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समर्पण ही भक्ति का असली आधार : रेनू
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नारायणगढ़ के हुसैनी रोड स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के आश्रम में प्रवचन करतीं साध्वियां।
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दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आश्रम में सत्संग का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
नारायणगढ़। हुसैनी रोड स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आश्रम में सत्संग का आयोजन किया गया। इसमें साध्वी रेनू भारती ने श्रद्धालुओं को भक्ति के मर्म से अवगत कराया। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी रेनू ने कहा कि संसार और पदार्थों से मोह आसक्ति है, जबकि ईश्वर व गुरु के प्रति प्रेम सच्ची भक्ति है। उन्होंने माता शबरी की अटूट श्रद्धा और नवधा भक्ति का उदाहरण देते हुए बताया कि भगवान केवल प्रेम के भूखे हैं।
मत्स्य, वामन और गजेंद्र मोक्ष जैसे अवतारों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी धर्म पर संकट आता है, भगवान धरा पर अवतरित होते हैं। साध्वी ने राजा बलि के आत्म-समर्पण की महत्ता बताते हुए कहा कि बिना अहंकार त्याग और पूर्ण समर्पण के ईश्वर को प्रसन्न करना असंभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोने के मुकुट अर्पित करने से अधिक श्रेष्ठ मन का समर्पण है। सत्संग का समापन मधुर भजनों और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नारायणगढ़। हुसैनी रोड स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आश्रम में सत्संग का आयोजन किया गया। इसमें साध्वी रेनू भारती ने श्रद्धालुओं को भक्ति के मर्म से अवगत कराया। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी रेनू ने कहा कि संसार और पदार्थों से मोह आसक्ति है, जबकि ईश्वर व गुरु के प्रति प्रेम सच्ची भक्ति है। उन्होंने माता शबरी की अटूट श्रद्धा और नवधा भक्ति का उदाहरण देते हुए बताया कि भगवान केवल प्रेम के भूखे हैं।
मत्स्य, वामन और गजेंद्र मोक्ष जैसे अवतारों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी धर्म पर संकट आता है, भगवान धरा पर अवतरित होते हैं। साध्वी ने राजा बलि के आत्म-समर्पण की महत्ता बताते हुए कहा कि बिना अहंकार त्याग और पूर्ण समर्पण के ईश्वर को प्रसन्न करना असंभव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोने के मुकुट अर्पित करने से अधिक श्रेष्ठ मन का समर्पण है। सत्संग का समापन मधुर भजनों और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
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