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बाहरी खाने से दांत जल्दी होेते हैं खराब : चिकित्सक
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जागरूकता अभियान के तहत प्रतियोगिता में भाग लेते हुए बच्चे व चिकित्सक। संवाद
अंबाला सिटी। खराब खान-पान और मुंह के स्वास्थ्य का ध्यान न रखने के कारण कई बीमारियां हो सकती है। जो आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती हैं। स्वास्थ्य विभाग में तैनात दंत रोग चिकित्सक डॉ अमनिंदर चहल बताती हैं कि बाहर के खानपान के कारण 26 से 30 प्रतिशत बच्चों के दांत बचपन से ही खराब होने शुरू हो जाते हैं।
इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। छह वर्ष की उम्र में ही बच्चों के दूध के दांत आने शुरू हो जाते हैं लेकिन अभिभावक बच्चों को सख्त खाने की बजाय नर्म खाद्य पदार्थ देना शुरू कर देते हैं। इसके कारण बच्चों के दांतों को मजबूती नहीं मिल पाती और दांत जल्दी खराब होने लगते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को सख्त फल, दालें, मोटे अनाज का सेवन करवाना चाहिए। अधिक मीठे पदार्थ खाने के कारण भी बच्चों के दांत जल्दी खराब होने शुरू हो जाते हैं। इसका परहेज करना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग चला रहा जागरुकता अभियान
इसी को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने विश्व ओरल हेल्थ दिवस से एक जागरूकता अभियान शुरू किया है। जिसके तहत स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर लोगों को दांतों और मुंह के स्वास्थ्य के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इस अभियान के तहत स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित करवाई जा रही हैं। डॉ चहल ने बताया कि सीएमओ डॉ़ राकेश सहल के निर्देशों पर विभाग की टीमें मुंह के स्वास्थ्य को लेकर अभियान के जरिए लोगों को जागरूक कर रहीं है। यह अभियान एक महीने तक जारी रहेगा।
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गर्भवतियों को भी रखना चाहिए ध्यान
डॉ अमनिंदर चहल ने बताया कि अक्सर ही देखने में आता है कि महिलाओं को गर्भावस्था में ब्रश नहीं करने दिया जाता। इसके कारण महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मुंह के खराब स्वास्थ्य के कारण गर्भवती को समय से पहले प्रसव पीड़ा भी शुरू हो सकती है। इसका असर होने वाले बच्चे पर भी पड़ता है। मुंह के खराब स्वास्थ्य के कारण बैक्टीरिया मुंह के रास्ते पेट तक चले जाते हैं जिनसे ब्रेन स्ट्रोक व ह्रदय संबंधी बीमारियां भी हो सकती है।
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इस प्रकार रखें ख्याल
डॉ अमनिंदर चहल ने बताया कि बचपन से बच्चों को ब्रश करने की आदत डलवाएं। इसके साथ ही दूध पीते बच्चे के मुंह में दूध की बोतल लगाकर न सुलाएं। छोटे बच्चों के दांतों को रुई से नियमित साफ रखे। दूध के कारण भी दांतों की समस्या हो सकती है। इसके साथ ही रात के समय खाना खाने के बाद भी ब्रश अवश्य करना चाहिए।
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इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। छह वर्ष की उम्र में ही बच्चों के दूध के दांत आने शुरू हो जाते हैं लेकिन अभिभावक बच्चों को सख्त खाने की बजाय नर्म खाद्य पदार्थ देना शुरू कर देते हैं। इसके कारण बच्चों के दांतों को मजबूती नहीं मिल पाती और दांत जल्दी खराब होने लगते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को सख्त फल, दालें, मोटे अनाज का सेवन करवाना चाहिए। अधिक मीठे पदार्थ खाने के कारण भी बच्चों के दांत जल्दी खराब होने शुरू हो जाते हैं। इसका परहेज करना चाहिए।
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स्वास्थ्य विभाग चला रहा जागरुकता अभियान
इसी को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने विश्व ओरल हेल्थ दिवस से एक जागरूकता अभियान शुरू किया है। जिसके तहत स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर लोगों को दांतों और मुंह के स्वास्थ्य के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इस अभियान के तहत स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों में विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित करवाई जा रही हैं। डॉ चहल ने बताया कि सीएमओ डॉ़ राकेश सहल के निर्देशों पर विभाग की टीमें मुंह के स्वास्थ्य को लेकर अभियान के जरिए लोगों को जागरूक कर रहीं है। यह अभियान एक महीने तक जारी रहेगा।
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गर्भवतियों को भी रखना चाहिए ध्यान
डॉ अमनिंदर चहल ने बताया कि अक्सर ही देखने में आता है कि महिलाओं को गर्भावस्था में ब्रश नहीं करने दिया जाता। इसके कारण महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मुंह के खराब स्वास्थ्य के कारण गर्भवती को समय से पहले प्रसव पीड़ा भी शुरू हो सकती है। इसका असर होने वाले बच्चे पर भी पड़ता है। मुंह के खराब स्वास्थ्य के कारण बैक्टीरिया मुंह के रास्ते पेट तक चले जाते हैं जिनसे ब्रेन स्ट्रोक व ह्रदय संबंधी बीमारियां भी हो सकती है।
इस प्रकार रखें ख्याल
डॉ अमनिंदर चहल ने बताया कि बचपन से बच्चों को ब्रश करने की आदत डलवाएं। इसके साथ ही दूध पीते बच्चे के मुंह में दूध की बोतल लगाकर न सुलाएं। छोटे बच्चों के दांतों को रुई से नियमित साफ रखे। दूध के कारण भी दांतों की समस्या हो सकती है। इसके साथ ही रात के समय खाना खाने के बाद भी ब्रश अवश्य करना चाहिए।