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Ambala News: नारी को शक्ति बनाने का संकल्प, संपत्ति बेच बनाया था ट्रस्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jan 2025 12:25 AM IST
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Resolved to make women empowered, trust was created by selling property
छावनी ​स्थित दयालबाग केंद्र पर उप​स्थित ब्रह्माकुमारी संस्था के अनुयायी। संस्था
अंबाला। नारी शक्ति का विश्व का सबसे बड़ा और विशाल संगठन की नींव रखने वाले ब्रह्माकुमारीज संस्थान के संस्थापक ब्रह्मा बाबा की 18 जनवरी को 56वीं पुण्य तिथि मनाई। इसे लेकर छावनी के दयाल बाग सेवाकेंद्र सहित अन्य सभी सेवा केंद्रों को विशेष फूलों से सजाया।
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बाबा की याद में 1 जनवरी से सभी परिसरों में विशेष योग-तपस्या जारी है। मौन योग साधना से बाबा को अपनी पुष्पांजलि अर्पित की। राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी शैली दीदी ने बताया कि वर्ष 1937 में उस जमाने के हीरे-जवाहरात के प्रसिद्ध व्यापारी दादा लेखराज कृपलानी ने परिवर्तन की नींव रखी।
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नारी उत्थान को लेकर उनका दृढ़ संकल्प ही था कि उन्होंने अपनी सारी जमीन-जायजाद बेचकर एक ट्रस्ट बनाया और उसमें संचालन की जिम्मेदारी नारियों को सौंप दी। इतने बड़े त्याग के बाद भी खुद को कभी आगे नहीं रखा। लोगों में परिवारवाद का संदेश न जाए इसलिए बेटी तक को संचालन समिति में नहीं रखा। उन्होंने अपने जीवन में जो मिसाल पेश की उसे आज भी लाखों लोग अनुसरण करते हुए राजयोग के पथ पर आगे बढ़ते जा रहे हैं।
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60 वर्ष की उम्र में रखी बदलाव की नींव

15 दिसंबर 1876 में जन्मे दादा लेखराज (ब्रह्मा बाबा) बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि और ईमानदार थे। उन्हों परमात्म मिलन की इतनी लगन थी कि अपने जीवन काल में 12 गुरु बनाए थे। वह कहते थे कि गुरु का बुलावा मतलब काल का बुलावा। 60 वर्ष की आयु में वर्ष 1936 में उनको दुनिया के महाविनाश और नई सृष्टि का साक्षात्कार हुआ। इसके बाद उन्होंने परमात्मा के निर्देशन अनुसार अपनी सारी चल-अचल संपत्ति को बेचकर माताओं-बहनों के नाम एक ट्रस्ट बनाया, उस समय संस्थान का नाम ओम मंडली था। वर्ष 1950 में संस्थान के माउंट आबू स्थानांतरण के बाद इसका नाम प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय पड़ा। इसकी प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती को नियुक्त किया।
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