले मालगाड़ी के दोनों पायलट नींद में थे। बावजूद इसके लोको पायलट सोते हुए भी पैर से डिवाइस का बटन दबा रहा था। इसलिए स्वचलित सिस्टम इस लापरवाही को कैद नहीं कर पाया। कई बार जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोको पायलट नींद पूरी करने के चक्कर में पैर चलाते रहते हैं, जिससे कि सफर भी कट जाए और उनकी ड्यूटी भी पूरी हो जाए। इसमें भी ऐसे ही तथ्य सामने आए हैं। लापरवाही बरतने वाले लोको पायलट को चार्ज शीट दी जाएगी और उनका पक्ष भी जाना जाएगा। अभी तीनों कर्मचारी निलंबित चल रहे हैं।
इस तरह काम करता है डिवाइस
प्रत्येक 60 सेकेंड में लोको पायलट को एक बार विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस का बटन दबाना होता है। इससे लोको पायलट की सतर्कता चेक होती है, लेकिन हादसे से 16 मिनट पहले सब कुछ बदल गया। रात 2:57 तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन 16 मिनट बाद यानी 3:13 पर जब दूसरी मालगाड़ी ट्रैक पर सामने नजर आई तो एडवांस स्टार्ट सिग्नल के जानकारी देने के बावजूद लोको पायलट नींद से नहीं जाग पाया और हादसा हो गया।
चार लोको इंस्पेक्टर कर रहे जांच
लगभग 5500 करोड़ की लागत से उत्तर प्ररेश के पिलखनी से पंजाब के साहनेवाल तक बनाए डीएफसीसीआईएल कॉरिडोर को आधुनिक तकनीक से लैस किया है। इसमें स्वचलित सिग्नल प्रणाली और सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए हैं, लेकिन मानवीय भूल ने इस सिस्टम पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। इसलिए रेलवे ने अब डीएफसीसीआईएल पर मालगाड़ियों के संचालन में जुटे लोको पायलट की निगरानी की योजना तैयार की है। इसके लिए चार लोको इंस्पेक्टर को जिम्मेदारी सौंपी गई है जोकि अलग-अलग रेलवे स्टेशन पर जाकर इंजनों की जांच करेंगे और लोको पायलटों से भी पूछताछ करेंगे कि कहीं वो नींद या फिर नशे में तो नहीं हैं।
वर्जन
सीआरएस ने कुछ तथ्यों को लेकर जानकारी मांगी है जोकि उपलब्ध करवाई जा रही है। मालगाड़ियों के संचालन को लेकर अब पहले से अधिक सतर्कता बरती जा रही है।
पंकज गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक, डीएफसीसीआईएल
वर्जन
रेल इंजनों में विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस लगाई है, जिससे कि हादसे न हों। इस डिवाइस को प्रत्येक 60 सेकेंड बाद दबाना लोको पायलट के लिए जरूरी है, अन्यथा स्वचलित सिस्टम से खुद-ब-खुद इमरजेंसी ब्रेक लग जाते हैं। लेकिन इस हादसे में जो तथ्य सामने आए हैं वो हैरान करने वाले हैं कि नींद के बावजूद यह बटन कैसा दबाया जाता रहा। अब यह खुलासा सीआरएस की रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगा।
मंदीप सिंह भाटिया, डीआरएम अंबाला।
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अंबाला। ट्रेन हादसे को रोकने के लिए लगाया डिवाइस भी मानव कार्यशैली के चलते फेल हो गया। लोको पायलट नींद में होने के बावजूद पैर से इंजन में लगे डिवाइस को दबाता रहा, जिससे उसकी नींद खराब न हो।
यह तथ्य अंबाला-लुधियाना रेल सेक्शन पर साधुगढ़ और सरहिंद रेलवे स्टेशन के बीच डीएफसीसीआईएल कॉरिडोर पर हुए हादसे के बाद सामने आए। इसमें मानवीय भूल का खामियाजा रेलवे और यात्रियों को भुगतना पड़ा। ऐसे हादसे न हों और लोको पायलट निष्ठापूर्वक से काम करें। इसके लिए अंबाला मंडल ने काम करना शुरू कर दिया है। अंबाला रेल मंडल के प्रबंधक मंदीप सिंह भाटिया खुद लोको लाॅबी में जाकर लोको पायलट और सह लोको पायलट से मंत्रणा कर रहे हैं।
