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छात्रों को वैदिक ज्ञान से कराया अवगत
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अंबाला शहर स्थित पुलिस डीएवी पब्लिक स्कूल में सात दिवसीय एन एसएस कैंप में भाग लेते विद्यार्थी
- फोटो : Ambala
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अंबाला सिटी। पुलिस डीएवी पब्लिक स्कूल में सात दिवसीय एनएसएस शिविर का शुभारंभ किया गया। प्रथम दिन स्वयंसेवकों ने रेलवे रोड स्थित आर्य समाज में श्रमदान किया। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य डॉ. विकास कोहली ने छात्रों को वैदिक ज्ञान से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि वेदों में एक निराकार और सर्वव्यापक परमात्मा है। उसके गुणों के अनेक नाम बताए गए हैं।
उन्होंने कहा कि ईश्वर का प्रत्येक नाम ईश्वर के गुणों को प्रतिपादित करता है। केवल चित्रों मूर्तियों या थाली में जलती धूपबत्ती को मत्था टेकने का नाम पूजा करना नहीं है। पूजा का अर्थ महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्योद्देश्यरत्नमाला में इस प्रकार लिखा है जो ज्ञान आदि गुण वाले का यथायोग्य सत्कार करना है, उसको पूजा कहते हैं। आज जो कुछ दिखावे के लिए हो रहा है वह पूजा नहीं है। आर्य कमलेश शास्त्री ने कहा कि मन, वचन और कर्म का घनिष्ठ संबंध है, मन में जैसे विचार उठते हैं वहीं हमारी वाणी के द्वारा प्रकट होते हैं और उन्हीं के अनुसार हमारे कर्म होते हैं।
उन्हीं कर्मों का फल भी देर सबेर हमें भोगना पड़ता है, ज्ञानेन्द्रियां तथा कर्मेंद्रियां दोनों के साथ संपर्क रहने से मन की स्थिति सर्वोपरि है। कोई भी इन्द्रिय मन के सहयोग के बिना कार्य में प्रवृत्त नहीं हो सकती। इस चंचल मन को वश में रखना दृढ़ आत्मबल के द्वारा ही संभव है। पल-पल ही यह मन इधर-उधर भागता फिरता है और इसे कठोरता पूर्वक एक स्थान पर टिकाकर रखना ही आध्यात्मिक जीवन का मूल आधार है। गुलशन चांदना ने कविता के द्वारा छात्रों का उत्साहवर्धन किया। इसके उपरांत विद्यार्थियों ने आर्य समाज रेलवे रोड अंबाला शहर में जाकर श्रमदान किया। इसमें विद्यालय के 50 छात्रों ने भाग लिया। इस अवसर पर उनके एनएसएस इंचार्ज पंकज सूरी के मार्गदर्शन में विद्यालय व आर्यसमाज में सफाई का कार्य किया गया।
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उन्होंने कहा कि ईश्वर का प्रत्येक नाम ईश्वर के गुणों को प्रतिपादित करता है। केवल चित्रों मूर्तियों या थाली में जलती धूपबत्ती को मत्था टेकने का नाम पूजा करना नहीं है। पूजा का अर्थ महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्योद्देश्यरत्नमाला में इस प्रकार लिखा है जो ज्ञान आदि गुण वाले का यथायोग्य सत्कार करना है, उसको पूजा कहते हैं। आज जो कुछ दिखावे के लिए हो रहा है वह पूजा नहीं है। आर्य कमलेश शास्त्री ने कहा कि मन, वचन और कर्म का घनिष्ठ संबंध है, मन में जैसे विचार उठते हैं वहीं हमारी वाणी के द्वारा प्रकट होते हैं और उन्हीं के अनुसार हमारे कर्म होते हैं।
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उन्हीं कर्मों का फल भी देर सबेर हमें भोगना पड़ता है, ज्ञानेन्द्रियां तथा कर्मेंद्रियां दोनों के साथ संपर्क रहने से मन की स्थिति सर्वोपरि है। कोई भी इन्द्रिय मन के सहयोग के बिना कार्य में प्रवृत्त नहीं हो सकती। इस चंचल मन को वश में रखना दृढ़ आत्मबल के द्वारा ही संभव है। पल-पल ही यह मन इधर-उधर भागता फिरता है और इसे कठोरता पूर्वक एक स्थान पर टिकाकर रखना ही आध्यात्मिक जीवन का मूल आधार है। गुलशन चांदना ने कविता के द्वारा छात्रों का उत्साहवर्धन किया। इसके उपरांत विद्यार्थियों ने आर्य समाज रेलवे रोड अंबाला शहर में जाकर श्रमदान किया। इसमें विद्यालय के 50 छात्रों ने भाग लिया। इस अवसर पर उनके एनएसएस इंचार्ज पंकज सूरी के मार्गदर्शन में विद्यालय व आर्यसमाज में सफाई का कार्य किया गया।
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