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Ambala News: बिना गारंटी वित्तीय मदद देने की गुहार
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अस्तित्व के संकट में साइंस उद्योग, सरकार से मांगी मदद
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। साइंस उद्योग इन दिनों सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और दूसरी तरफ पूंजी का अभाव, इन दोहरी मार ने उद्यमियों की कमर तोड़ दी है। अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (असीमा) ने अब सरकार से उद्योग को बचाने के लिए बिना किसी गारंटी के वित्तीय सहायता प्रदान करने की गुहार लगाई है।
उद्यमियों का कहना है कि लागत में बेतहाशा वृद्धि और भुगतान की अनिश्चितता के चलते कई छोटी इकाइयां बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं। उद्योग संचालकों का कहना है कि समय रहते राहत नहीं मिली, तो हजारों लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो सकता है। संचालकों के अनुसार सरकार द्वारा घोषित वर्तमान ऋण योजनाएं धरातल पर प्रभावी साबित नहीं हो रही हैं। अंबाला में 150 से अधिक साइंस उद्योग हैं, जो विदेशों तक सामान निर्यात करते हैं।
सरकारी योजनाओं की पेचीदगियां
असीमा के पूर्व महासचिव गौरव सोनी ने बताया कि उद्योग संचालकों का मुख्य दर्द यह है कि सरकार की कागजी योजनाएं तो बहुत हैं, लेकिन बैंकों का रुख अभी भी वही पुराना है। बिना किसी अचल संपत्ति या गारंटी के बैंक ऋण देने को तैयार नहीं होते। छोटे उद्यमियों के पास गिरवी रखने के लिए अतिरिक्त संपत्ति नहीं होती, जिसके कारण वे आधुनिक तकनीक और विस्तार की दौड़ में पिछड़ रहे हैं।
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वित्त मंत्री से पहले भी की गई मांग
असीमा के प्रतिनिधियों के अनुसार वह इस संबंध में पूर्व में भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ज्ञापन सौंप चुके हैं। एसोसिएशन ने पुरजोर मांग की थी कि साइंस उद्योग को विशेष दर्जा देते हुए कोलेटरल फ्री लोन की सीमा बढ़ाई जाए। हालांकि, संचालकों में इस बात को लेकर मायूसी है कि लंबे समय के बाद भी सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। साइंस उद्योग इन दिनों सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और दूसरी तरफ पूंजी का अभाव, इन दोहरी मार ने उद्यमियों की कमर तोड़ दी है। अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (असीमा) ने अब सरकार से उद्योग को बचाने के लिए बिना किसी गारंटी के वित्तीय सहायता प्रदान करने की गुहार लगाई है।
उद्यमियों का कहना है कि लागत में बेतहाशा वृद्धि और भुगतान की अनिश्चितता के चलते कई छोटी इकाइयां बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं। उद्योग संचालकों का कहना है कि समय रहते राहत नहीं मिली, तो हजारों लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो सकता है। संचालकों के अनुसार सरकार द्वारा घोषित वर्तमान ऋण योजनाएं धरातल पर प्रभावी साबित नहीं हो रही हैं। अंबाला में 150 से अधिक साइंस उद्योग हैं, जो विदेशों तक सामान निर्यात करते हैं।
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सरकारी योजनाओं की पेचीदगियां
असीमा के पूर्व महासचिव गौरव सोनी ने बताया कि उद्योग संचालकों का मुख्य दर्द यह है कि सरकार की कागजी योजनाएं तो बहुत हैं, लेकिन बैंकों का रुख अभी भी वही पुराना है। बिना किसी अचल संपत्ति या गारंटी के बैंक ऋण देने को तैयार नहीं होते। छोटे उद्यमियों के पास गिरवी रखने के लिए अतिरिक्त संपत्ति नहीं होती, जिसके कारण वे आधुनिक तकनीक और विस्तार की दौड़ में पिछड़ रहे हैं।
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वित्त मंत्री से पहले भी की गई मांग
असीमा के प्रतिनिधियों के अनुसार वह इस संबंध में पूर्व में भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ज्ञापन सौंप चुके हैं। एसोसिएशन ने पुरजोर मांग की थी कि साइंस उद्योग को विशेष दर्जा देते हुए कोलेटरल फ्री लोन की सीमा बढ़ाई जाए। हालांकि, संचालकों में इस बात को लेकर मायूसी है कि लंबे समय के बाद भी सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।