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Ambala News: गन्ना पहुंचा गुड़ व्यापारियों के पास, इंतजार में मिल
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अंबाला। इस बार प्रदेश में गन्ना का अच्छी पैदावार हुई। यह गन्ना शुगर मिलों तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंचा। इसका असर ये हुआ कि मिलों के काम में तेजी नहीं आई। कई किसानों ने अपना गन्ना शुगर मिलों को देने के बजाय गुड़ बनाने वाले व्यापारियों को बेच दिया।
प्रदेश में गन्ना किसानों में चर्चा रही नारायणगढ़ के बनौंदी शुगर मिल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। यहां पर किसानों का करीब 33 करोड़ का बकाया था। उम्मीद थी कि गन्ना किसान गन्ना लाएंगे। इससे किसानों का बकाया भी चुकाया जाएगा। मगर जितनी तादाद में गन्ना आना था, वह नहीं आया। नारायणगढ़ शुगर मिल प्रशासन ने आठ करोड़ रुपये का किसानों का बकाया चुकाया है। अभी करीब 24 करोड़ रुपये का भुगतान शेष है। मिल प्रशासन का कहना है कि इसको चुकता करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
गुड़ व्यापारी कर रहे नकद भुगतान
नारायणगढ़ शुगर मिल प्रशासन ने जब पता किया तो पता लगा कि गन्ना की इस बार पैदावार अच्छी हुई है मगर इसके सापेक्ष गन्ना मिल तक नहीं आ रहा है। ऐसे पर पता चला कि गन्ना गुड़ व्यापारियों द्वारा खरीदा जा रहा है। यह स्थिति नारायणगढ़ शुगर मिल के साथ ही नहीं बल्कि अन्य शुगर मिलों के सामने भी आई है। इसके पीछे कारण था कि किसानों को त्वरित भुगतान चाहिए होता है और गुड़ बनाने वाले व्यापारी उन्हें तत्काल भुगतान कर रहे हैं। जबकि शुगर मिल को गन्ना देने पर किसानों का भुगतान फंस जाता है। इस कारण से इस बार मिल को गन्ना देने में किसानों ने कम रुचि दिखाई है। जबकि बाजार में गुड़ और चीनी के दाम देखे जाएं तो इस बार दोनों ने अच्छा उछलान आया है। इस बार नारायाणगढ़ शुगर मिल के पास करीब 40 लाख टन गन्ना आया है।
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अगस्त में सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
एक तरफ से शुगर मिल प्रशासन गन्ना किसानों के बकाया को कम करने में जुटा है। दूसरी तरफ शुगर मिल की कुर्की से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अभी तक हुई सुनवाई में नारायणगढ़ शुगर मिल प्रशासन और गन्ना किसानों की यूनियन की तरफ से अपने-अपने पक्ष रख दिए हैं ताकि मिल की कुर्की न हो और लोकहित में किसानों को राहत दी जा सके। अब कोर्ट ने अगली सुनवाई अगस्त माह में कर दी है। ऐसे में आगामी समय में काेर्ट में क्या निर्णय होता है इसकी तैयारियों में सभी एजेंसियां जुटी हुई हैं।
वर्जन
हमने किसानों के कुल बकाया में से आठ करोड़ रुपये चुकाए हैं। इस बार गन्ना कम आया है। कोशिश है कि किसानों की समस्या का जल्द समाधान किया जाए।
-यश जालुका, एसडीएम नारायणगढ़ व सीईओ, नारयणगढ़ शुगर मिल
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प्रदेश में गन्ना किसानों में चर्चा रही नारायणगढ़ के बनौंदी शुगर मिल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। यहां पर किसानों का करीब 33 करोड़ का बकाया था। उम्मीद थी कि गन्ना किसान गन्ना लाएंगे। इससे किसानों का बकाया भी चुकाया जाएगा। मगर जितनी तादाद में गन्ना आना था, वह नहीं आया। नारायणगढ़ शुगर मिल प्रशासन ने आठ करोड़ रुपये का किसानों का बकाया चुकाया है। अभी करीब 24 करोड़ रुपये का भुगतान शेष है। मिल प्रशासन का कहना है कि इसको चुकता करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
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गुड़ व्यापारी कर रहे नकद भुगतान
नारायणगढ़ शुगर मिल प्रशासन ने जब पता किया तो पता लगा कि गन्ना की इस बार पैदावार अच्छी हुई है मगर इसके सापेक्ष गन्ना मिल तक नहीं आ रहा है। ऐसे पर पता चला कि गन्ना गुड़ व्यापारियों द्वारा खरीदा जा रहा है। यह स्थिति नारायणगढ़ शुगर मिल के साथ ही नहीं बल्कि अन्य शुगर मिलों के सामने भी आई है। इसके पीछे कारण था कि किसानों को त्वरित भुगतान चाहिए होता है और गुड़ बनाने वाले व्यापारी उन्हें तत्काल भुगतान कर रहे हैं। जबकि शुगर मिल को गन्ना देने पर किसानों का भुगतान फंस जाता है। इस कारण से इस बार मिल को गन्ना देने में किसानों ने कम रुचि दिखाई है। जबकि बाजार में गुड़ और चीनी के दाम देखे जाएं तो इस बार दोनों ने अच्छा उछलान आया है। इस बार नारायाणगढ़ शुगर मिल के पास करीब 40 लाख टन गन्ना आया है।
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अगस्त में सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
एक तरफ से शुगर मिल प्रशासन गन्ना किसानों के बकाया को कम करने में जुटा है। दूसरी तरफ शुगर मिल की कुर्की से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। अभी तक हुई सुनवाई में नारायणगढ़ शुगर मिल प्रशासन और गन्ना किसानों की यूनियन की तरफ से अपने-अपने पक्ष रख दिए हैं ताकि मिल की कुर्की न हो और लोकहित में किसानों को राहत दी जा सके। अब कोर्ट ने अगली सुनवाई अगस्त माह में कर दी है। ऐसे में आगामी समय में काेर्ट में क्या निर्णय होता है इसकी तैयारियों में सभी एजेंसियां जुटी हुई हैं।
वर्जन
हमने किसानों के कुल बकाया में से आठ करोड़ रुपये चुकाए हैं। इस बार गन्ना कम आया है। कोशिश है कि किसानों की समस्या का जल्द समाधान किया जाए।
-यश जालुका, एसडीएम नारायणगढ़ व सीईओ, नारयणगढ़ शुगर मिल