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शहजादपुर के न्यायधीश कपिल मित्तल, पंश्चिम बंगाल में दिलवाएंगे लोगों को इंसाफ
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न्यायाधीश कपिल मोहन मित्तल परिवार के साथ।
- फोटो : Ambala
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अंबाला सिटी। शहजादपुर के कपिल मोहन मित्तल पश्चिम बंगाल के जिला हावड़ा में स्थित सत्र न्यायालय में जज बन गए हैं। सोमवार को उन्होंने पदभार ग्रहण किया। उनकी नियुक्ति से उनके परिवार में खुशी की लहर है। परिजनों ने एक दूसरे का मुंह मीठा करवाकर इस खुशी को मनाया।
न्यायाधीश के पिता अजीत कुमार शास्त्री ने बताया कि कपिल ने प्रारंभिक शिक्षा शहजादपुर के ही सरकारी स्कूल से ग्रहण की है। इसके बाद उन्होंने एलएलबी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से और एलएलएम की पढ़ाई एएनआईटीवाई गुरुग्राम से पूरी की। यूजीसी नेट की परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण करने के बाद वे ज्यूडीशियरी की परीक्षा की तैयारी में जुट गए। 2020 में पश्चिम बंगाल में न्यायाधीश के लिए हुई परीक्षा को उत्तीर्ण कर लिया। कोविड के परीक्षा परिणाम में देरी के बाद अब उन्हें 30 मई को पदभार ग्रहण करवाया गया है। बता दें कि उनके परिवार में उनके पिता, माता स्नेह लता और तीन बहनें जिसमें उमा, निधी और छोटी बहन बिंदू है। जो भाई की इस उपलब्धि पर बहुत अधिक खुश है।
न्यायाधीश कपिल मोहन मित्तल ने बताया कि न्यायाधीश बनते ही उनका मुख्य उदेश्य न्याय व्यवस्था के द्वारा समाज में सुधार लाना है और इस माध्यम से उन्होंने अपने पिता के सपने का साकार किया है। उनका कहना है वह न्याय व्यवस्था में भाग लेकर बिना किसी भेदभाव के लोगों कि समस्या का समाधान कर सकेंगे और यह समाज के लिए एक बहुत बड़ा योगदान है।
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न्यायाधीश के पिता अजीत कुमार शास्त्री ने बताया कि कपिल ने प्रारंभिक शिक्षा शहजादपुर के ही सरकारी स्कूल से ग्रहण की है। इसके बाद उन्होंने एलएलबी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से और एलएलएम की पढ़ाई एएनआईटीवाई गुरुग्राम से पूरी की। यूजीसी नेट की परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण करने के बाद वे ज्यूडीशियरी की परीक्षा की तैयारी में जुट गए। 2020 में पश्चिम बंगाल में न्यायाधीश के लिए हुई परीक्षा को उत्तीर्ण कर लिया। कोविड के परीक्षा परिणाम में देरी के बाद अब उन्हें 30 मई को पदभार ग्रहण करवाया गया है। बता दें कि उनके परिवार में उनके पिता, माता स्नेह लता और तीन बहनें जिसमें उमा, निधी और छोटी बहन बिंदू है। जो भाई की इस उपलब्धि पर बहुत अधिक खुश है।
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न्यायाधीश कपिल मोहन मित्तल ने बताया कि न्यायाधीश बनते ही उनका मुख्य उदेश्य न्याय व्यवस्था के द्वारा समाज में सुधार लाना है और इस माध्यम से उन्होंने अपने पिता के सपने का साकार किया है। उनका कहना है वह न्याय व्यवस्था में भाग लेकर बिना किसी भेदभाव के लोगों कि समस्या का समाधान कर सकेंगे और यह समाज के लिए एक बहुत बड़ा योगदान है।
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