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Ambala News: शर्मा परिवार को कालका भेज सिटी में असीम के लिए बनाया रास्ता

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 05 Sep 2024 05:19 AM IST
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Sharma family was sent to Kalka and a way was made for Aseem in the city
अंबाला। भाजपा ने अंबाला की चार विधानसभा सीटों में से तीन पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। टिकटों में फेरबदल की चर्चा थी, लेकिन पार्टी ने विधायकों और नेताओं पर ही भरोसा जताना उचित समझा। अभी हाल ही में भाजपा में शामिल हुई मेयर शक्तिरानी शर्मा को कालका से उम्मीदवार बनाया है।
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इस मामले में भाजपा ने एक तीर से दो निशाने साधने का काम किया। पार्टी ने शर्मा परिवार को कालका भेजकर मौजूदा राज्यमंत्री असीम गोयल के लिए सिटी में विधानसभा का रास्ता साफ कर दिया। पार्टी ने असीम को सिटी से उम्मीदवार घोषित किया है। कुछ समय से नाराज नजर आ रहे अनिल विज पर भी पार्टी ने भरोसा जताया है। अनिल विज ने जोरदार वापसी की है। पहले चुनाव समिति के सदस्य बने अब टिकट लाकर उन्होंने अपनी ताकत फिर से दिखा दी है।
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विज छावनी विधानसभा से छह बार विधायक रह चुके हैं। मुलाना आरक्षित सीट पर भाजपा ने पूर्व मंत्री संतोष सारवान पर दांव खेला है। बताया जाता है कि संतोष सारवान सीएम नायब सैनी के नजदीकी हैं और लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के लिए काफी ताकत लगाई थी। उसी का फल उन्हें टिकट के रूप में मिला है।
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सबसे रोचक बात यह है कि नारायणगढ़ विधानसभा जहां से खुद सीएम नायब सैनी आते हैं। वहां के उम्मीदवार पर पार्टी अभी तक असमंजस में है और कोई निर्णय नहीं ले पाई है। लोकसभा चुनाव में नारायणगढ़ विधानसभा में भाजपा काफी अंतर से हारी थी। इसलिए विधानसभा चुनाव में पार्टी वहां कोई जोखिम नहीं उठाया।
अपने दम पर टिकट लाए विज
अनिल विज प्रदेश में पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं। वे छह बार विधायक रह चुके हैं। कुछ महीने पहले तक वह गृह मंत्रालय भी संभाल रहे थे। जैसी वर्किंग उनकी गृह मंत्रालय संभालने के दौरान रही, वह जनता को पसंद आई। लोकसभा चुनाव से पहले सीएम बदले जाने से वे कुछ नाराज नजर आए। इसके बावजूद उन्होंने अपने दम पर लोकसभा चुनाव में पार्टी को अंबाला कैंट विधानसभा में जिताने का काम किया।

असीम पर फिर भरोसा जताने के कारण
सिटी से विधायक असीम गोयल भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। पुराने समय से पार्टी से जुड़े हैं। वहीं, वैश्य समाज का प्रदेश में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी को शहर बुलाकर अपनी ताकत दिखाई थी। राजस्थान चुनाव में भी उन्हें पूरे जोन का प्रभारी बनाया था। वहां भी उन्होंने कमल को खिलाने का काम किया था।

सारवान इसलिए पड़ी सब पर भारी
संतोष सारवान पुरानी भाजपा नेत्री हैं। वह मंत्री और विधायक के पद पर रह चुकी हैं। मुलाना विधानसभा क्षेत्र में एससी वर्ग पर अच्छी पकड़ है। अभी हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी के निर्देशानुसार ग्राउंड पर मेहनत की थी। भाजपा के दूसरे दावेदार राजबीर बराड़ा पिछली बार वरुण मुलाना से चुनाव हार गए थे। इसका भी फायदा उन्हें मिला है।



नारायणगढ़ में इसलिए फंसा पेंच
नारायगणढ़ विधानसभा में भाजपा ने पत्ते नहीं खोले हैं। यहां पेंच फंसता दिखाई दे रहा है, क्योंकि लोकसभा चुनाव में अंबाला जिले की चार सीटों में से तीन पर भाजपा चुनाव हारी थी, सिर्फ अंबाला छावनी में ही जीत मिल सकी थी। वहीं, सबसे हैरानी की बात तो यह थी कि नायब सैनी के सीएम बनने के बाद सभी की नजर यहीं थी। मगर उस हिसाब से चुनाव परिणाम ठीक नहीं रहे। खुद सीएम के गांव के बूथ से भाजपा को अधिक फायदा नहीं मिला। नारायणगढ़ में मौजूदा समय में कांग्रेस से शैली चौधरी विधायक हैं, उनका तोड़ निकालने के लिए भाजपा संघर्ष कर रही है।
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