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Ambala News: उपचार अधूरा छोड़ने वाले मरीजों को जागरूक करेंगे टीबी चैंपियन
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अंबाला सिटी। टीबी संक्रमण को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग टीबी चैंपियनों का सहारा लेगा। निक्षय अभियान के साथ- साथ अब टीबी का उपचार पूरा कर चुके 14 वर्ष से अधिक आयु वाले टीबी मरीजों को टीबी चैंपियन बनाने में जुटा है। ये टीबी चैंपियन अन्य मरीजों को टीबी के बारे में जागरूक करेंगे।
इसके साथ ही उन्हें जांच व खान- पान के बारे में भी बताएंगे। खासकर उन टीबी मरीजों को इस कार्य से प्रेरणा मिलेगी जो टीबी का उपचार बीच में छोड़ देते हैं। जिला अंबाला में अभी तक 102 टीबी चैंपियन बनाए जा चुके हैं। जिला में फिलहाल तीन हजार से अधिक मरीज टीबी से ग्रस्त हैं। टीबी चैंपियन को इन कार्याें के लिए विभाग की ओर से आर्थिक मदद भी मिलेगी।
ऐसे काम करेंगे टीबी चैंपियन
टीबी चैंपियन मरीजों को जागरूक करने के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर फैली भ्रांतियों को भी दूर कर सकेंगे। ऐसे मरीज जिन्होंने दवाइयां बीच में ही छोड़ दी हैं, उनकी काउंसलिंग करेंगे और दवा खाने के लिए प्रेरित करेंगे। इसके साथ ही समय- समय पर इनके सैंपलिंग भी करवाएंगे। इसके साथ ही समय- समय पर टीबी से जुड़ी कोई न कोई गतिविधियां भी कराएंगे।
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इन कार्यों के लिए विभाग टीबी चैंपियन को भुगतान भी करेगा। जिसमें उपचार पूरा करवाने के लिए 200 रुपये, स्पूटम सैंपल के लिए विभाग 50 रुपए प्रति जांच और दवा वितरण व अन्य कार्यों के लिए भी भुगतान किया जाएगा। विभाग के सहयोग से दिसंबर में दो, जनवरी में एक और फरवरी में दो टीबी चैंपियन बने हैं। जिन्होंने अपना उपचार किया है। अब वे दूसरे मरीजों को भी टीबी चैंपियन बनाने में जुटे हुए हैं।
वर्जन
विभाग की ओर से टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में टीबी चैंपियन अभियान शुरू किया गया है। इससे उपचार अधूरा छोड़ने वाले मरीजों को प्रोत्साहन भी मिलेगा।
-डॉ. पल्लवी, टीबी टीम अंबाला।
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इसके साथ ही उन्हें जांच व खान- पान के बारे में भी बताएंगे। खासकर उन टीबी मरीजों को इस कार्य से प्रेरणा मिलेगी जो टीबी का उपचार बीच में छोड़ देते हैं। जिला अंबाला में अभी तक 102 टीबी चैंपियन बनाए जा चुके हैं। जिला में फिलहाल तीन हजार से अधिक मरीज टीबी से ग्रस्त हैं। टीबी चैंपियन को इन कार्याें के लिए विभाग की ओर से आर्थिक मदद भी मिलेगी।
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ऐसे काम करेंगे टीबी चैंपियन
टीबी चैंपियन मरीजों को जागरूक करने के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर फैली भ्रांतियों को भी दूर कर सकेंगे। ऐसे मरीज जिन्होंने दवाइयां बीच में ही छोड़ दी हैं, उनकी काउंसलिंग करेंगे और दवा खाने के लिए प्रेरित करेंगे। इसके साथ ही समय- समय पर इनके सैंपलिंग भी करवाएंगे। इसके साथ ही समय- समय पर टीबी से जुड़ी कोई न कोई गतिविधियां भी कराएंगे।
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इन कार्यों के लिए विभाग टीबी चैंपियन को भुगतान भी करेगा। जिसमें उपचार पूरा करवाने के लिए 200 रुपये, स्पूटम सैंपल के लिए विभाग 50 रुपए प्रति जांच और दवा वितरण व अन्य कार्यों के लिए भी भुगतान किया जाएगा। विभाग के सहयोग से दिसंबर में दो, जनवरी में एक और फरवरी में दो टीबी चैंपियन बने हैं। जिन्होंने अपना उपचार किया है। अब वे दूसरे मरीजों को भी टीबी चैंपियन बनाने में जुटे हुए हैं।
वर्जन
विभाग की ओर से टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में टीबी चैंपियन अभियान शुरू किया गया है। इससे उपचार अधूरा छोड़ने वाले मरीजों को प्रोत्साहन भी मिलेगा।
-डॉ. पल्लवी, टीबी टीम अंबाला।