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स्कूल बस के बोनट में हुआ शॉट सर्किट, हादसा टला
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अंबाला सिटी। महेशनगर के साकेत अस्पताल के पास बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहां बच्चों को ले जा रही एक निजी स्कूल के बोनट में शॉर्ट सर्किट हो गया। इसके बाद बोनट से धुआं निकलने लगा तो चालक ने बस को साइड में लगाया और सभी बच्चों को नीचे उतारा। मौके पर ही चालक और उनके साथी ने आग लगने से पहले ही स्थिति संभाल ली।
जानकारी के अनुसार जिस समय बोनट से धुआं निकल रहा था उस समय बस में करीब 7 से 8 बच्चे थे। स्थिति संभालने के बाद सभी बच्चों को दूसरी बस से आगे रवाना किया। वहीं ट्रांसपोर्टर अमृतपाल ने बताया कि यह शॉर्ट सर्किट था। उन्होंने अपने स्कूल की सभी बसों में नियमानुसार व्यवस्था की हुई है।
स्कूली बसों की होती है जांच, प्राइवेट गाड़ियों की ओर नहीं जाता ध्यान
प्रतिदिन सैकड़ों निजी वाहनों में हजारों विद्यार्थी सफर करते है। इस दौरान शिक्षा विभाग की ओर से स्कूली बसों की समय-समय पर व्यवस्था जांच ली जाती है, परंतु उन निजी गाड़ियों और ऑटो की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। इस कारण पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। शिक्षा विभाग और ट्रैफिक विभाग की ओर से इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है जोकि आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए घातक साबित हो सकता है।
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हमारी ओर से समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। जिन ऑटो वालों ने ज्यादा बच्चे बिठाए होते हैं, उनके चालान किए जाते हैं। भविष्य में भी ओवरलोड ऑटो व गाड़ी चालकों के चालान करने का काम किया जाएगा।
- जोगिंद्र सिंह, एसएचओ, ट्रैफिक विभाग।
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जानकारी के अनुसार जिस समय बोनट से धुआं निकल रहा था उस समय बस में करीब 7 से 8 बच्चे थे। स्थिति संभालने के बाद सभी बच्चों को दूसरी बस से आगे रवाना किया। वहीं ट्रांसपोर्टर अमृतपाल ने बताया कि यह शॉर्ट सर्किट था। उन्होंने अपने स्कूल की सभी बसों में नियमानुसार व्यवस्था की हुई है।
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स्कूली बसों की होती है जांच, प्राइवेट गाड़ियों की ओर नहीं जाता ध्यान
प्रतिदिन सैकड़ों निजी वाहनों में हजारों विद्यार्थी सफर करते है। इस दौरान शिक्षा विभाग की ओर से स्कूली बसों की समय-समय पर व्यवस्था जांच ली जाती है, परंतु उन निजी गाड़ियों और ऑटो की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। इस कारण पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। शिक्षा विभाग और ट्रैफिक विभाग की ओर से इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है जोकि आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए घातक साबित हो सकता है।
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हमारी ओर से समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। जिन ऑटो वालों ने ज्यादा बच्चे बिठाए होते हैं, उनके चालान किए जाते हैं। भविष्य में भी ओवरलोड ऑटो व गाड़ी चालकों के चालान करने का काम किया जाएगा।
- जोगिंद्र सिंह, एसएचओ, ट्रैफिक विभाग।