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Ambala News: शिक्षक के प्रयास से बदला स्कूल का नक्शा
Sat, 05 Sep 2026 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 05 Sep 2026 01:49 AM IST
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प्रिंसिपल सुभाष शर्मा
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अंबाला। जहां चाह, वहां राह, इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है राजकीय विद्यालय, खुड्डा कलां के प्रिंसिपल सुभाष शर्मा ने। शिक्षा के क्षेत्र में उनके 27 वर्षों के अटूट समर्पण और स्कूल का कायाकल्प करने के ऐतिहासिक प्रयासों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने उन्हें राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना है। शनिवार को शिक्षक दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा जाएगा।
जब प्रिंसिपल सुभाष शर्मा ने खुड्डा कलां स्कूल की कमान संभाली थी, तब स्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण थीं। स्कूल के शौचालय जर्जर हालत में थे और मिड-डे मील की व्यवस्था भी बदहाल थी। उन्होंने छात्र-छात्राओं को एक स्वच्छ और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल देने के लिए उन्होंने सरकारी संसाधनों के भरोसे बैठने के बजाय नए रास्ते तलाशे। उन्होंने निजी कंपनियों से उनके कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड के तहत संपर्क साधा और गैर-सरकारी संगठनों को स्कूल से जोड़ा। जनसहयोग और अपने व्यक्तिगत प्रयासों के दम पर उन्होंने न केवल बदहाल शौचालयों का कायाकल्प कराया, बल्कि एक सुसज्जित मिड-डे मील शेड का निर्माण कराकर भोजन व्यवस्था को भी पूरी तरह हाइजीनिक बनाया।
यह पूरे स्टाफ और बच्चों के प्रयासों का फल
पुरस्कार की घोषणा पर अपनी खुशी साझा करते हुए प्रिंसिपल सुभाष शर्मा ने तस्वीरों के माध्यम से स्कूल में आए बुनियादी बदलावों को दिखाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग केवल अकादमिक नतीजों को नहीं, बल्कि स्कूल के समग्र विकास को देखता है। यह सम्मान मेरा अकेले का नहीं, बल्कि मेरे पूरे स्टाफ, सहयोगियों और बच्चों के साझे प्रयासों का परिणाम है। संवाद
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जब प्रिंसिपल सुभाष शर्मा ने खुड्डा कलां स्कूल की कमान संभाली थी, तब स्थितियां काफी चुनौतीपूर्ण थीं। स्कूल के शौचालय जर्जर हालत में थे और मिड-डे मील की व्यवस्था भी बदहाल थी। उन्होंने छात्र-छात्राओं को एक स्वच्छ और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल देने के लिए उन्होंने सरकारी संसाधनों के भरोसे बैठने के बजाय नए रास्ते तलाशे। उन्होंने निजी कंपनियों से उनके कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड के तहत संपर्क साधा और गैर-सरकारी संगठनों को स्कूल से जोड़ा। जनसहयोग और अपने व्यक्तिगत प्रयासों के दम पर उन्होंने न केवल बदहाल शौचालयों का कायाकल्प कराया, बल्कि एक सुसज्जित मिड-डे मील शेड का निर्माण कराकर भोजन व्यवस्था को भी पूरी तरह हाइजीनिक बनाया।
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यह पूरे स्टाफ और बच्चों के प्रयासों का फल
पुरस्कार की घोषणा पर अपनी खुशी साझा करते हुए प्रिंसिपल सुभाष शर्मा ने तस्वीरों के माध्यम से स्कूल में आए बुनियादी बदलावों को दिखाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग केवल अकादमिक नतीजों को नहीं, बल्कि स्कूल के समग्र विकास को देखता है। यह सम्मान मेरा अकेले का नहीं, बल्कि मेरे पूरे स्टाफ, सहयोगियों और बच्चों के साझे प्रयासों का परिणाम है। संवाद
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