{"_id":"cc64914c2fb372877d2c57f67c204179","slug":"teacher-raging-on-the-functioning-of-the-education-department","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भड़के शिक्षक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भड़के शिक्षक
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला
Updated Sun, 27 Jul 2014 12:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकारी स्कूलों में क्वालिटी एजुकेशन और पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध करवाने के लिए की जा रही शिक्षा विभाग की रेशनलाइजेशन प्रक्रिया विवादों में घिर गई है।
इस प्रक्रिया के दौरान बरती गई हरियाणा शिक्षा विभाग की लापरवाही की वजह से पहले चरण में 338 शिक्षक अधर में लटक गए हैं। इन स्कूली टीचरों को उन्हीं के स्कूलों में सरप्लस दिखा दिया गया है। इससे भड़के शिक्षकों ने शनिवार को वबाल काटा और जमकर हंगामा किया। इन शिक्षकों ने जब विरोध किया तो आला शिक्षा अधिकारियों ने भी रेशनलाइजेशन प्रक्रिया में स्टूडेंट्स डाटा की जांच की। जिसमें ये पाया गया कि ये रेशनलाइजेंशन पुराने स्टूडेंट्स डाटा के आधार पर की जा रही थी। जिसके चलते स्कूलों में तैनात शिक्षक सरप्लस हो गए। आला अधिकारियों ने तुरंत इस पर संज्ञान लेते हुए पीजी टीचरों की रेशनलाइजेशन प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया है।
स्कूलों ने भेज दिया था पुराना डाटा
दिसंबर 2013 में सरकार ने सूबे में करीबन 15 हजार नए पीजीटी टीचर नियुक्त किए थे। इनमें से करीब 450 पीजी टीचर यहां अंबाला के सरकारी स्कूलों में भी लगाए गए थे, लेकिन सरकारी स्कूलों में इन टीचरों के आने के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों में दोबारा रेशनाइलेशन पॉलिसी के तहत रेशनलाइजेशन करवाने का निर्णय लिया। यानी इन शिक्षकों की नियुक्ति स्कूलों में छात्रों की संख्या के अनुपात में की जानी थी। इसके लिए हरियाणा शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों से उनके स्कूलों में छात्रों की संख्या मंगवाई। सभी स्कूलों ने स्टूडेंट डाटा शिक्षा विभाग को भेज दिया, लेकिन अधिकतर स्कूलों ने 30 सितंबर 2013 का स्टूडेंट डाटा शिक्षा विभाग को भेज दिया। नए शैक्षणिक सत्र 2014 में स्कूलों में कितने छात्रों की संख्या बढ़ी, इस बारे में स्कूलों की ओर से विभाग को जानकारी नहीं दी गई। इसी वजह से अब रेशनलाइजेशन के दौरान 338 पीजी टीचर अपने स्कूलों में ही सरप्लस हो गए।
विज्ञापन
हंगामे के बाद रेशनलाइजेशन स्थगित
हरियाणा स्कूल लेक्चरर्स एसोसिएशन के बैनर तले सभी पीजी टीचर एकजुट हो गए और उन्होंने इसका जमकर विरोध किया। इन शिक्षकों का कहना था कि जब नए शैक्षणिक सत्र में शिक्षा विभाग रेशनलाइजेशन करवा रहा है तो स्टूडेंट्स का पुराना डाटा को इसका आधार क्यों बनाया जा रहा है? इस बात पर हंगामा करते हुए पीजी टीचरों ने रेशनलाइजेशन प्रक्रिया में भाग लेने से साफ इंकार कर दिया। अफसरों ने इस प्रक्रिया में भाग लेने पहुंचे पीजी टीचरों से अनुरोध किया कि वे रेशनलाइजेश के फार्म तो भरकर जाएं, मगर एसोसिएशन ने इस प्रक्रिया का हिस्सा बनने से ही फिलहाल कर दिया।
बाक्स
निदेशालय ने मागा ताजा स्टूडेंट डाटा
हरियाणा शिक्षा निदेशालय के निर्देशों पर की जा रही रेशनलाइजेशन प्रक्रिया के विवादों में घिरने के बाद आला अफसर सख्त हो गए हैं। उन्होंने शनिवार को ही तमाम जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर स्कूलों से इस शैक्षणिक वर्ष का ताजा स्टूडेंट डाटा निदेशालय भेजने को कहा है। ताकि रेशनलाइजेशन का आधार नया स्टूडेंट डाटा को बनाया जाए और दोबारा रेशनलाइजेशन प्रक्रिया को शुरू करवाया जाए।
इसलिए जरूरी है रेशनलाइजेशन
सरकारी स्कूलों में स्टाफ एडजस्ट करने के लिए रेशनलाइजेशन बहुत जरूरी है, क्योंकि कई स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ाई के नाम पर केवल खाना पूर्ति हो रही है। अंबाला में ही कई स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ने वाले छात्र तो बहुत कम है, लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षक बहुत ज्यादा है। इसी तरह कई स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ने वाले छात्र तो बहुत ज्यादा है, लेकिन उन्हें पढ़ाने को पर्याप्त शिक्षक ही नहीं है। कई टीचर ऐसे हैं, जो एक ही स्कूलों में अपने जुगाड़ से सालों से जमे हुए हैं, लेकिन जिस विषय के वे टीचर है, वो विषय पढ़ने वाले छात्र ही इक्का-दुक्का है। इसलिए विभिन्न विषयों व कक्षाओं के छात्रों की संख्या के आधार पर रेशनलाइजेशन बहुत जरूरी है।
