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Ambala News: रोशनी देवी बनाम ग्राम पंचायत नागोली मामले में कोर्ट ने दिया यथास्थिति का आदेश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jul 2026 01:41 AM IST
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The court issued a status quo order in the Roshni Devi vs. Gram Panchayat Nagoli case.
अंबाला सिटी। नारायणगढ़ के नागोली गांव में रास्ते के विवाद को लेकर चल रहे मामले में जिला अदालत ने फैसला सुनाया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश हितेश गर्ग की अदालत के फैसले के अनुसार, मामले की गंभीरता और 5.5 साल से मौके पर कोई निर्माण न होने को देखते हुए दोनों पक्षों को विवादित रास्ते पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं।
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गांव नागोली की निवासी रोशनी देवी ने ग्राम पंचायत नागोली के खिलाफ याचिका दायर की थी। रोशनी देवी का कहना था कि उनके घर के सामने से गुजरने वाला रास्ता ही उनके घर का एकमात्र रास्ता है, जिसे वे पिछले 35-40 वर्षों से इस्तेमाल कर रही हैं। आरोप था कि गांव की आपसी रंजिश के कारण पंचायत वहां दीवार खड़ी कर उनका रास्ता बंद करना चाहती है। वहीं, सरपंच नेहा के नेतृत्व वाली ग्राम पंचायत का तर्क था कि रोशनी देवी का दावा गलत है और उनके पास आने-जाने के लिए एक अन्य वैकल्पिक रास्ता भी उपलब्ध है। इससे पहले नारायणगढ़ की सिविल जज (जूनियर डिवीजन) मनमीत कौर की अदालत ने 19 जनवरी को रोशनी देवी की अंतरिम रोक लगाने वाली अर्जी को खारिज कर दिया था।
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शराब तस्करी मामले में सुबूतों के अभाव में आरोपी बरी

नारायणगढ़। अवैध रूप से शराब बेचने के मामले में स्थानीय अदालत ने आरोपी रवि कुमार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी आकांक्षा की अदालत के फैसले के अनुसार, अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। मामला 18 जुलाई 2022 का है, जब शहजादपुर पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि शहजादपुर मजरा निवासी रवि कुमार अपने ईटिंग पॉइंट के बाहर अवैध रूप से शराब बेचने के लिए बैठा है। पुलिस ने दबिश देकर उसके कब्जे से प्लास्टिक के बैग में ताजा माल्टा ब्रांड की 10 बोतलें देसी शराब बरामद की थीं। कोई वैध परमिट या लाइसेंस न होने पर पुलिस ने पंजाब आबकारी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
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स्वतंत्र गवाह जांच में शामिल नहीं किया

मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने पुलिस जांच की कई कमियों को कोर्ट के सामने रखा। अदालत ने पाया कि घटना सार्वजनिक स्थान की होने और गुप्त सूचना पहले से मिलने के बावजूद पुलिस ने किसी भी स्वतंत्र गवाह को जांच में शामिल नहीं किया। इसके अलावा, बरामद की गई 10 बोतलों में से केवल एक ही बोतल को रासायनिक जांच के लिए भेजा गया था। फैसले में अदालत ने कहा कि यह साबित नहीं होता कि सभी बोतलों में अवैध रूप से भरी गई शराब ही थी। कानूनन, अभियोजन पक्ष को अपना मामला संदेह से परे साबित करना होता है। जांच में रही इन बड़ी खामियों के चलते अदालत ने आरोपी को बरी करने के आदेश जारी किए।
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