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Ambala News: स्क्रैप के ट्रकों को बिना जीएसटी निकालने के मिलते थे निर्देश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Feb 2023 12:27 AM IST
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Scrap trucks were given instructions without extracting GST
अंबाला। आबकारी और कराधान विभाग में वर्ष 2020 के आखिरी महीनों से ही काफी उथल-पुथल चल रही थी। चेकिंग के लिए टीमें लगाई जाती, मगर टीमों के हाथ भी बांध दिए जाते थे। मजबूरन रोड साइड पर जांच में लगी विभागीय टीमों में शामिल अधिकारियों को मुख्यालय से मिले निर्देश के बाद वाहनों को बिना जुर्माना छोड़ना पड़ता था। ऐसी जीटी बेल्ट के जिलों में चेकिंग दलों को काफी देखने को मिला। दरअसल पंजाब के गोबिंदगढ़ लोहा मंडी काफी बड़ी है। यहीं से लोहे के दाम भी तय होते हैं। ऐसे में अगर राजस्थान, उत्तर प्रदेश या हरियाणा के किसी भी हिस्से से स्क्रैप की गाड़ियों को जाना होता तो वह जीटी रोड बेल्ट से ही होकर गुजरती। सूत्रों की मानें तो यहां कई बार चेकिंग दलों को पंजाब की मंडी गोबिंदगढ़ में माल ले जा रहे ट्रांसपोर्टरों को छोड़ना होता था। इसके लिए पहले ही दिल्ली की ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन आरोप लगा चुकी थी। इस पर कभी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। ऐसे में इन सवालों को लेकर जांच होगी तभी स्थिति सामने आ सकती है। वहीं संभावना है कि एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम इन कड़ियों को भी अपनी जांच में शामिल कर सकती है।
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स्क्रैप पर जीएसटी से होता बड़ा मुनाफा
दरअसल हरियाणा को तीन रूटों में बांटा था। इसमें से एक रूट जीटी रोड बेल्ट के शहरों का था। हर रूट पर ऐसा ही माल चुना, जिस पर अधिक मुनाफा हो। जैसे दिल्ली, गुरुग्राम, रेवाड़ी और जयपुर रूट पर पान मसाला, बीड़ी, तंबाकू और सिगरेट को चुना था। इन उत्पादों के चार डिब्बे भी मिल जाएं तो लाखों में जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, जीटी रोड बेल्ट से स्क्रैप के ट्रक अधिकतर पास कराए जाते थे, क्योंकि स्क्रैप पर 18 फीसद जीएसटी लगता था। ऐसे में एक ट्रक भी पास हुआ तो राजस्व की बड़ी बचत ट्रांसपोर्टर कर लेते थे। अब यह गाड़ियां पास होने के बाद इसका हिस्सा कहां-कहां जाता था यह जांच का विषय है।
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लगाई जा रही थी मौखिक चेकिंग ड्यूटी
खास बात है कि प्रतिनियुक्ति पर गए आईआरएस अधिकारी धीरज गर्ग ने सभी जेईटीसी, डीईटीसी और ईटीओ की चेकिंग शक्तियों को समाप्त कर दिया था। इसके साथ ही उस आदेश में था कि अगर कहीं से टैक्स चोरी से जुड़ा इनपुट मिलता है तो वह उनके साथ साझा किया जाएगा। तभी से सभी आबकारी और कराधान विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए थे, क्योंकि अब उन्हें चेकिंग की पावर ही नहीं थी।
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सूत्र बताते हैं जीटी रोड बेल्ड पर एक जिला का डीईटीसी शक्तियां न होने पर भी एईटीओ की मौखिक रूप से ड्यूटी लगाकर चैकिंग करा रहे था। जबकि दूसरे डीईटीसी कार्रवाई होने के डर से शांत थे। ऐसे में यह मामला अभी काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। एईटीओ की ड्यूटी रोस्टर के हिसाब से मुख्यालय से आईआरएस धीरज गर्ग खुद ही लगाते थे। मगर जिस अधिकारी का रोस्टर खत्म होता उसे दोबारा से यह डीईटीसी अपने स्तर भेजकर रोड साइड चैकिंग करा रहा था।
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