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धूल फांक रही एंबुलेंस में तब्दील रोडवेज की गुलाबी बसें
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Roadways pink buses turned into dusty ambulances
- फोटो : Ambala
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अंबाला। कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर के चलते एंबुलेंस में तब्दील की गई गुलाबी मिनी बसें रोडवेज डिपो में धूल फांक रही हैं। न तो इन बसों को एंबुलेंस के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है और न ही यात्री सुविधाओं के लिए, वहीं आगामी कार्रवाई के लिए विभाग को मुख्यालय के आदेशों का इंतजार है।
लगभग 3 महीने पहले मई माह में जब कोरोना की दूसरी लहर काफी प्रचंड हो गई थी और कोरोना केसों में भी काफी बढ़ोतरी हो गई थी तो ट्रांसपोर्ट मुख्यालय के आदेशों पर गुलाबी मिनी बसों को एंबुलेंस के तौर पर इस्तेमाल करने की प्रक्रिया शुरू की गई। रोडवेज बेड़े में शामिल पांच गुलाबी बसों की सीटें निकालकर इन्हें एंबुलेंस का रूप दिया गया ताकि कोरोना मरीजों को एंबुलेंस के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े।
इन बसों में स्ट्रेचर, कुर्सी, ऑक्सीजन सिलिंडर सहित प्राथमिक चिकित्सा की सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई थी, ताकि जरूरत पड़ने पर इनका प्रयोग किया जा सके। इसके बाद सरकार ने लॉकडाउन लगा दिया और संक्रमितों की संख्या भी धीरे-धीरे कम होने लगी। मौजूदा समय में जिले में सिर्फ 6 ही कोरोना एक्टिव मरीज हैं, जिनका उपचार चल रहा है। इस कारण आजतक इन एंबुलेंस का प्रयोग करने की नौबत नहीं आई। स्थिति सामान्य होने के बाद जून महीने में स्वास्थ्य विभाग ने गुलाबी बसों को डिपो को लौटा दिया। पिछले एक महीने से यह बसें वर्कशॉप परिसर में खड़ी धूल फांक रही हैं। रूट पर नहीं चलने के कारण यात्रियों को भी इनका फायदा नहीं मिल पा रहा।
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कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए अभी इन बसों में सीटें न लगाने के निर्देश हैं ताकि इमरजेंसी के रूप में इन मोबाइल एंबुलेंस को प्रयोग में लाया जा सके। इसलिए फिलहाल इन बसों को यूं ही खड़ा किया है। आगामी जो भी आदेश आएंगे, उसके तहत कार्रवाई की जाएगी।
-शमशेर सिंह, ड्यूटी इंचार्ज, वर्कशॉप, अंबाला डिपो।
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लगभग 3 महीने पहले मई माह में जब कोरोना की दूसरी लहर काफी प्रचंड हो गई थी और कोरोना केसों में भी काफी बढ़ोतरी हो गई थी तो ट्रांसपोर्ट मुख्यालय के आदेशों पर गुलाबी मिनी बसों को एंबुलेंस के तौर पर इस्तेमाल करने की प्रक्रिया शुरू की गई। रोडवेज बेड़े में शामिल पांच गुलाबी बसों की सीटें निकालकर इन्हें एंबुलेंस का रूप दिया गया ताकि कोरोना मरीजों को एंबुलेंस के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े।
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इन बसों में स्ट्रेचर, कुर्सी, ऑक्सीजन सिलिंडर सहित प्राथमिक चिकित्सा की सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई थी, ताकि जरूरत पड़ने पर इनका प्रयोग किया जा सके। इसके बाद सरकार ने लॉकडाउन लगा दिया और संक्रमितों की संख्या भी धीरे-धीरे कम होने लगी। मौजूदा समय में जिले में सिर्फ 6 ही कोरोना एक्टिव मरीज हैं, जिनका उपचार चल रहा है। इस कारण आजतक इन एंबुलेंस का प्रयोग करने की नौबत नहीं आई। स्थिति सामान्य होने के बाद जून महीने में स्वास्थ्य विभाग ने गुलाबी बसों को डिपो को लौटा दिया। पिछले एक महीने से यह बसें वर्कशॉप परिसर में खड़ी धूल फांक रही हैं। रूट पर नहीं चलने के कारण यात्रियों को भी इनका फायदा नहीं मिल पा रहा।
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कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए अभी इन बसों में सीटें न लगाने के निर्देश हैं ताकि इमरजेंसी के रूप में इन मोबाइल एंबुलेंस को प्रयोग में लाया जा सके। इसलिए फिलहाल इन बसों को यूं ही खड़ा किया है। आगामी जो भी आदेश आएंगे, उसके तहत कार्रवाई की जाएगी।
-शमशेर सिंह, ड्यूटी इंचार्ज, वर्कशॉप, अंबाला डिपो।