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स्कूलों में अनिवार्य होनी चाहिए संस्कृत: विज
ब्यूूराे/अमर उजाला अंबाला
Updated Tue, 09 Jun 2015 01:03 AM IST
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हरियाणा स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि वो हरियाणा में संस्कृत भाषा को शिक्षा में अनिवार्य करवाने के लिए अपने प्रयास तेज करेंगे व इस बारे मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से परामर्श करेंगे।
मीडिया से बात करते हुए विज ने कहा कि जिस भाषा ने हमें जीना सिखाया हमें अन्य भाषाओं के बारे में जानकारी दी, उसी भाषा को आज हम भूल रहे हैं। उनका कहना था कि अब ऐसा नहीं होगा संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए नई मुहिम की शुरुआत की जाएगी।
अनिल विज ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि पूरे विश्व में विशेषकर हिंदू धर्म में जितने भी ग्रंथों बारे जगह-जगह चर्चा की जाती है, वो सभी संस्कृत भाषा की ही देन हैं।
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यदि संस्कृत न होती तो मानव जाति का अस्तित्व ही न होता। उन्होंने कहा कि आज एक बात सभी जानते हैं कि इंगलिश बोलने वाले को लोग सबसे ज्यादा होनहार मानते हैं ये हमारे देश का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है। आज जो व्यक्ति हिंदी की उपेक्षा कर अंग्रेजी को बढ़ावा देता है वो अच्छे संस्कार का नहीं है।
अनिल विज ने कहा कि यदि बच्चों को स्कूल शिक्षा के साथ ही संस्कृत की शिक्षा अनिवार्य कर दी गई तो आगे चल कर वो अच्छा ज्ञानी ही बनेगा, जिसे दीन दुनिया के ज्ञान के अलावा एक अलग ज्ञान भी होगा। विज ने कहा कि हमें अपनी भाषा को नहीं छोड़ना चाहिए।
उनके अनुसार आज देश के प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की भी यही सोच है कि किसी तरीके से हिंदी भाषा को सबसे आगे लाया जाए, ताकि देश में एक भाषा का रूप चल पाए।
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मीडिया से बात करते हुए विज ने कहा कि जिस भाषा ने हमें जीना सिखाया हमें अन्य भाषाओं के बारे में जानकारी दी, उसी भाषा को आज हम भूल रहे हैं। उनका कहना था कि अब ऐसा नहीं होगा संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए नई मुहिम की शुरुआत की जाएगी।
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अनिल विज ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि पूरे विश्व में विशेषकर हिंदू धर्म में जितने भी ग्रंथों बारे जगह-जगह चर्चा की जाती है, वो सभी संस्कृत भाषा की ही देन हैं।
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यदि संस्कृत न होती तो मानव जाति का अस्तित्व ही न होता। उन्होंने कहा कि आज एक बात सभी जानते हैं कि इंगलिश बोलने वाले को लोग सबसे ज्यादा होनहार मानते हैं ये हमारे देश का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या है। आज जो व्यक्ति हिंदी की उपेक्षा कर अंग्रेजी को बढ़ावा देता है वो अच्छे संस्कार का नहीं है।
अनिल विज ने कहा कि यदि बच्चों को स्कूल शिक्षा के साथ ही संस्कृत की शिक्षा अनिवार्य कर दी गई तो आगे चल कर वो अच्छा ज्ञानी ही बनेगा, जिसे दीन दुनिया के ज्ञान के अलावा एक अलग ज्ञान भी होगा। विज ने कहा कि हमें अपनी भाषा को नहीं छोड़ना चाहिए।
उनके अनुसार आज देश के प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की भी यही सोच है कि किसी तरीके से हिंदी भाषा को सबसे आगे लाया जाए, ताकि देश में एक भाषा का रूप चल पाए।