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Ambala News: मांगो के समर्थन में रोडवेज कर्मचारियों ने किया रोष प्रदर्शन
Tue, 25 Nov 2025 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Tue, 25 Nov 2025 12:46 AM IST
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अंबाला शहर में महाप्रबंधक अश्वनी डोगरा को ज्ञापन सौंपते हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चे के
- फोटो : वाहनों को डायवर्ट करते पुलिसकर्मी।
अंबाला। अपनी मांगो के समर्थन में हरियाणा रोडवेज कर्मचारी ने साझा मोर्चे के बैनर तले सोमवार को रोष मार्च निकाला। यह रोष मार्च रोडवेज कार्यशाला से शुरू हुआ जो अग्रसेन चौक से होते अंबाला सिटी बस स्टैंड स्थित महाप्रबंधक कार्यालय तक जारी रहा। इसके बाद रोडवेज कर्मचारियों ने परिवहन मंत्री के नाम महाप्रबंधक अश्वनी डोगरा को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि अगर सरकार ने कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो प्रदेश के सभी डिपो के रोडवेज कर्मचारी 18 जनवरी 2026 को अंबाला छावनी में परिवहन मंत्री के आवास पर न्याय मार्च निकालेंगे।
प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों को संबोधित करते हुए साझा मोर्चे के वरिष्ठ सदस्य जयबीर घणघस ने बताया कि प्रदेश सरकार रोडवेज विभाग की ओर ध्यान नहीं दे रही है। आम गरीब आदमी, व्यापारी, छात्र, छात्राओं की पसंद सस्ती एवं सुरक्षित परिवहन सेवा दिन प्रति दिन पूंजीपतियों के हाथों में सौंपी जा रही है। एक ओर जहां परिवहन मंत्री हर गांव में सरकारी बस भेजने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर इलेक्ट्रिक बसों व किलोमीटर स्कीम की बसों को रोडवेज बेड़े में शामिल किया जा रहा। इसके अलावा रोडवेज की बसों को चलाने के लिए चालकों व परिचालकों की बहुत कमी हैं। बसों की मरम्मत के लिए कार्यशाला में कर्मचारी न के बराबर रह गए हैं। रोडवेज में हजारों पड़ खाली पड़े हैं, इन पदों पर भर्ती नहीं की जा रही। चालक -परिचालकों व कर्मशाला के कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ गया है। मायाराम उनियाल ने कहा कि सरकार परिवहन कर्मचारियों की मांगों को जायज मानकर यूनियन नेताओं से समझौता कर रही है लेकिन उन जायज मांगो को लागू नहीं कर रही है। सरकार की इस कार्यशैली से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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प्रदर्शन में शामिल कर्मचारियों को संबोधित करते हुए साझा मोर्चे के वरिष्ठ सदस्य जयबीर घणघस ने बताया कि प्रदेश सरकार रोडवेज विभाग की ओर ध्यान नहीं दे रही है। आम गरीब आदमी, व्यापारी, छात्र, छात्राओं की पसंद सस्ती एवं सुरक्षित परिवहन सेवा दिन प्रति दिन पूंजीपतियों के हाथों में सौंपी जा रही है। एक ओर जहां परिवहन मंत्री हर गांव में सरकारी बस भेजने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर इलेक्ट्रिक बसों व किलोमीटर स्कीम की बसों को रोडवेज बेड़े में शामिल किया जा रहा। इसके अलावा रोडवेज की बसों को चलाने के लिए चालकों व परिचालकों की बहुत कमी हैं। बसों की मरम्मत के लिए कार्यशाला में कर्मचारी न के बराबर रह गए हैं। रोडवेज में हजारों पड़ खाली पड़े हैं, इन पदों पर भर्ती नहीं की जा रही। चालक -परिचालकों व कर्मशाला के कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ गया है। मायाराम उनियाल ने कहा कि सरकार परिवहन कर्मचारियों की मांगों को जायज मानकर यूनियन नेताओं से समझौता कर रही है लेकिन उन जायज मांगो को लागू नहीं कर रही है। सरकार की इस कार्यशैली से कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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