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Ambala News: रोडवेज ने कर्मचारियों को दो दिन का दिया था समय, नहीं तो कराई जाती एफआईआर
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अंबाला सिटी बस स्टैँड की फाइल फोटो
अंबाला से शुरू हुए ई-टिकट में गड़बड़ी करने का मामला पहले भिवानी और अब अन्य जिलों तक पहुंच गया है। इस मामले को लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जांच कराई जा रही है। जहां ई-टिकटिंग सुविधा दी जा रही है वहां पर देखा जा रहा है कि कर्मचारियों ने पूरी देनदारी जमा करा दी है या नहीं। वहीं दूसरी तरफ अंबाला में अभी तक रोडवेज प्रशासन दावा कर रहा है कि उन्होंने करीब तीन लाख रुपये की धनराशि रोडवेज कर्मचारियों से जमा करा ली है। मगर अब जांच में सामने आया है कि यह धनराशि अगर रोडवेज सतर्क न होता तो उनके पास आसानी से नहीं आती। क्योंकि जैसे ही इस मामले ने तूल पकड़ा वैसे ही रोडवेज ने कर्मचारियों को चिन्हित कर रिकवरी के लिए नोटिस जारी कर दिया था। नोटिस में साफ कहा गया था कि जिस कर्मचारी पर जितना रुपये बकाया है जमा कर दें अन्यथा उनके खिलाफ एफआईआर की जाएगी। इस नोटिस में कर्मचारियों को दो दिन का समय दिया गया था। एफआईआर की बात सुनते ही कर्मचारियों के होश उड़ गए और खुद को बचाने के लिए उन्होंने रोडवेज के पास बकाया धनराशि जमा करा दी। मगर रोडवेज विभाग के अधिकारियों की मानें तो इन कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार अभी भी लटक रही है।
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कार्रवाई की लटक रही तलवार
भले ही रोडवेज ने अंबाला से तीन लाख रुपये की धनराशि को कर्मचारियों से वसूल कर लिया हो मगर सरकारी राजस्व को वित्तीय नुकसान पहुंचाने की कवायद की गई थी यह स्पष्ट हो गया है। यही बात रोडवेज अधिकारियों की जांच रिपोर्ट में आई है। अब मुख्यालय को फैसला लेना है कि ऐसे कर्मचारियों पर क्या गाज गिरती है। अभी इस मामले के पूरा होने में इसलिए भी समय लग रहा है क्याेंकि विभागीय उच्चाधिकारी देखना चाहते हैं कि कहीं अन्य जिलों में तो यह मामला नहीं है। इसकी तहकीकात भी कराई जा रही है।
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क्या है रोडवेज का ई-टिकट से जुड़ा मामला
गोलमाल करने वाले परिचालकों ने ई-टिकट मशीन की ड्यूटी को इसका जरिया बनाया। इस दौरान बुकिंग इंचार्ज ने उनका लेखा-जोखा नहीं रखा। उदाहरण के तौर पर अंबाला से लुधियाना के लिए यात्रियों को ई-टिकट दी गई, लेकिन बीच रास्ते में परिचालक ने डिपो में फोन करके कहा कि मशीन में कोई दिक्कत है। इसलिए इसे एंड ड्यूटी कर दिया जाए। बुकिंग इंचार्ज ने भी परिचालकों पर विश्वास करके तुरंत एंड डिपो का बटन दबा दिया। इससे मशीन में दर्ज टिकटों का पूरा ब्योरा खत्म हो गया। जबकि एंड ड्यूटी करने से पहले बुकिंग इंचार्ज को संबंधित मार्ग का रिकॉर्ड रखना था, जोकि उसने नहीं रखा। इसके बाद जब परिचालक दूसरे मार्ग पर बस लेकर गया तो उसने वहां की ई-टिकट राशि को ही डिपो में जमा करवाया, जबकि लुधियाना की ई-टिकट राशि को हजम कर गया। अधिकारियों ने शक के आधार पर जब रोजाना चलने वाली बसों में डलने वाले डीजल और कमाई का मिलान किया गया तो इसमें काफी अंतर आया क्योंकि बस में लगे मीटर में किलोमीटर की संख्या अधिक थी। इसके बाद मुख्यालय के साथ जुड़े सर्वर को खंगाला गया तो सारा गोलमाल सामने आ गया कि परिचालकों ने दो जगह चक्कर लगाए और पैसे सिर्फ एक ही जगह के जमा करवाए। इस प्रकार इस मामले का खुलासा हुआ।
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वर्जन-- -- -- -- --
हमने जांच रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है। जो भी मुख्यालय के निर्देश पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी वह अंबाल रोडवेज प्रशासन कदम उठाएगा।-- -- -- -- -अश्वनी डोगरा, जीएम, रोडवेज
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कार्रवाई की लटक रही तलवार
भले ही रोडवेज ने अंबाला से तीन लाख रुपये की धनराशि को कर्मचारियों से वसूल कर लिया हो मगर सरकारी राजस्व को वित्तीय नुकसान पहुंचाने की कवायद की गई थी यह स्पष्ट हो गया है। यही बात रोडवेज अधिकारियों की जांच रिपोर्ट में आई है। अब मुख्यालय को फैसला लेना है कि ऐसे कर्मचारियों पर क्या गाज गिरती है। अभी इस मामले के पूरा होने में इसलिए भी समय लग रहा है क्याेंकि विभागीय उच्चाधिकारी देखना चाहते हैं कि कहीं अन्य जिलों में तो यह मामला नहीं है। इसकी तहकीकात भी कराई जा रही है।
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क्या है रोडवेज का ई-टिकट से जुड़ा मामला
गोलमाल करने वाले परिचालकों ने ई-टिकट मशीन की ड्यूटी को इसका जरिया बनाया। इस दौरान बुकिंग इंचार्ज ने उनका लेखा-जोखा नहीं रखा। उदाहरण के तौर पर अंबाला से लुधियाना के लिए यात्रियों को ई-टिकट दी गई, लेकिन बीच रास्ते में परिचालक ने डिपो में फोन करके कहा कि मशीन में कोई दिक्कत है। इसलिए इसे एंड ड्यूटी कर दिया जाए। बुकिंग इंचार्ज ने भी परिचालकों पर विश्वास करके तुरंत एंड डिपो का बटन दबा दिया। इससे मशीन में दर्ज टिकटों का पूरा ब्योरा खत्म हो गया। जबकि एंड ड्यूटी करने से पहले बुकिंग इंचार्ज को संबंधित मार्ग का रिकॉर्ड रखना था, जोकि उसने नहीं रखा। इसके बाद जब परिचालक दूसरे मार्ग पर बस लेकर गया तो उसने वहां की ई-टिकट राशि को ही डिपो में जमा करवाया, जबकि लुधियाना की ई-टिकट राशि को हजम कर गया। अधिकारियों ने शक के आधार पर जब रोजाना चलने वाली बसों में डलने वाले डीजल और कमाई का मिलान किया गया तो इसमें काफी अंतर आया क्योंकि बस में लगे मीटर में किलोमीटर की संख्या अधिक थी। इसके बाद मुख्यालय के साथ जुड़े सर्वर को खंगाला गया तो सारा गोलमाल सामने आ गया कि परिचालकों ने दो जगह चक्कर लगाए और पैसे सिर्फ एक ही जगह के जमा करवाए। इस प्रकार इस मामले का खुलासा हुआ।
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हमने जांच रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है। जो भी मुख्यालय के निर्देश पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी वह अंबाल रोडवेज प्रशासन कदम उठाएगा।