विज्ञापन
इस प्रक्रिया के दौरान बरती गई हरियाणा शिक्षा विभाग की लापरवाही की वजह से पहले चरण में 338 शिक्षक अधर में लटक गए हैं। इन स्कूली टीचरों को उन्हीं के स्कूलों में सरप्लस दिखा दिया गया है। इससे भड़के शिक्षकों ने शनिवार को वबाल काटा और जमकर हंगामा किया। इन शिक्षकों ने जब विरोध किया तो आला शिक्षा अधिकारियों ने भी रेशनलाइजेशन प्रक्रिया में स्टूडेंट्स डाटा की जांच की। जिसमें ये पाया गया कि ये रेशनलाइजेंशन पुराने स्टूडेंट्स डाटा के आधार पर की जा रही थी। जिसके चलते स्कूलों में तैनात शिक्षक सरप्लस हो गए। आला अधिकारियों ने तुरंत इस पर संज्ञान लेते हुए पीजी टीचरों की रेशनलाइजेशन प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया है।
विज्ञापन
स्कूलों ने भेज दिया था पुराना डाटा
दिसंबर 2013 में सरकार ने सूबे में करीबन 15 हजार नए पीजीटी टीचर नियुक्त किए थे। इनमें से करीब 450 पीजी टीचर यहां अंबाला के सरकारी स्कूलों में भी लगाए गए थे, लेकिन सरकारी स्कूलों में इन टीचरों के आने के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूलों में दोबारा रेशनाइलेशन पॉलिसी के तहत रेशनलाइजेशन करवाने का निर्णय लिया। यानी इन शिक्षकों की नियुक्ति स्कूलों में छात्रों की संख्या के अनुपात में की जानी थी। इसके लिए हरियाणा शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों से उनके स्कूलों में छात्रों की संख्या मंगवाई। सभी स्कूलों ने स्टूडेंट डाटा शिक्षा विभाग को भेज दिया, लेकिन अधिकतर स्कूलों ने 30 सितंबर 2013 का स्टूडेंट डाटा शिक्षा विभाग को भेज दिया। नए शैक्षणिक सत्र 2014 में स्कूलों में कितने छात्रों की संख्या बढ़ी, इस बारे में स्कूलों की ओर से विभाग को जानकारी नहीं दी गई। इसी वजह से अब रेशनलाइजेशन के दौरान 338 पीजी टीचर अपने स्कूलों में ही सरप्लस हो गए।
विज्ञापन
हंगामे के बाद रेशनलाइजेशन स्थगित
हरियाणा स्कूल लेक्चरर्स एसोसिएशन के बैनर तले सभी पीजी टीचर एकजुट हो गए और उन्होंने इसका जमकर विरोध किया। इन शिक्षकों का कहना था कि जब नए शैक्षणिक सत्र में शिक्षा विभाग रेशनलाइजेशन करवा रहा है तो स्टूडेंट्स का पुराना डाटा को इसका आधार क्यों बनाया जा रहा है? इस बात पर हंगामा करते हुए पीजी टीचरों ने रेशनलाइजेशन प्रक्रिया में भाग लेने से साफ इंकार कर दिया। अफसरों ने इस प्रक्रिया में भाग लेने पहुंचे पीजी टीचरों से अनुरोध किया कि वे रेशनलाइजेश के फार्म तो भरकर जाएं, मगर एसोसिएशन ने इस प्रक्रिया का हिस्सा बनने से ही फिलहाल कर दिया।
बाक्स
निदेशालय ने मागा ताजा स्टूडेंट डाटा
हरियाणा शिक्षा निदेशालय के निर्देशों पर की जा रही रेशनलाइजेशन प्रक्रिया के विवादों में घिरने के बाद आला अफसर सख्त हो गए हैं। उन्होंने शनिवार को ही तमाम जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर स्कूलों से इस शैक्षणिक वर्ष का ताजा स्टूडेंट डाटा निदेशालय भेजने को कहा है। ताकि रेशनलाइजेशन का आधार नया स्टूडेंट डाटा को बनाया जाए और दोबारा रेशनलाइजेशन प्रक्रिया को शुरू करवाया जाए।
इसलिए जरूरी है रेशनलाइजेशन
सरकारी स्कूलों में स्टाफ एडजस्ट करने के लिए रेशनलाइजेशन बहुत जरूरी है, क्योंकि कई स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ाई के नाम पर केवल खाना पूर्ति हो रही है। अंबाला में ही कई स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ने वाले छात्र तो बहुत कम है, लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षक बहुत ज्यादा है। इसी तरह कई स्कूल ऐसे हैं, जहां पढ़ने वाले छात्र तो बहुत ज्यादा है, लेकिन उन्हें पढ़ाने को पर्याप्त शिक्षक ही नहीं है। कई टीचर ऐसे हैं, जो एक ही स्कूलों में अपने जुगाड़ से सालों से जमे हुए हैं, लेकिन जिस विषय के वे टीचर है, वो विषय पढ़ने वाले छात्र ही इक्का-दुक्का है। इसलिए विभिन्न विषयों व कक्षाओं के छात्रों की संख्या के आधार पर रेशनलाइजेशन बहुत जरूरी है।