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विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस पर ग्रहण
रेलवे ने हादसों को रोकने के लिए सभी इंजनों में विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस लगाया है। इसको लगाने का मकसद है कि हादसा न हो। अगर लोको पायलट सो गया तो हूटर बजेगा और लाइट फ्लेश होगी। अगर एक मिनट में लाइट बंद नहीं की तो स्वचलित ब्रेक सिस्टम एक्टिव हो जाएगा और इमरजेंसी ब्रेक लग जाएंगे।
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सोते हुए पैर से दबाता रहा बटन
हादसे से पहले मालगाड़ी के दोनों पायलट नींद में थे। बावजूद इसके लोको पायलट सोते हुए भी पैर से डिवाइस का बटन दबा रहा था। इसलिए स्वचलित सिस्टम इस लापरवाही को कैद नहीं कर पाया। कई बार जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोको पायलट नींद पूरी करने के चक्कर में पैर चलाते रहते हैं, जिससे कि सफर भी कट जाए और उनकी ड्यूटी भी पूरी हो जाए। इसमें भी ऐसे ही तथ्य सामने आए हैं। लापरवाही बरतने वाले लोको पायलट को चार्ज शीट दी जाएगी और उनका पक्ष भी जाना जाएगा। अभी तीनों कर्मचारी निलंबित चल रहे हैं।
इस तरह काम करता है डिवाइस
प्रत्येक 60 सेकेंड में लोको पायलट को एक बार विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस का बटन दबाना होता है। इससे लोको पायलट की सतर्कता चेक होती है, लेकिन हादसे से 16 मिनट पहले सब कुछ बदल गया। रात 2:57 तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन 16 मिनट बाद यानी 3:13 पर जब दूसरी मालगाड़ी ट्रैक पर सामने नजर आई तो एडवांस स्टार्ट सिग्नल के जानकारी देने के बावजूद लोको पायलट नींद से नहीं जाग पाया और हादसा हो गया।
चार लोको इंस्पेक्टर कर रहे जांच
लगभग 5500 करोड़ की लागत से उत्तर प्ररेश के पिलखनी से पंजाब के साहनेवाल तक बनाए डीएफसीसीआईएल कॉरिडोर को आधुनिक तकनीक से लैस किया है। इसमें स्वचलित सिग्नल प्रणाली और सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए हैं, लेकिन मानवीय भूल ने इस सिस्टम पर भी सवालिया निशान लगा दिया है। इसलिए रेलवे ने अब डीएफसीसीआईएल पर मालगाड़ियों के संचालन में जुटे लोको पायलट की निगरानी की योजना तैयार की है। इसके लिए चार लोको इंस्पेक्टर को जिम्मेदारी सौंपी गई है जोकि अलग-अलग रेलवे स्टेशन पर जाकर इंजनों की जांच करेंगे और लोको पायलटों से भी पूछताछ करेंगे कि कहीं वो नींद या फिर नशे में तो नहीं हैं।
वर्जन
सीआरएस ने कुछ तथ्यों को लेकर जानकारी मांगी है जोकि उपलब्ध करवाई जा रही है। मालगाड़ियों के संचालन को लेकर अब पहले से अधिक सतर्कता बरती जा रही है।
पंकज गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक, डीएफसीसीआईएल
वर्जन
रेल इंजनों में विजिलेंस कंट्रोल डिवाइस लगाई है, जिससे कि हादसे न हों। इस डिवाइस को प्रत्येक 60 सेकेंड बाद दबाना लोको पायलट के लिए जरूरी है, अन्यथा स्वचलित सिस्टम से खुद-ब-खुद इमरजेंसी ब्रेक लग जाते हैं। लेकिन इस हादसे में जो तथ्य सामने आए हैं वो हैरान करने वाले हैं कि नींद के बावजूद यह बटन कैसा दबाया जाता रहा। अब यह खुलासा सीआरएस की रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगा।
मंदीप सिंह भाटिया, डीआरएम अंबाला।

हादसे के बाद पलटी मालगाड़ी व इंजन। रेलवे