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Ambala News: गांजा तस्करी के आरोपी सूरज को कोर्ट ने किया बरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 19 May 2026 03:22 AM IST
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Suraj, accused of ganja smuggling, acquitted by court
अंबाला सिटी। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत गठित फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने करीब 8 साल पुराने गांजा तस्करी के मामले में आरोपी डेहा बस्ती निवासी सूरज को संदेह का लाभ देते हुए मामले से बरी कर दिया है। पुलिस आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. अशोक कुमार की अदालत ने सुनाया।
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यह मामला 21 जून 2018 का है. सीआईए-2 अंबाला कैंट के एएसआई कुलविंदर सिंह की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि डेहा कॉलोनी का सूरज अपने एक साथी के साथ पल्सर मोटरसाइकिल पर नशीला पदार्थ लेकर आने वाला है. पुलिस ने जब सुभाष पार्क के पीछे नाकाबंदी की, तो बाइक सवार दो युवक पुलिस को देखकर यू-टर्न लेने लगे, लेकिन हड़बड़ाहट में बाइक गिर गई। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी तंग गलियों का फायदा उठाकर मौके से भागने में सफल रहे। मौके पर छोड़े गए प्लास्टिक के कट्टे की तलाशी लेने पर उसमें से 15 किलो 500 ग्राम गांजा बरामद हुआ था। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर बाद में आरोपी सूरज को गिरफ्तार किया था। अदालत ने अपने फैसले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन कारणों को रेखांकित किया जिसके चलते आरोपी को बरी किया गया। एनडीपीएस एक्ट की धारा 42(1) के तहत गुप्त सूचना को लिखित रूप में दर्ज करना अनिवार्य है। मुख्य जांच अधिकारी ने कोर्ट में ऐसा कोई सबूत नहीं दिया जिससे साबित हो कि सूचना लिखित में ली गई थी, जो कि केस के लिए घातक रहा। आरोपी को मौके से गिरफ्तार नहीं किया गया था। कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने आरोपी की टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं कराई। पहली रेडिंग पार्टी के अधिकारी भी कोर्ट में यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि भागने वाला व्यक्ति सूरज ही था और वह बाइक चला रहा था या पीछे बैठा था।
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तत्कालीन थाना प्रभारी विजय कुमार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि आरोपी को उनके सामने पेश नहीं किया गया। इस अंतर्विरोध ने पुलिस की कहानी की विश्वसनीयता खत्म कर दी। मामले में एफआईआर शाम 6:12 बजे दर्ज हुई थी, जबकि घटना स्थल का नक्शा शाम 5:30 बजे ही तैयार कर लिया गया। कोर्ट ने माना कि यह जांच प्रक्रिया पर गहरा संदेह पैदा करता है। नियमों के मुताबिक बरामद ड्रग्स के सैंपल को 72 घंटे के भीतर फॉरेंसिक साइंस लैबभेजना जरूरी होता है। इस मामले में सैंपल 22 जून को लिए गए और 26 जून को भेजे गए, जो कि तय समय सीमा के बाद था और पुलिस इस देरी की वजह नहीं बता सकी। पुलिस ने मौके पर किसी भी स्वतंत्र या स्थानीय गवाह को जांच में शामिल नहीं किया। ब्यूरो
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