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मेजबान पहलवानों पर रहेगी नजर, मिलेगी जबरदस्त टक्कर

Fri, 17 Mar 2017 11:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला Updated Fri, 17 Mar 2017 11:38 PM IST
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The host will stay on the wrestlers, they will get tremendous collision, Ambala
मेजबान पहलवानों पर रहेगी नजर, मिलेगी जबरदस्त टक्कर - फोटो : Amar Ujala

खेल मंत्री अनिल विज के जिला के पहलवानों पर अंबाला की साख बचाने का जहां जिम्मा है, वहीं भारत केसरी दंगल में इनको जबरदस्त टक्कर मिलेगी। दंगल में 18 मार्च को तय हो जाएगा कि इस दंगल में कौन सी टीमों के कौन-कौन से पहलवान भाग ले रहे हैं, जबकि अंबाला में कुश्ती की स्थिति को देखते हुए यह मुकाबले अंबाला के पहलवानों के लिए काफी परीक्षा लेंगे।

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यह है कुश्ती में अंबाला की स्थिति
अंबाला में कुश्ती के लिए खेल विभाग के वार हीरोज मेमोरियल स्टेडियम में सेंटर बना हुआ है, जहां पर पहलवान प्रैक्टिस करते हैं। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में बने अखाड़ों में मिट्टी पर पहलवान कुश्ती की प्रैक्टिस करते हैं। खास बात यह है कि इस बार पुरुष और महिला वर्ग में यह मुकाबले करवाए जाएंगे, जबकि सूत्र बताते हैं कि अंबाला में महिला रेसलर ही नहीं हैं। इतना ही नहीं इक्का दुक्का लड़कियां सेंटर में आईं, लेकिन बाद में वे भी नियमित नहीं हुईं।
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दूसरी ओर स्कूल लेवल पर भी लड़कियों में रेसलिंग को लेकर कोई रुचि नहीं है। दूसरी ओर पुरुष वर्ग में पहलवान हैं, लेकिन अधिकतर अखाड़ों में ही प्रेक्टिस करते हैं। लेकिन स्थिति यह है कि इन में भी पहलवानों की संख्या काफी कम है और नियमित नहीं हैं। दंगल में कुश्ती मैट पर होंगी, जबकि अधिकतर अखाड़ों में मिट्टी में ही प्रेक्टिस होती है।
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यह है भारत केसरी दंगल का शेड्यूल
भारत केसरी दंगल का आयोजन 21 से 23 मार्च तक वार हीरोज मेमोरियल स्टेडियम अंबाला छावनी में आयोजित किया जाएगा। इस दंगल में पुरुष वर्ग में 57, 65, 74, 86, 97 और 97 किलोग्राम वजन से अधिक भार वर्ग में फ्री स्टाइल कुश्ती के मुकाबले करवाए जाएंगे। इसी प्रकार महिला वर्ग भार में 48, 53, 58, 63, 69, 75 और 75 किलोग्राम वजन से अधिक भार वर्ग के मुकाबले होंगे। प्रतियोगिता में 7 राज्यों के साथ-साथ रेलवे की पहलवानों की टीमें भाग लेंगी।

यह कहते हैं लोग
कुश्ती खेल से जुड़े रहे राजेंद्र, जगदीश, जोरावर सिंह, रण सिंह, राकेश गुप्ता का कहना है कि अंबाला में कुश्ती को लेकर काफी क्रेज रहा है और हर रविवार को अंबाला में दंगल हुआ करते थे। दंगल परंपरा काफी तेजी पर थी, लेकिन धीरे-धीरे यह दंगल खत्म होते गए और अब तो स्थिति यह है कि साल भर में दर्जन भर दंगल ही होते होंगे और वह भी खास मौकों पर।


अखाड़ों की स्थिति जस की तस है, इस में सुधार नहीं हुआ, जबकि कई अखाड़े तो सूने पड़े हैं या फिर बंद हो गए। देखते हैं भारत केसरी दंगल के बाद शायद युवाओं में इस खेल के प्रति क्रेज बढ़े। 

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