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Ambala News: रथ और सिंहासन पर सवार गणपति स्वरूप श्रद्धालुओं को भा रहे
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गणपति बप्पा के स्वरूप को अंतिम रूप देती महिला। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। गणेश महोत्सव 14 सितंबर से शुरू हो रहा है। पूजा पंडालों से लेकर श्रद्धालुओं के घरों तक गणपति बप्पा के स्वागत का उत्साह नजर आ रहा है। श्रद्धालु विघ्नहर्ता को अपने घर और पंडालों में विराजमान करने के लिए अभी से मूर्तियों की बुकिंग करा रहे हैं। शिल्पकारों के यहां आधा फीट के छोटे गणपति से लेकर 15 फीट की विशाल प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। वैसे 7 फीट के मूषक वाले गणपति की श्रद्धालुओं में विशेष मांग है।
अंबाला छावनी में पिछले 35 वर्षों से राजस्थान के जयपुर से आए कारीगर बप्पा के विभिन्न मनमोहक स्वरूपों को आकार दे रहे हैं। इस बार बाजार में कई नए और आकर्षक डिजाइनों की मूर्तियां उपलब्ध हैं,
प्रतिमाओं में दिखे महाकालेश्वर से लाल बाग के राजा के विविध स्वरूप
कारीगरों द्वारा तैयार की गई मूर्तियों में सिंहासन पर विराजमान बप्पा, शयन मुद्रा, पगड़ी वाले गणपति, महाकालेश्वर रूप, रथ पर सवार मूषक गणपति और लालबाग के राजा के स्वरूप खास आकर्षण का केंद्र हैं। इसके अलावा, परी के कान वाले सिंपल व नगीना जड़ित गणपति, कपड़ों व रंग-बिरंगी झालरों से सजे गणपति बप्पा के स्वरूप श्रद्धालुओं को खूब भा रहे हैं।
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आधा फीट से 15 फीट तक के गणपति उपलब्ध
आधा फीट के छोटे गणपति से लेकर 15 फीट की विशाल प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। मूर्तियों की दरें उनके आकार और कलाकृति के अनुसार तय की गई हैं। आधा फीट 551, एक फीट 2,500, दाे फीट 3,500, तीन फीट 6,500, चार फीट 8,500, पांच फीट 9,000, छह फीट 11,000, सात फीट 12,000, आठ फीट 13,000, 10 फीट 14,000, 12 फीट 18,000 और 15 फीट की प्रतिमाएं 28,000 से 48,000 तक है।
पीढ़ियों से चला आ रहा मूर्ति कला का सफर
जयपुर के रहने वाले रमेश ने बताया कि उनके दादा-परदादा के समय से ही मूर्तिकला का यह पारंपरिक काम चला आ रहा है। रमेश पिछले 35 सालों से अंबाला कैंट में मूर्तियां बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह हुनर उन्हें अपनी मां सुपिया से मिला था। दिनेश ने बताया कि उन्हें यह कला अपने पिता से विरासत में मिली है और वह खुद पिछले 25 वर्षों से मूर्तियां बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार विशेष मांग पर तैयार किए गए 7 फीट के मूषक वाले गणपति 21,000 रुपये में और गाय के साथ महाकालेश्वर स्वरूप वाले 7 फीट के गणपति 31,000 रुपये में उपलब्ध हैं।
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अंबाला। गणेश महोत्सव 14 सितंबर से शुरू हो रहा है। पूजा पंडालों से लेकर श्रद्धालुओं के घरों तक गणपति बप्पा के स्वागत का उत्साह नजर आ रहा है। श्रद्धालु विघ्नहर्ता को अपने घर और पंडालों में विराजमान करने के लिए अभी से मूर्तियों की बुकिंग करा रहे हैं। शिल्पकारों के यहां आधा फीट के छोटे गणपति से लेकर 15 फीट की विशाल प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। वैसे 7 फीट के मूषक वाले गणपति की श्रद्धालुओं में विशेष मांग है।
अंबाला छावनी में पिछले 35 वर्षों से राजस्थान के जयपुर से आए कारीगर बप्पा के विभिन्न मनमोहक स्वरूपों को आकार दे रहे हैं। इस बार बाजार में कई नए और आकर्षक डिजाइनों की मूर्तियां उपलब्ध हैं,
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प्रतिमाओं में दिखे महाकालेश्वर से लाल बाग के राजा के विविध स्वरूप
कारीगरों द्वारा तैयार की गई मूर्तियों में सिंहासन पर विराजमान बप्पा, शयन मुद्रा, पगड़ी वाले गणपति, महाकालेश्वर रूप, रथ पर सवार मूषक गणपति और लालबाग के राजा के स्वरूप खास आकर्षण का केंद्र हैं। इसके अलावा, परी के कान वाले सिंपल व नगीना जड़ित गणपति, कपड़ों व रंग-बिरंगी झालरों से सजे गणपति बप्पा के स्वरूप श्रद्धालुओं को खूब भा रहे हैं।
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आधा फीट से 15 फीट तक के गणपति उपलब्ध
आधा फीट के छोटे गणपति से लेकर 15 फीट की विशाल प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। मूर्तियों की दरें उनके आकार और कलाकृति के अनुसार तय की गई हैं। आधा फीट 551, एक फीट 2,500, दाे फीट 3,500, तीन फीट 6,500, चार फीट 8,500, पांच फीट 9,000, छह फीट 11,000, सात फीट 12,000, आठ फीट 13,000, 10 फीट 14,000, 12 फीट 18,000 और 15 फीट की प्रतिमाएं 28,000 से 48,000 तक है।
पीढ़ियों से चला आ रहा मूर्ति कला का सफर
जयपुर के रहने वाले रमेश ने बताया कि उनके दादा-परदादा के समय से ही मूर्तिकला का यह पारंपरिक काम चला आ रहा है। रमेश पिछले 35 सालों से अंबाला कैंट में मूर्तियां बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह हुनर उन्हें अपनी मां सुपिया से मिला था। दिनेश ने बताया कि उन्हें यह कला अपने पिता से विरासत में मिली है और वह खुद पिछले 25 वर्षों से मूर्तियां बना रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार विशेष मांग पर तैयार किए गए 7 फीट के मूषक वाले गणपति 21,000 रुपये में और गाय के साथ महाकालेश्वर स्वरूप वाले 7 फीट के गणपति 31,000 रुपये में उपलब्ध हैं।

गणपति बप्पा के स्वरूप को अंतिम रूप देती महिला। संवाद