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Ambala News: हादसों से टूटती है नींद, चंद दिनों बाद हालात जस के तस
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अंबाला सिटी। स्कूल बस हादसा होने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की निजी स्कूल बसों के नियमों की पालना कराने की नींद खुलती है। वे कहते हैं कि हर महीने स्कूल बसों की जांच होती है, मगर इसके बाद भी बसों में कमियां मिल रही है।
ज्यादातर बसों में सीसीटीवी नहीं चलते। कई बसों के टायर भी घिसे होते हैं। स्पीड गवर्नर काम नहीं करते। हादसा होने के कुछ दिनों तक नियमों का हवाला दिया जाता है, लेकिन लगातार इन नियमों की पालना कराने के लिए निर्देश नहीं दिए जाते। इस कारण हादसे होते हैं। इसी तरह निजी ऑटो और वैन भी स्कूलों में बच्चों को लेकर पहुंचती हैं।
2012 में हुआ था हादसा
अंबाला में साहा-शाहबाद रोड पर 2 जनवरी 2012 में एक स्कूली बस हादसा हुआ था। इसमें 11 बच्चों समेत 12 की जान चली गई थी और कई घायल हुए थे। इसके बाद स्कूलों में नियम पूरे करने के लिए अभियान चला था। 2014 में सरकार ने सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी लागू की थी। इस पॉलिसी में करीब 21 प्वाइंट हैं। इन प्वाइंट को स्कूलों को पूरा करना होता है, लेकिन ज्यादातर स्कूल इस पॉलिसी के प्वाइंट को पूरा नहीं करते। वहीं, ट्रैफिक प्रभारी जोगिंद्र सिंह ने बताया कि हर महीने निजी स्कूलों की चेकिंग की जाती है। इसमें दूसरी विभागों से भी अधिकारी शामिल होते हैं। नियम पूरा न करने वाली स्कूल बसों के चालान भी किए जाते हैं। बीते दिनों बसों को इंपाउंड भी किया था। अभी स्कूल बसों की चेकिंग नहीं की जा रही है। नियम पूरे करने के लिए समय दिया गया है।
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अभी 25 तक चलेगी जांच
बीते 15 से 25 अप्रैल तक निजी स्कूल बसों की जांच की जाएगी। यह जांच उपमंडल स्तरीय कमेटी एसडीएम के नेतृत्व में चल रही है। कमेटी में एसडीएम, खंड शिक्षा अधिकारी, आरटीए, स्वास्थ्य विभाग, रोडवेज कार्यालय से अधिकारी भी शामिल हैं। यह कमेटी स्कूलों में जाकर बसों को चेक कर रही है। अभी स्कूलों को नियम पूरे करने के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं।
वर्जन
निजी स्कूल बसों की 25 अप्रैल तक चेकिंग की जाएगी। चेकिंग करने के साथ कमियां मिलने पर स्कूलों को नियम पूरे करने के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं। जो स्कूल समयावधि के बाद भी नियम पूरा नहीं करेंगे, उनके ऊपर कार्रवाई की जाएगी। उनके लिए बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
सुरेश कुमार , जिला शिक्षा अधिकारी, अंबाला।
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ज्यादातर बसों में सीसीटीवी नहीं चलते। कई बसों के टायर भी घिसे होते हैं। स्पीड गवर्नर काम नहीं करते। हादसा होने के कुछ दिनों तक नियमों का हवाला दिया जाता है, लेकिन लगातार इन नियमों की पालना कराने के लिए निर्देश नहीं दिए जाते। इस कारण हादसे होते हैं। इसी तरह निजी ऑटो और वैन भी स्कूलों में बच्चों को लेकर पहुंचती हैं।
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2012 में हुआ था हादसा
अंबाला में साहा-शाहबाद रोड पर 2 जनवरी 2012 में एक स्कूली बस हादसा हुआ था। इसमें 11 बच्चों समेत 12 की जान चली गई थी और कई घायल हुए थे। इसके बाद स्कूलों में नियम पूरे करने के लिए अभियान चला था। 2014 में सरकार ने सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी लागू की थी। इस पॉलिसी में करीब 21 प्वाइंट हैं। इन प्वाइंट को स्कूलों को पूरा करना होता है, लेकिन ज्यादातर स्कूल इस पॉलिसी के प्वाइंट को पूरा नहीं करते। वहीं, ट्रैफिक प्रभारी जोगिंद्र सिंह ने बताया कि हर महीने निजी स्कूलों की चेकिंग की जाती है। इसमें दूसरी विभागों से भी अधिकारी शामिल होते हैं। नियम पूरा न करने वाली स्कूल बसों के चालान भी किए जाते हैं। बीते दिनों बसों को इंपाउंड भी किया था। अभी स्कूल बसों की चेकिंग नहीं की जा रही है। नियम पूरे करने के लिए समय दिया गया है।
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अभी 25 तक चलेगी जांच
बीते 15 से 25 अप्रैल तक निजी स्कूल बसों की जांच की जाएगी। यह जांच उपमंडल स्तरीय कमेटी एसडीएम के नेतृत्व में चल रही है। कमेटी में एसडीएम, खंड शिक्षा अधिकारी, आरटीए, स्वास्थ्य विभाग, रोडवेज कार्यालय से अधिकारी भी शामिल हैं। यह कमेटी स्कूलों में जाकर बसों को चेक कर रही है। अभी स्कूलों को नियम पूरे करने के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं।
वर्जन
निजी स्कूल बसों की 25 अप्रैल तक चेकिंग की जाएगी। चेकिंग करने के साथ कमियां मिलने पर स्कूलों को नियम पूरे करने के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं। जो स्कूल समयावधि के बाद भी नियम पूरा नहीं करेंगे, उनके ऊपर कार्रवाई की जाएगी। उनके लिए बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
सुरेश कुमार , जिला शिक्षा अधिकारी, अंबाला।